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रात 11 बजे टीवी से आती थीं चीखें, कांप उठता था पूरा घर, वो डरावना और खौफनाक शो जिसकी सनसनी आज भी है याद

First Indian horror TV show: रात के 11 बजे जब पूरे घर में सन्नाटा छाता था, टीवी के इस शो से अचानक आती थीं दिल दहला देने वाली चीखें, जो पूरे माहौल को भयंकर रूप से डरावना बना देती थीं। उस शो की खौफनाक आवाजें और डरावनी मंजरों ने हमारे दिलों में गहरा असर छोड़ा था।

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रात 11 बजे टीवी से आती थीं चीखें, कांप उठता था पूरा घर, वो डरावना और खौफनाक शो जिसकी सनसनी आज भी है याद

'किले का रहस्य' (सोर्स; x @HorrorNHaunted)

Kile Ka Rahasya: आज के दौर में नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम और सैकड़ों टीवी चैनल्स पर हॉरर फिल्मों और वेब सीरीज की लाइन लगी हुई है, लेकिन क्या आपको याद है एक समय जब केवल दूरदर्शन हुआ करता था? 1980 के दशक में जब टीवी देखना एक सामूहिक अनुभव था, उस समय एक ऐसा शो आया जिसने भारतीय टेलीविजन पर 'डर' की परिभाषा को ही उथल-पुथल कर दी। बता दें, लोग 'आहट' और 'फियर फाइल्स' को टीवी का पहला हॉरर शो मानते हैं, लेकिन सच तो ये है कि इनसे भी पहले 'किले का रहस्य' ने फैंस के पसीने छुड़ा दिए थे।

वो डरावना और खौफनाक शो जिसकी सनसनी आज भी है याद

दरअसल, साल 1989 में दूरदर्शन पर स्ट्रीम होने वाला ये धारावाहिक हफ्ते में केवल एक दिन आता था, लेकिन इसका समय रात के करीब 11 बजे का था। जैसे ही टीवी से डरावनी चीखें सुनाई देतीं, घरों में सन्नाटा छा जाता था। उस दौर के बच्चे और बड़े आज भी याद करते हैं कि कैसे इस शो का खौफ पूरे हफ्ते उनके दिमाग पर छाया रहता था और लोग डर के मारे चैनल बदलने की हिम्मत तक नहीं करते थे।

इतना ही नहीं, 'किले का रहस्य' की कहानी एक रहस्यमयी और भुतहा किले के इर्द-गिर्द घूमती थी, जिसने खौफनाक सीन के हर दायरे को पार कर दिया था। इस शो का सबसे डरावना हिस्सा वो था, जब ये दिखाया जाता था कि जो भी शख्स उस किले के अंदर जाता, वो अचानक भूतों के चपेट में आ जाता है। इसके बाद उस व्यक्ति के साथ या तो कोई अनहोनी होती थी या उसकी रहस्यमयी मौत हो जाती थी। ये एक ऐसा सस्पेंस था जिसने उस जमाने के फैंस को टीवी सेट से चिपकाए रखा था।

आज भी हैं लोगों के दिलों में ताजा

इसमें सबसे मजेदार बात ये थी कि आज के फेमस अभिनेता, लेखक और संगीतकार पीयूष मिश्रा ने इस शो में अहम भूमिका निभाई थी। उनके साथ वीरेंद्र सक्सेना जैसे मंझे हुए स्टार्स भी थे। बता दें, उस समय बिना किसी हाई-फाई तकनीक और वीएफएक्स के केवल बेहतरीन अदाकारी और बैकग्राउंड म्यूजिक के दम पर ऐसा माहौल बनाया जाता था कि लोग कांप जाते थे।

बता दें, आज के हॉरर शो भले ही ग्राफिक्स के मामले में बहुत आगे निकल गए हों, लेकिन 'किले का रहस्य' की सादगी में जो डर छिपा था, वो आज भी उन लोगों के दिलों में ताजा है जिन्होंने उस दौर को जिया है। ये शो भारतीय टेलीविजन इतिहास का वो अध्याय है जिसने साबित किया कि डर पैदा करने के लिए महंगी तकनीक नहीं, बल्कि एक अच्छी कहानी और दमदार डायरेक्शन की जरूरत होती है। अगर आपने भी बचपन में इस शो को देखा है, तो यकीनन वो 'किले का रहस्य' और खौफनाक मंजर देख आज भी डर सकते है।

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