
Nadari Bridge
एटा। ये नदी और इसके ऊपर बहती हजारा नहर, देखकर आप भी आश्चर्य में पड़ जाएंगे। उत्कृष्ट निर्माण कला का ये नायाब नमूना देखने को मिलता है, कासगंज और एटा के बीच स्थित गांव Nadari में। ग्राम नदरई स्थित झाल का पुल है, जो ब्रिटिश शासनकाल की उत्कृष्ट निर्माण कला का ऐतिहासिक उदाहरण है। वहीं ये स्थान एटा और कासगंज के युवाओें के लिए पिकनिक स्पॉट से कम नहीं है।
ये बोले युवा
यहां एटा से आए प्रशांत यादव ने बताया कि यहां बेहद शांति रहती है। नवयुगलों के लिए यह जगह बेहद पसंदीदा है। हालांकि लोग अपने परिवार के साथ भी यहां आते हैं। वहीं विकास ने बताया कि एटा में और कुछ तो है नहीं, लेकिन ये एक ऐसा स्थान है, जहां ये अद्भुत नजारा हैरान करता है, तो वहीं यहां पानी की लहरों के बीच शीतल हवा भी आनंदित करती है।
ऊपर हजारा नहर, तो नीचे काली नदी
पुल के ऊपर बहती हजारा नहर और नीचे काली नदी ये नजारा देखते ही बनता है। इतना ही नहीं दोनों नदियों के बीच बने पुल के बीचों-बीच बनी कोठरियां स्वयं में अनूठी हैं। काली नदी से सौ फुट की ऊंचाई पर पुल का निर्माण इस तरह से किया गया कि ऊपर से हजारा नहर की निकासी हुई। नदी एवं नहर के बीचों-बीच 15 सुरंग मार्ग कोठरियों का निर्माण किया गया, जिन्हें चोर कोठरियों के नाम से जाना जाता है। जगह-जगह सीढ़ियां बनाकर इन कोठरियों में उतरने के भी इन्तजामात किए गए हैं। इस पुल को सिंचाई विभाग की ऐतिहासिक और उत्कर्ष संरचना माना जाता है। चूंकि इतना पुराना पुल होने के बावजूद इसकी मजबूती आज भी बरकरार है।
130 वर्ष पुराना है पुल
बताया जाता है कि बिट्रिश काल का यह पुल लगभग 130 वर्ष पुराना है। इस पुल का निर्माण सन् 1885 में शुरू हुआ था। चार वर्ष में इसका निर्माण तत्कालीन मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग एनडब्लू पी एवं कर्नल डब्लू एएच ग्रेट हैंड के निर्देशन में पूरा हुआ। इतिहास के जानकारों के मुताबिक ग्राम छावनी में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान स्थानीय मुख्यालय हुआ करता था। जहां जिला मजिस्ट्रेट की हैसियत एवं उसके नुमाइन्दे मय फौज के निवास करते थे। इस इलाके में जलापूर्ति का एक मात्र साधन काली नदी थी, जिससे क्षेत्र के किसानों एवं अन्य लोगों को जलापूर्ति का अभाव रहता था। जलाभाव से पीड़ित लोगों की मांग पर ही अंग्रेजी हुकूमत ने यहां हजारा नहर बनवाई।
Published on:
04 Jul 2019 02:42 pm
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