
Rickshaw puller
दिनेश शाक्य.
इटावा। केंद्र और राज्य सरकार की बहुत सारी महत्वाकांक्षी योजनाओं का संचालन महिलाओं और लड़कियों के लिए किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी ऐसा देखा जा रहा है कि इन योजनाओं का लाभ असल पीड़ितों तक नही नहीं पहुंच रहा है। तभी तो ऐसे-ऐसे पीड़ित सामने आते हैं कि उनकी दशा को देखने के बाद हर किसी के होश उड़ जाएं।
उत्तर प्रदेश के इटावा मुख्यालय पर विकास भवन के सामने आज करीब 15 साल की एक ऐसी लड़की मिली जो रिक्शा चलाते हुए नज़र आई। किसी लड़की को रिक्शा चलाते हुए देखकर मन में कुछ अजीब सा एहसास हुआ। जब मन नहीं माना तो लड़की से पूछ ही डाला कि वह रिक्शा चलाने के लिए मजबूर आखिरकार क्यों है। लड़की के साथ उसकी मां भी मौजूद थी। दोनों की कहानी सुनने के बाद मन द्रवित हो गया।
इटावा शहर के कोकपुरा गांव की रहने वाली सीमा देवी अपनी 15 साल की बेटी शिवानी के साथ कबाड़ा बीन कर अपने परिवार का गुजारा करती है। मां और बेटी ने बताया कि उनके पास कोई काम नहीं है। मजबूरी में वो कबाड़ा बीन कर अपनी जिंदगी का पहिया आगे बढ़ा रही है।
15 वर्षीय शिवानी बताती हैं कि उसके पापा की तबियत काफी दिनों से बहुत खराब है। वो सात बहन भाई हैं। पूरे दिन रिक्शा चला कर कूड़ा बीन कर कुछ पैसा जुटाते हैं। तब घर का गुजारा चलता है। पापा रिक्सा चलाते थे, लेकिन जब से उनकी तबियत ख़राब हुई है तब से वो कोई भी काम नहीं कर पाते। मजबूरी में सबसे बड़ी होने पर उसको अपने भाई बहनों के लिए यह सब करना पड़ रहा है। उसके साथ रिक्शे पर उसकी मम्मी रहती है। पूरे दिन भर कबाड़ा बीनते हैं।
शिवानी की मॉ सीमा का कहना है कि क्या करे साहब। जब मेरे पति की तबीयत ठीक थी तो फिर वह पूरा कबाड़ा बीन करके गुजरा करते थे, लेकिन पति की तबियत खराब होने की वजह से पेट भरने के लिए कुछ तो करना ही था। बच्चे भूखे प्यासे रहते थे। इस कारण कूड़ा बीन कर कुछ पैसे हो जाते हैं जिससे पेट तो भर जाता है। यही लड़की सबसे बड़ी है इसलिए मजबूरी में रिक्शा चलाती है।
इटावा के के.के.कालेज के इतिहास विभाग के प्रमुख डा.शैलेंद्र शर्मा का कहना है कि मासूम बच्ची को देखा और यह पाया कि वह एक रिक्शा चला रही है। 15-16 साल उम्र की लड़की लग रही है। उसकी मां पीछे बैठी हुई है।
जहां सरकारे एक से बढ कर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और बहुत सारी योजनाएं चला रही है, ऐसी दशा में संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है कि मासूम बच्ची रिक्शा चलाती है ओर उसकी मॉ कबाड़ बीनती है। 15 साल की उम्र में किसी लड़की को रिक्शा चलाते हुए देख कर मन आंदोलित होता है। सरकार में बैठे अधिकारियों से निवेदन है कि उस बच्ची को और जिसके पिता की हालत बेहद नासाज है, को सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाए। सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए ताकि वो ऐसा न करे । उसको आर्थिक मदद भी दी जाए ओर साथ मे उसकी पढ़ाई का भी इंतज़ाम किया जाए । विकास भवन के सामने रिक्शे पर बैठी लड़की और उसकी मां को देख कर के मन बहुत ही द्रवित हो गया।
Published on:
31 Aug 2019 04:55 pm
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