
'आंधी' और 'किस्सा कुर्सी का' फिल्मों के पोस्टर। (फोटो सोर्स: IMDb)
Emergency 1975 and Bollywood: 25 जून 1975 भारत के इतिहास का वो काला दिन देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के शासनकाल में इमरजेंसी लगाई गई थीं। इस इमरजेंसी ने देश की आम जनता पर ही नहीं भारतीय सिनेमा पर भी बुरा असर डाला था। इस आपतकाल के दौर में कई फिल्मों की शूटिंग पर असर पड़ा, कई कलाकारों, सिंगर्स और फिल्मों को भी बैन किया गया। इतना ही नहीं 'शोले' फिल्म का क्लाइमेक्स तक भी बदला गया है। आइए जानते हैं 51 साल पहले लगी इमरजेंसी ने बॉलीवुड को किस-किस तरह प्रभावित किया।
29 जून 1975 को इमरजेंसी के दौरान तत्कालीन पीएम ऑफिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए इस बात का खुलासा किया था कि फिल्म जगत से जुड़े से ताल्लुक रखने वाले लेखकों जैसे हरिवंश राय बच्चन, अमृता प्रीतम, राजिंदर सिंह बेदी, मौलाना अतीक-उल-रहमान, समेत तकरीबन 40 राइटर्स ने इमरजेंसी को सही ठहराया था। वहीं, अभिनेता सुनील दत्त ने जर्मनी के बर्लिन से इंदिरा गांधी को टेलीग्राम कर उनके इस कदम को फुलऑन सपोर्ट किया था।
जब भारत में जब इमरजेंसी लगने के दौरानइंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी पर भी कई तरह के आरोप, जिनमें (रिपोर्ट्स के अनुसार), लोगों पर कई तरह की ज्यादतियां, जबरन नसबंदी, सरकारी काम में दखल अंदाजी और मारुति उद्योग विवाद के आरोप लगे थे। और इमरजेंसी के दौरान संजय गांधी पर आरोप था कि इमरजेंसी के दौरान 1975 में बनी फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' के प्रिंट कथित तौर पर उनके कहने पर जलाए गए। बता दें कि मरजेंसी के दौरान फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' पर बैन लगा था क्योंकि फिल्म पर संजय गांधी के ऑटो-मैन्युफैक्चरिंग प्लान्स का मजाक उड़ाने का आरोप था।
जानकारी के लिए बता दें कि इमरजेंसी के दौरान किशोर कुमार के कई गानों को बैन कर दिया गया था। इसकी वजह थी कि उस दौरान कांग्रेस के वरिष्ट नेता विद्या चरण शुक्ला ने किशोर कुमार को फोन पर एक ऑफर दिया था कि वो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इमरजेंसी के 20 सूत्री प्रोग्राम के लिए बनाए गए गाने को अपनी आवाज में गाएं, मगर किशोर कुमार ने इससे साफ़ इंकार कर दिया था, जिसके चलते वो किशोर पर नाराज हो गए और उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो पर किशोर के गाने बैन कर दिए थे।
इमरजेंसी लगने के बाद जब 15 अगस्त 1975 को फिल्म शोले रिलीज हुई थी तो इसका क्लाइमैक्स बदला गया था। इस बात का खुलासा करते हुए रमेश सिप्पी ने बताया था, फिल्म का क्लाइमैक्स जो दर्शकों ने देखा वो वैसा नहीं था, क्योंकि इमरजेंसी के दौरान सेंसर ने फिल्म के क्लाइमैक्स पर आपत्ति जाहि की थी।" इसके आगे उन्होंने बताया था कि असली क्लाइमैक्स में ठाकुर अपने नुकीले जूतों से गब्बर को मार देता है। और इस सीन पर सेंसर ने कानून का हवाला देकर बदलने को कहा था। जिसके चलते फिल्म का नया क्लाइमेक्स सीन सिर्फ 26 दिनों में दोबारा शूट किया गया और गब्बर को कानून के हवाले किया गया।
52 साल पहले रिलीज हुई 'आंधी' फिल्म को भी इमरजेंसी के चलते बैन किया गया था। इस फिल्म में संजीव कुमार, सुचित्रा सेन, ओम शिवपुरी और एके हंगल समेत कई बड़े सुपरस्टार्स लीड रोल में नजर आए थे। फिल्म पर एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी और उसके समर्थकों ने आरोप लगाया कि फिल्म में सुचित्रा सेन का किरदार इंदिरा गांधी से प्रेरित है और इसमें उनकी नेता यानी इंदिरा गांधी की इमेज को खराब दिखाया गया है। गुलजार साहब के डायरेक्शन में बनी फिल्म पर इसी वजह से लगा था बैन। हालांकि, आखिर में एक शर्त पर फिल्म से बैन हटाया गया जब गुलजार ने फिल्म में एक सीन जोड़ा जिसमें सुचित्रा सेन के किरदार को इंदिरा गांधी की फोटो के साथ और ये डायलॉग बोलते हुए दिखाया गया कि श्रीमती गांधी उनकी आदर्श थीं।
उसी दौर में जब बॉलीवुड के सुपरस्टार अभिनेता देव आनंद ने इमरजेंसी को प्रोपेगेंडा कहा और उसका खुलेआम विरोध किया तो इस वजह से सरकार ने दूरदर्शन पर उनकी फिल्मों को बैन कर दिया था। वहीं, नरगिस दत्त ने भी देव आनंद की इस बात पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि वो जिद कर रहे हैं।
Updated on:
25 Jun 2026 01:05 pm
Published on:
25 Jun 2026 12:35 pm
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