जिसमें गफरूद्दीन खान मेवाती व उनके साथियों ने प्रस्तुति दी। कलाकारों ने ‘तू नवाज पे आए तो नवाज दे जमाना, रब तू करीम ही तो ठहरा तेरे कर्म का क्या ठिकाना’, जैसे दोहे से भपंग वादन की शुरुआत की। उन्होंने भपंग के साथ अलबख्शी शैली में ‘बारी सी उम्र में पिया मार गियो रे’ , ‘दुनिया में बाबा देख ले हो रही है टर ही टर’, जैसे गीत भी सुनाए।