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Exclusive : ठाकुरों से नफरत लेकिन ठाकुर जसवंत सिंह थे फूलन देवी के लिए मसीहा

पढ़ें- दस्यु सुंदरी फूलन देवी से जुड़ी अनसुनी कहानी...

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Exclusive : ठाकुरों से नफरत लेकिन ठाकुर जसवंत सिंह थे फूलन देवी के लिए मसीहा

इटावा. दस्यु सुंदरी फूलन देवी को ठाकुर जाति के दुश्मन के रूप में याद किया जाता है। प्रतिकार का बदला लेने के लिए डकैत फूलन ने 14 फरवरी 1981 को कानपुर के बेहमई में 22 ठाकुरों को मौत की नींद सुला दिया था। तब से फूलन के प्रति ठाकुरों में नफरत है। लेकिन, यह भी सच है कि बेहमई कांड के बाद एक ठाकुर ने ही फूलन देवी की कदम दर कदम मदद की थी। और उन्हें राजनीति का ककहरा पढ़ाया था।

फूलन के ठाकुर से लगाव का खुलासा तब हुआ जब वह भदोही से सासंद बन गयीं थी। चंबल इलाके के चकरनगर में समाजवादी पार्टी की एक सभा थी। इसमें मुलायम सिंह भी मौजूद थे। ठाकुर बहुल इलाके में आयोजित इस सभा में पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने फूलन देवी को निर्देश दिया कि वे अपने संबोधन में ठाकुरों के सम्मान में भी कुछ बोलें। तब फूलन को कुछ समझ में नहीं आया। उन्होंने तब इस बात का खुलासा किया कि भले ही मुझे ठाकुरों से नफरत के लिए याद किया जाता है लेकिन बेहमई कांड के बाद मेरी सबसे ज्यादा मदद एक ठाकुर ने ही की थी। उन्होंने इलाके के प्रभावशाली ठाकुर नेता जसवंत सिंह सेंगर का नाम लेते हुए बताया कि बेहमई कांड के जब वह गैंग के साथ जंगलों में दर-दर भटक रही थीं तब सेंगर साहब ने ही महीनों उन्हें शरण दी। खाने पीने से लेकर अन्य संसाधन भी उपलब्ध करवाए। इस जनसभा को हुए वर्षों बीत गए। लेकिन, आज भी फूलन और सेंगर की चर्चा चंबल में होती है।

जसवंत की काफी इज्जत करती थीं फूलन
जसवंत सिंह के बेट हेमरूद्र सिंह बताते हैं कि बेहमई कांड के वक्त उनके पिता स्थापित कांग्रेस नेता और चकरनगर के ब्लाक प्रमुख थे। ऐसे में फूलन देवी और उनके गैंग के सदस्यों ने जब पिताजी से मदद मांगी तो पिता जी ने इनकार नहीं किया। फूलन और उनके गैंग के सदस्यों को अपने खेतों में रुकने का बंदोबस्त कर दिया। फूलन भी जसवंत सिंह की काफी इज्जत करती थीं। जसवंत के कहने पर बतौर सांसद फूलन ने क्षेत्र में कई काम करवाए थे।

घोर गरीबी में जी रहीं मां मूला देवी
फूलन की भले ही अपने जमाने में तूती बोलती थी। लेकिन आज उनकी मां घोर गरीबी में जी रही हैं। चंबल में 2800 किलोमीटर की साइकिल यात्रा कर चुके शाह आलम बताते हैं कि जालौन जिले के महेवा ब्लाक अंतर्गत शेखपुर गुढ़ा गांव में फूलन की मां मूला देवी केवट इन दिनों बहुत कष्ट में हैं। घोर गरीबी में वे दुखों का पहाड़ ओढकऱ एक-एक दिन जीवन काट रही हैं। बीते 7 जून 2018 को फूलन की सबसे छोटी बेटी रामकली का अभाव की जिंदगी जीते हुए निधन हो गया। वही मूला का एकमात्र सहारा थी। ऐसे में अब मूला को मौत कब खाली पेट दस्तक दे दे कुछ कहा नहीं जा सकता।

फूलन की जमीन हड़प ली पड़ोसियों ने
फूलन की मां का एक बड़ा दर्द यह भी है कि उनके पास जीने का कोई सहारा नहीं बचा है। फूलन के चाचा मैय्यादीन ने खेती की जमीन हथिया ली थी। फूलन के मरने के बाद मैय्यादीन के बेटों का अब जमीन पर कब्जा है। इसलिए मूला देवी दाने-दाने को मोहताज हैं। अब फूलन का बनवाया घर भी गिर चुका है। खंडहर की यादें भर हैं।