
shankar mahadevan
इंडिया म्यूजिक समिट के दूसरे दिन के द कीनोट सेशन के दौरान गीतकार प्रसून जोशी ने शंकर महादेवन से पूछा क्या आप बचपन से ही सिंगर बनना चाहते थे, तो शंकर महादेवन ने कहा कि मैं मिडिल क्लास साउथ इंडियन परिवार में पैदा हुआ। हमारी संस्कृति में वो बात है कि कोई न कोई कुछ न कुछ जरुर सीखता है। करीब साढे तीन साल की उम्र में मैंने हारमोनियम के बारे में जाना। यह हारमोनिय मेरे रिश्तेदार के घर रखा हुआ था।इसपर मैंने 'चल चल चल मेरे साथी' गाना शुरू कर दिया। मेरा गाना सुनकर घरवालों को लगा कि मेरी संगीत में रुची है। इसके बाद उन्होंने मुझे कर्नाटक क्लासिकल की शिक्षा दिलानी शुरू कर दी।
खुद को साबित करने के लिए की इंजीनियरिंग
जब कभी मैं स्टूडियो में सिंगर्स को रिकॉर्डिंग करते हुए देखता था तो बस यही सोचता कि आखिर इनकी जिंदगी कैसी होती होगी। हालांकि मिडिल क्लास फैमिली के अरमान जिंदगी में डॉक्टर, इंजीनियर के इर्द-गिर्द ही घूमते हैं। इस वजह से खुद को साबित करने के लिए मैने भी इंजीनियरिंग की। दरअसल उस वक्त रियलिटी शो नहीं हुआ करते थे। जिससे आप अपने आप को दुनिया के सामने साबित कर सके। तो इस बारे में सोच कर भी डर लगता था। लेकिन मैने यह ठान लिया था कि म्यूजिक में मुझे कुछ करना है और फिर मैने इसे कॅरियर के तौर पर चुना। मैं गुलाम अली, पं जसराज, श्रीनिवास अय्यर, शुभलक्ष्मी जी से काफी इंस्पायर हुआ।
बताते चलें कि संगीत की दुनिया से रूबरु होने का यह सिलसिला रविवार दोपहर तक जारी रहेगा।
Photo Courtesy - Sanjay Kumawat
Published on:
13 Oct 2018, 11:52 PM IST
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