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यूपी के इस जिले में 471 ग्राम प्रधानों ने की सामूहिक इस्तीफे की पेशकश, जानें क्यों

ग्राम प्रधानों के इस्तीफे के पेशकश की खबर से उड़े अधिकारियों के होश

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खफा प्रधानों ने बायकाॅट के बाद सामूहिक इस्तीफे की पेशकश कर दी

इटावा. उत्तर प्रदेश के इटावा में ग्राम स्तरीय जल संरक्षण के बहाने बुलाये गये 471 प्रधानों ने डीएम सीडीओ के बैठक में न आने पर खुद का अपमान मानते हुए सामूहिक इस्तीफे की पेशकश कर दी, जिससे प्रशासनिक अफसरों के हाथ-पांव फूल गये। बुधवार सुबह 10 बजे के बाद मुख्यालय के विकास भवन में सभी प्रधानों को बुला तो लिया गया, लेकिन डीएम व सीडीओ के न आने से खफा प्रधानों ने बायकाॅट के बाद सामूहिक इस्तीफे की पेशकश कर दी। साथ ही उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं से गांव का विकास कार्य बाधित होता है।

सामूहिक इस्तीफा की पेशकश की खबर मिली तो जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव भी अपने समर्थकों के साथ प्रधानों के बीच पहुंचे और उनकी बात को सुनने के बाद धरने पर बैठ गये। थोड़ी ही देर बाद मुख्य विकास अधिकारी राजा गणपति आर मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठे प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्ष के बीच जाकर बैठ गए। उन्होंने धरने पर बैठे प्रधानों के समक्ष उनकी सभी मांगों को त्वरित ढंग से निपटाने का भरोसा भी दिया। कहा कि अगर कोई ऐसी समस्या है जिसका समाधान शासन स्तर से संभव है, उसके लिए शासन से पत्राचार किया जायेगा।

सामूहिक इस्तीफे की पेशकश करने वाले अधिकाधिक प्रधानों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि डीएम व सीडीओ की ओर से इस बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें जिले भर के सभी 471 प्रधानों को सामूहिक तौर पर बुलाया गया था। लेकिन लंबे इंतजार के बावजूद उनका बैठक में न आना बताता है कि वह कहीं न कहीं जनप्रतिनिधियों का अपमान करने पर अमादा हैं।

ग्राम प्रधान बोले
राहिन गांव के प्रधान बी.पी. राजन ने बताया कि इस बैठक की जानकारी सचिव सुशील कुमार के जरिए टेलीफोन पर दी गई थी। इसमें बताया गया कि जिला अधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी सभी प्रधानों की जल संरक्षण की समीक्षा बैठक लेंगे। बैठक में सभी प्रधानों का शामिल होना बेहद आवश्यक है। इसी आधार पर जिले भर के सभी प्रधान समय पर उपस्थित हो गए, लेकिन जिलाधिकारी और सीडीओ इस बैठक में दोपहर 12 बजे तक नहीं पहुंचे। इसी नाराजगी के चलते इस बैठक का बहिष्कार किया गया। लुहन्ना गांव के प्रधान राजवीर सिंह ने बताया कि चूंकि यह चुनावी वर्ष है और शासन स्तर से कहीं गौशाला निर्माण या फिर स्कूलों के कायाकल्प की योजनाएं संचालित की जाती रहती हैं। इसके चलते गांव का असल निर्माण नाली-खड़ंजा का निर्माण बाधित हो रहा है।

देश से लोकतंत्र पूरी तरह से गायब : जिला पंचायत अध्यक्ष
धरने पर पहुंचे जिला पंचायत अध्यक्ष अभिषेक यादव ने कहा कि देश से लोकतंत्र पूरी तरह से गायब हो गया है। सरकार ग्राम प्रधानों से जबरिया कार्य कराने में लगी हुई है। कोई भी ग्राम प्रधान अपनी मर्जी से कोई कार्य नहीं कर सकता है।

ग्राम प्रधानों की समस्याओं का होगा निवारण : सीडीओ
ग्राम प्रधानों की नाराजगी को लेकर सीडीओ राजा गणपति आर ने कहा कि प्रधानों की जो भी समस्या है उनका निराकरण जल्द ही जिला स्तर पर किया जाएगा और जिसका निराकरण शासन स्तर से संभव होगा उसके लिए शासन स्तर को पत्राचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि असल में मंडलायुक्त का कार्यक्रम एकाएक बुधवार सुबह इटावा भ्रमण का फाइनल हो गया था। इसी कारण ग्राम प्रधानों की बैठक में जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद नहीं हो सके। बेशक प्रधानों ने अपनी नाराजगी जताई है फिर भी सभी ने इस बात का भरोसा दिया है कि शासन स्तर की योजनाओं का हमेशा सहयोग करेंगे।

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