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पाश्र्वनाथ कॉलोनी: इन आंख मूंदने वालों पर क्यों न हो कार्रवाई?

नौ साल बाद विद्युत कंपनी को जिम्मेदारी लेकिन निगम के जिम्मेदार अब तक बचे हुए, अधूरे विकास कार्यो के बावजूद निगम अधिकारियों ने पूर्णता प्रमाण दिया

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उज्जैन.
करीब १५ वर्ष पुरानी पॉश कॉलोनी पाश्र्वनाथ सिटी के रहवासी आज भी बिजली समस्या से परेशान हैं। ११ दिन से वे क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अधिकारी-जनप्रतिनिधियों ने विद्युत कंपनी को दो दिन में समस्या निराकरण की जिम्मेदारी दी है। दूसरी ओर कॉलोनी बसने के दौरान नगर निगम के जिन अधिकारियों ने आंख मूंदकर पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर, उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कॉलोनी विकास से जुड़े अधिकारी और कॉलोनाइजर की सांठगांठ का खामियाजा कई बार वहां के रहवासियों को भुगतना पड़ता है। देवासरोड स्थित पॉश्र्वनाथ कॉलोनी इसका बड़ा उदाहरण है। यहां सड़क, पानी, बिजली जैसे आधारभूत विकास कार्य पूरे नहीं होने के बावजूद नगर निगम के तत्कालीन अधिकारियों ने कॉलोनाइजर पाश्र्वनाथ डेवलपर्स को पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिए। इसके बाद कॉलोनाइजर ने बंधक आवासीय प्लॉट मुक्त करवाकर बैच भी दिए और निगम लकीर पीटता रहा। कागजों पर निगम ने कई बार सख्ती दिखाई लेकिन न कॉलोनाइजर का कुछ बिगड़ा और नहीं पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई हुई है। १२ वर्ष से कॉलोनाइजर से सुपरविजन चार्ज लेकर बैठी विद्युत कंपनी के अधिकारियों ने भी अब तक पलड़ा झाडऩे के अलावा कुछ नहीं किया है। शुक्रवार को मंत्री मोहन यादव व कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने बैठक कर विद्युत कंपनी अधिकारियों को समस्या निराकरण के निर्देश दिए हैं। इससे कॉलोनी विकास पूर्णता प्रमाण पत्र जारी होने के नौ साल बाद विद्युत कंपनी के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो पाई है लेकिन निगम के तत्कालीन अधिकारियों पर कार्रवाई का इंतजार है।
सदन में हंगामा, कार्रवाई के निर्देश लेकिन हुआ कुछ नहीं
जनवरी २०२० में हुए नगर निगम सम्मेलन में भी पाश्र्वनाथ सिटी की बिजली समस्या का मुद्दा उठा था। अधिकांश तत्कालीन पार्शदों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। विधिक राय व अधिनियम का हवाला देकर बंधक प्लॉट बैचकर विद्युत सब स्टेशन लगवाने व दोषी इंजीनियरों के खिलाफ एफआआर करवाने का निर्णय लिया गया था। सदन के कुछ महीने बाद संबंधित पुलिस थाने में शिकायत भी की गई लेकिन प्रकरण दर्ज नहीं हुआ क्योंकि निगम प्रशासन ने शिकायत में तत्कालीन जिम्मेदार इंजीनियरों के नाम ही नहीं लिखे थे।
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ऐसा आचरण जिससे परेशान हुए रहवासी
१. अूधेरे विकास में प्रमाण पत्र दिया
देवासरोड पाइप फैक्टरी की ३९.३८४ हैक्टेयर भूमि पर कॉलोनी विकसित करने मेसर्स पॉश्र्वनाथ डेवलपर्स ने दो फेज में कॉलोनी विकास की अनुमति चाही। निर्धारित शर्तों के आधार पर १ फरवरी २००७ व १२ फरवरी २००७ को निगम ने अनुमति दी। आंतरिक विकास कार्य के पूर्णता प्रमाण पत्र भी २९ मई २०१० व १ मार्च २०१४ को जारी कर दिए गए जबकि विद्युत सब स्टेशन नहीं बना था। पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं थी और कई उद्यान पूर्ण विकसित नहीं हो सके थे।
२. बंधक प्लॉट फ्री हुए, राशि का अभाव
विकास कार्य पूर्ण करने के एवज में निगम ने ४० से अधिक आवासीय प्लॉट बंधक रखे थे। आंख मुंदकर विकास प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। नतीजतन बंधक प्लॉट मुक्त हो गए और कॉलोनाइजर ने इन्हें भी बैच दिया। विद्युत लोड बढऩे पर निगम ने दो वर्ष पूर्व कॉलोनी में नई भवन अनुज्ञा जारी करने पर रोक लगा दी। खरीदारों ने आपत्ति ली। न्यायालय के आदेश के परिपालन में अब भवन अनुज्ञा दी जा रही है। कॉलोनी में अब भी पर्याप्त विद्युत सप्लाई नहीं है और आने वाले नए रहवासियों को भी वर्षों पहले हुई अनियमितता का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
३. ऐसे भूखंड बंधक जो अब बिक नहीं रहे
निगम रिकार्ड अनुसार, सब स्टेशन स्थापित करने में करीब १९ करोड़ रुपए का आंकलन है। आवासीय बंधक प्लॉट मुक्त हो चुके हैं। निगम के पास अब पीएसपी भूमि जिसमें स्कूल के लिए ९ हजार ३६२ वर्ग मीटर व शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के लिए ५ हजार ४२२ वर्ग मीटर भूमि बंधक है। निगम ने उक्त भूमियों को विक्रय कर सब स्टेशन स्थापित करवाने का निर्णय लिय था। दो-तीन बार विज्ञप्ति जारी हो चुकी है लेकिन उक्त भूमि के लिए कोई खरीदार नहीं आया।
४.सुपरविजन की राशि ली, सब स्टेशन नहीं लगवाया
विद्युत सबस्टेशन स्थापित करने पाश्र्वनाथ डेवलपर्स ने वर्ष २०१२ में स्वीकृति के बाद सुपरिजन के लिए ७१ लाख ६ हजार ५५६ रुपए व सर्विस टेक्स के ८ लाख ७८ हजार ३७० रुपए जमा कर चुका है। सब स्टेशन स्थापित नहीं किया। विद्युत कंपनी व्यक्तिगत कनेक्शन नहीं देने के पीछे सुपरविजन चार्ज को आधार बता रही है।