
Richa Dube
लखनऊ .(पत्रिका न्यूज नेटवर्क). बिकरू हत्याकांड (Bikaru Hatyakand) के एक साल बाद, जिसमें जुलाई 2020 में गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dube) और उसके लोगों द्वारा कथित तौर पर आठ पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, यह घटना अब यूपी में ब्राह्मण राजनीति (brahmin politics in up) बदल रही है। विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे (Richa Dube) को चुनाव लड़ाने की तैयारी है। कुछ राजनीतिक दल चुनाव लडऩे के लिए दिवंगत विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे मिले हैं।
ऋचा दुबे परिवार के एक सदस्य ने बताया कि दो दलों के नेताओं ने प्रस्ताव के साथ ऋचा से संपर्क किया है। परिवार के सदस्य ने कहा, नेताओं ने कहा कि यही एकमात्र तरीका है जिससे वह परिवार की पीड़ा का बदला ले सकती हैं और अपने दो बच्चों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकती हैं। इन पार्टियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनके कार्यकर्ता उनके अभिमान का ध्यान रखेंगे। उन्होंने कहा कि ऋचा ने अभी तक राजनीति में आने का मन नहीं बनाया है।
सपा से लड़ चुकी है चुनाव
संयोग से, ऋचा ने 2015 में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जिला पंचायत चुनाव लड़ा चुकी। हालांकि, बिकरू नरसंहार के बाद, समाजवादी पार्टी ने इस बात से इनकार किया कि ऋचा उनकी सदस्य रही है।
पार्टियां करती रहीं हैं वकालत
बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने अपने 'प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलनों' (ब्राह्मण सम्मेलन) में बार-बार कहा है कि बिकरू मामले में 'निर्दोष ब्राह्मणों' को निशाना बनाया गया था। हालांकि, मिश्रा ने विकास दुबे पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन, उन्होंने अपने संदेश को रेखांकित करने के लिए बिकरू नाबालिग विधवा खुशी दुबे का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से जेल में बंद खुशी को बसपा कानूनी सहायता देगी। खुशी 16 साल की थी जब उसने एक अन्य बिकरू आरोपी अमर दुबे से शादी की। शादी के तीन दिन बाद बिकरू हत्याकांड हुआ और उसके बाद पुलिस मुठभेड़ में अमर दुबे मारा गया। आप सांसद संजय सिंह ने कहा, खुशी के साथ किया गया व्यवहार अनुचित था। पुलिस ने उसके खिलाफ आरोपों को सूचीबद्ध नहीं किया है, फिर भी उसे जमानत से वंचित किया।
कांग्रेस ने भी खेला ब्राह्मण कार्ड
एक कांग्रेस नेता ने कहा, पुलिस के पास सभी छह मुठभेड़ों के लिए एक ही स्क्रिप्ट थी। हम आरोपियों का समर्थन नहीं करते हैं। लेकिन, उन्हें गोली मारने के बजाय गिरफ्तार किया जाना चाहिए और अदालत में मुकदमा चलाया जाना चाहिए था। कई गैर-ब्राह्मण माफिया हैं जो खुले घूम रहे हैं। और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है।
Published on:
06 Sept 2021 02:25 pm
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