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इटावा. समाजवादी गण इटावा से भारतीय जनता पार्टी ने मौजूदा सांसद अशोक दोहरे का टिकट काटकर डा. राम शंकर कठेरिया को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। रामशंकर कठेरिया के नाम पर इटावा ससंदीय सीट से उम्मीदवार के तौर पर मुहर लगवाने में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने बड़ी भूमिका अदा की है क्योंकि पात्रा के जरिए डा. राम शंकर कठेरिया इटावा संसदीय सीट से चुनाव लड़ने के लिए पिछले 1 वर्ष से प्रयासरत थे और आगरा से टिकट कटने के बाद उनके इटावा संसदीय सीट से टिकट मिलने की बात काफी हद तक पुष्ट मानी जा रही थी।
दोहरे का टिकट कटना दिलचस्प-
ऐसा कहा जा रहा है कि इटावा के मौजूदा सांसद अशोक दोहरे का रिपोर्ट कार्ड भारतीय जनता पार्टी हाईकमान ने अन्य टिकट काटने वाले सांसदों के तरह से पसंद नहीं किया और इसी वजह से अशोक दोहरे का टिकट काट दिया गया, लेकिन जिन परिस्थितियों में अशोक दोहरे का टिकट काटा गया है, वह बेहद ही दिलचस्प है। दलितों में दोहरे जाति से ताल्लुक रखने वाले अशोक दोहरे की जाति के इटावा संसदीय सीट पर व्यापक पैमाने पर मतदाताओं के होने की वजह से अशोक दोहरे को भरोसा इस बात का था कि उनका टिकट किसी भी सूरत में नहीं कटेगा, लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
कठेरिया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं-
डाक्टर राम शंकर कठेरिया इटावा के मूल निवासी हैं। इटावा जिले के भरथना थाना क्षेत्र के अंतर्गत सरावा गांव के रहने वाले डाक्टर रामशंकर कठेरिया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं। एक वक्त डाक्टर रामशंकर कठेरिया आर.एस.एस के प्रचारक रह चुके हैं और इसी वजह से डाक्टर कठेरिया को इस बात का भरोसा है कि वह मोदी के नाम और आरएसएस की भीतरी मुहिम में जीतने में सफल होंगे।
बताते चलें कि काफी समय से इटावा संसदीय सीट पर भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा सांसद अशोक दोहरे को लेकर तरह-तरह की बातें प्रचारित की जा रही थी। पिछले साल दलित आरक्षण और दलितों के उत्पीड़न के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के सांसद अशोक दोहरे के तल्ख बयानों के बाद ऐसा माना जाने लगा था कि अशोक दोहरे भारतीय जनता पार्टी से नाता तोड़ लेंगे, लेकिन अभी तक ऐसा होता हुआ नहीं दिखाई दिया है।
2014 के आम चुनाव के दरम्यान करीब 3 महीने पहले भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने वाले अशोक दोहरे इटावा संसदीय सीट से सांसद निर्वाचित हो गए थे। इससे पहले अशोक दोहरे बहुजन समाज पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता रहे। वे उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार में जल संसाधन मंत्री भी रह चुके हैं, लेकिन बसपा सुप्रीमो से अनबन के बाद उनको पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था, लेकिन 2014 के आम चुनाव से पहले अशोक दोहरे ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया और भारतीय जनता पार्टी ने इटावा सीट से अशोक दोहरे को अपना उम्मीदवार बनाया, जिस पर अशोक दोहरे पूरी तरीके से खरे उतरे और सांसद बन कर उन्होंने दिखा दिया कि भारतीय जनता पार्टी ने अशोक दोहरे के माध्यम से दूसरी बार इटावा सीट पर अपनी छाप छोडी। इससे पहले 1998 में भारतीय जनता पार्टी से सुखदा मिश्रा जीत हासिल कर चुकी हैं।
Published on:
26 Mar 2019 09:34 pm
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