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बुलंदशहर हिंसा के शिकार इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के परिजन आज योगी आदित्यनाथ से मिलेंगे

बुलंदशहर हिंसा के शिकार इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह राठौर के परिजन मांग कर रहे हैं कि सुबोध कुमार सिंह को शहीद का दर्जा देते हुए तदनुसार कार्य किए जाएं।

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एटा

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Amit Sharma

Dec 06, 2018

Yogi Adityanath

Yogi Adityanath

एटा। बुलंदशहर हिंसा के शिकार जाँबाज इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह राठौर के परिजन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुरुवार को प्रातः 9.30 बजे भेंट करेंगे। परिजन मांग कर रहे हैं कि सुबोध कुमार सिंह को शहीद का दर्जा देते हुए तदनुसार कार्य किए जाएं। परिजनों में पत्नी रजनी, दोनों बेटे, बड़े भाई, भाभी व बहनोई शामिल हैं। मुलाकात लखनऊ में होगी।


क्या है मांग

परिजनों की मांग है कि सुबोध कुमार सिंह को शहीद का दर्जा दिया जाए। शहीदकेनाम से इंटर कॉलेज और इंटर कॉलेज खोला जाए। आरोपितों को जल्दी से जल्दी सजा दी जाए।
मुलाकात के दौरान परिजनों के साथ एटा के प्रभारी मंत्री अतुल गर्ग के साथ-साथ क्षेत्रीय विधायक सत्यपाल सिंह राठौर भी मौजूद रहेंगे।

गोवंश मिलने के बाद भड़की थी हिंसा

बता दें कि बुलंदशहर में गोवंश मिलने के बाद भड़की हिंसा के दौरान शहीद हुए यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के अंतिम संस्कार के दौरान प्रदेश सरकार की तरफ से कोई प्रतिनिथ नहीं पहुंचने से परिजनों में आक्रोश था। वहीं अंतिम संस्कार के दूसरे दिन प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर जिले के प्रभारी मंत्री अतुल गर्ग शहीद सुबोध कुमार के पैतृक गांव तरिगंवा पहुंचे। यहां उन्होंने जिलाधिकारी, एसएसपी और क्षेत्रीय विधायक की मौजूदगी में शहीद सुबोध कुमार के परिजनों से मुलाकात की थी। तभी तय हुआ था कि परिजनों की मुलाकात योगी आदित्यनाथ से कराई जाएगी।

अंतिम संस्कार रोक दिया था

याद रहे कि बुलंदशहर की स्याना कोतवाली एरिया के चिंगरावठी चौकी एरिया के जंगल में गोवंश मिलने से सोमवार दोपहर को बवाल हो गया था। मौके पर इकट्ठी हुई लोगों की भीड़ ने गढ़ बुलंदशहर रोड पर जाम लगा दिया। जाम खुलवाने का प्रयास कर रही पुलिस पर ग्रामीणों ने पथराव और गोलियां चला दीं। जवाब में पुलिस की तरफ से भी गोलियां चलाई गईं। पथराव के दौरान ही गोली लगने से इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की मौत हो गई। मंगलवार को शहीद का शव पैतृक गांव तरिगंवा लाया गया। जहां परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बुलाने की मांग करते हुए अंतिम संस्कार रोक दिया था। बाद में पुलिस प्रशासन के बड़े अधिकारियों से वार्ता के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए थे।