25 मार्च 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बर्थ डे स्पेशल- श्रेया घोषाल के लिए संगीत ही जिन्दगी

बॉलिवुड की लोकप्रिय और युवा पार्श्व गायिका श्रेया घोषाल का जन्मदिन है। इस खास मौके पर हम आपसे शेयर करेंगे उनकी कुछ निजी जिन्दगी की बातें और गायिकी के सफर की।

4 min read
Google source verification

image

barkha mishra

Mar 11, 2016

बॉलिवुड की लोकप्रिय और युवा पार्श्व गायिका श्रेया घोषाल का जन्मदिन है। इस खास मौके पर हम आपसे शेयर करेंगे उनकी कुछ निजी जिन्दगी की बातें और गायिकी के सफर की।

श्रेया घोषाल का जन्म 12 मार्च 1984 को हुआ था। श्रेया बंगाली परिवार से है। राजस्थान से श्रेया का जुड़ाव जन्म से ही है। वो राजस्थान के कोटा के पास एक छोटे से कस्बे रावतभाटा में पली बढ़ीं। उनके परिवार ने शुरु से ही पढ़ाई लिखाई पर दिया। उनके पिता भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र में संयंत्र नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र इंजीनियर के रूप में भारतीय नाभिकीय ऊर्जा निगम के लिए काम करते हैं, जबकि उनकी मां साहित्य की स्नातकोत्तर छात्रा हैं।

श्रेया घोषाल 12 मार्च 1984 बैकग्राउंड सिंगर है। उन्होंने बॉलीवुड में, क्षेत्रीय फिल्मों बहुत सारे गाने गाए और कस्तूरी जैसे भारतीय धारावाहिकों के लिए भी गाया है। हिंदी के अलावा, उन्होंने असमिया, बंगाली, कन्नड़, मलयालम, मराठी, पंजाबी, तमिल और तेलुगु में भी गाने गाए हैं। अपनी शिक्षा उन्होने रावतभाटा के एटॉमिक एनर्जी सेंट्रल स्कूल (AECS) और अणुशक्तिनगर (मुंबई) से की। उसके बाद स्नातक के लिए उन्होंने SIES कॉलेज के कला संकाय में दाखिला लिया।

4 साल की उम्र में मॉ के साथ पहली संगत



जिस उम्र में लड़कियां गुड़ियाओं से खेलने में रुचि रखती थी, उस उम्र में श्रेया ने पहली बार हारमोनियम पर अपनी मॉ के साथ चार साल की उम्र में संगत की। उसके बाद उनके माता-पिता ने उन्हें कोटा में महेशचंद्र शर्मा के पास हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विधिवत् शिक्षा के लिए भेज दिया।

सा रे गा मा में जीता पहला खिताब


श्रेया ने अपन पहला खिताब सा रे गा मा चिल्ड्रन स्पेशल में जीता। उस समय वो बच्ची थी। उस समय सोनू निगम कार्यक्रम की मेजबानी किया करते थे। उनके साथ निर्णायक मंडल में कल्याण जी भी सा रे गा मा से जुड़े हुए थे। उन्होने ने ही श्रेया के माता पिता को मुम्बई आने के लिए मनाया। मुम्बई में ही रहकर श्रेया ने 18 महिने कल्याण जी से शिक्षा ली और मुम्बई के ही मुक्त भिड़े से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा को जारी रखा। लेकिन उस समय उनको किसी फिल्म में गाने का मौका नही मिला।

फिल्म देवदास से मिला पहला ब्रेक

सा रे गा मा में श्रेया ने दूसरी बार भाग लिया। इस बार वो बच्चों के साथ नही बल्कि व्यस्क प्रतिभागियों के साथ प्रतिस्पर्धा में थी। इस प्रतिस्पर्धा में उन्होने अपनी गायिकी से फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली का ध्यान अपनी ओर तब खींचा। और साल 2000 में, उन्होंने अपनी फिल्म देवदास में मुख्य महिला किरदार पारो यानि एश्वर्या राय को आवाज देने का प्रस्ताव मिला। इस फिल्म के लिए श्रेया ने इस्माइल दरबार के संगीत निर्देशन में पांच गाने गाए।

पहले ब्रेक में ही दी दिग्गज गायकों को टक्कर



फिल्म देवदास में अपनी गायिकी से श्रेया घोषाल जल्द ही उचाईयों को छूने लगी। श्रोताओं को उनकी आवाज बेहद पसंद आई। जिसके बाद से ही उनका नाम बॉलिवुड जगत के दिग्गज गायकों में शामिल हो गया।

आर.डी.बर्मन ने दिया उभरती प्रतिभा का पुरस्कार

अलका याज्ञिक, सुनिधि चौहान, साधना सरगम और कविता कृष्णमूर्ति के साथ चोटी की पार्श्व गायिक बन गयीं. इस गीत ने उन्हें उस साल का सर्वश्रेष्ठ गायिका का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार दिलाया। साथ ही उभरती प्रतिभाओं के लिए दिया जानेवाला आर॰ डी॰ बर्मन पुरस्कार भी उन्हें उसी पुरस्कार समारोह में दिया गया।

सुरीली आवाज का कुछ इस कदर छाया जादू

देवदास के बाद, ए. आर. रहमान, अनु मलिक, हिमेश रेशमिया, मणि शर्मा, एम. एम. किरावनी, नदीम-श्रवण, शंकर-एहसान-लॉयल, प्रीतम, विशाल-शेखर, हंसलेखा, मनो मूर्ति, गुरुकिरण, इल्लया राजा, युवन शंकर राजा और हैरीज जयराज समेत बहुत सारे संगीत निर्देशकों के निर्देशन में बहुत सारी अभिनेत्रियों के लिए गाती रही हैं। उन्होंने उत्तर और दक्षिण फिल्म उद्योगों के लिए बहुत सारे पुरस्कार जीते हैं। भूल-भुलैया के ‘मेरे ढोलना’ गीत के लिए भी उन्हें बहुत वाहवाही मिली.

विभिन्न भाषाओं में गा चुकी है गाने



श्रेया घोषाल ने ना केवल हिन्दी गानों में अपनी पहचान बनाई। बल्कि उन्होने तमिल, तेलुगु, मलयालम, बंगाली, कन्नड, गुजराती, मेइती, मराठी और भोजपुरी समेत कई क्षेत्रीय भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए हैं।

रुमानी गीत बन रहे पहचान

उनकी आवाज का गठन इस तरह का है कि रूमानी गीत उस पर फबता है और आवाज को वे बखूबी पेश कर सकती हैं (इसकी बहुत ही उम्दा मिसाल जिस्म का "जादू है नशा है" है). देवदास के अलावा, जिस्म, साया, इंतेहां, आउट ऑफ कंट्रोल, खाकी, मुन्नाभाई MBBS, धूम, कुछ कहा आपने, अरमान, देश देवी, मुझे मेरी कमस, LOC कारगिल, एतबार, क्रिश, पुलिस फोर्स, लगे रहो मुन्नाभाई, गुरु, बिग B, सागर एलियाज जैकी रिलोडेड से लेकर हाल की ब्लू, कुर्बान, गजनी, रब ने बना दी जोड़ी, 3 इडियट्स,P.K वगैरह के लिए उन्होंने गाने गाए.
लगातार हिट गाने देने के बाद श्रेया घोषाल को अब तक पांच फिल्म फेयर अवार्ड्स से नवाजा जा चुका है।


गुपचुप तरीके से की शादी

shreya ghoshal

अपनी शादी को लेकर श्रेया घोषाल काफी चर्चा में रहीं। लम्बे समय तक अपने ब्वॉयफ्रैंड शिलादित्य के साथ रिश्ते में रहने के बाद श्रेया ने उनके साथ गुपचुप तरीके से पांच फरवरी को शादी कर ली। शादी के बाद उन्होने खुद इस बात की जानकारी ट्वीट करके दी। श्रेया घोषाल के पति शिलादित्य मुंबई स्थित रेसिलियंट टेक्नॉलजीज नाम की कंपनी के मालिक हैं।

कम समय में उन्हे कई बड़ी सफलता प्राप्त की। जिसमें उन्हे फिल्मफेयर अवॉर्ड के अलावा भी कई अवॉर्ड मिले।इसके बाद भी उन्होंने कई फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग के लिए फिल्म अवॉर्ड्स जीते। जो कुछ इस प्रकार से हैं


नैशनल फिल्म अवॉर्ड्स

2002: नैशनल फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट फिमेल प्लेबैक सिंगर - बैरी पिया (देवदास)
2006: नैशनल फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट फिमेल प्लेबैक सिंगर - धीरे जलना (पहेली)
2007: नैशनल फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट फिमेल प्लेबैक सिंगर - ये इश्क है (जब वी मेट)

फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड्स

2003-फ़िल्मफ़ेयर आर॰ डी॰ बर्मन अवॉर्ड फॉर न्यु म्यूजिक टैलेंट
2003- फ़िल्मफ़ेयर बेस्ट फिमेल प्लेबैक अवॉर्ड (कविता कृष्णमूर्ति के साथ साझा) - डोला रे (देवदास)
2004- फ़िल्मफ़ेयर बेस्ट फिमेल प्लेबैक अवॉर्ड - जादू है नशा है (जिस्म)
2008- फ़िल्मफ़ेयर बेस्ट फिमेल प्लेबैक अवॉर्ड - बरसो रे (गुरु)
2009- फ़िल्मफ़ेयर बेस्ट फिमेल प्लेबैक अवॉर्ड - तेरी ओर (सिंह इस किंग)