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समाजवादी गढ़ में ‘कमल’ खिलाने की फिराक में जुटी भाजपा, बनाया ये बड़ा प्लान

समाजवादी गढ़ में 'कमल' खिलाने की फिराक में जुटी भाजपा, बनाया ये बड़ा प्लान  

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इटावा

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Ruchi Sharma

Jun 08, 2018

etawah

समाजवादी गढ़ में 'कमल' खिलाने की फिराक में जुटी भाजपा, बनाया ये बड़ा प्लान

दिनेश शाक्य

इटावा. गोरखपुर, फूलपुर के बाद नूरपुर और कैराना के उप चुनाव में करारी हार का स्वाद चख चुकी भारतीय जनता पार्टी अब समाजवादियों के सबसे प्रमुख केंद्र माने जाने वाले इटावा, मैनपुरी और कन्नौज संसदीय सीट पर 2019 के संसदीय चुनाव में कब्जे करने की तैयारी में जुट गई है।


भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. रमाकांत शर्मा का कहना है कि 2014 के संसदीय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी प्रदेश की 73 सीटों पर विजय पताका पहरा चुकी है। उस समय भी भाजपा ने इटावा मैनपुरी और कन्नौज में मजबूत लड़ाई लड़ी थी। जिसमें इटावा में कामयाबी भी मिली है, लेकिन कन्नौज और मैनपुरी में भाजपा कामयाबी के मुहाने तक नहीं पहुंच पाई इसलिए इस दफा बड़े ही मजूबती के साथ तीनों संसदीय सीटोें पर कब्जे के इरादे से रणनीतिक तौर पर जुटा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य के अलावा कई मंत्रियों के दौरे हो चुके है और कईयों के दौरे हो भी रहे है। रात्रि चौपालों को कार्यक्रम भी आयोजित किये जा रहे है जिनके साकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है ।

इस प्लान के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी कि चाहत समाजवादी गढ़ में ही पार्टी को घेरने की है ताकि दूसरे इलाके में पार्टी के बड़े नेता भ्रमण करने का अपना इरादा टाल दें और भाजपा की रणनीति कामयाब तो हो ही उनको कामयाबी भी मिल जाये।

भारतीय जनता पार्टी की इटावा विधायक सरिता भदौरिया बताती है कि धीरे धीरे भारतीय जनता पार्टी की ताकत इटावा और आसपास के इलाकों में बढ़ रही है यह निश्चित है भाजपा के लिए उत्साह की बात है लेकिन अभी लड़ाई पूरी नहीं है इसलिए भाजपा समाजवादी गढ़ में पूरी तरह से कमल को खिलाने की तैयारी में है । 2014 के संसदीय चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने इटावा और भर्थना विधानसभा सीटों पर कब्जा कर लिया है जब कि 2012 के विधानसभा चुनावों में इन दोनों सीटों पर सपा काबिज थी।


साल 2019 में होने वाले संसदीय चुनाव में भाजपा ने सपा के गढ़ में सेंध लगाने की तैयारी की है। इसके चलते सपा के लिए बेहद मजबूत माने जाने वाले इटावा, कन्नौज व मैनपुरी को निशाने पर लिया है । इन जिलों में भाजपा की पकड़ मजबूत बनाने और सपा को कमजोर करने का अभियान चलाया जाएगा। भाजपा आला कमान भी इस पर नजर रखेगा ।

ऐसा कार्यक्रम बनाया गया है कि भाजपा के बड़े नेता व मंत्री एक माह में कम से कम दो-दो बार इन जिलों का दौरा करेंगे। एक जून को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का इटावा दौरा और उसके बाद मैनपुरी का कार्यक्रम भाजपा के मिशन 2019 पर ठप्पा लगाते हैं।

इटावा, कन्नौज व मैनपुरी में सपा का गढ़ माना जाता है। इनमें से मैनपुरी व कन्नौज की लोकसभा सीटें भी समाजवादी पार्टी के पास हैं लेकिन 2014 मे इटावा सीट भाजपा ने सपा से छीन ली है । भारतीय जनता पार्टी ने 1998 मे समाजवादी गढ की इस सीट से श्रीमती सुखदा मिश्रा विजयी हुई थी । सुखदा मिश्रा 259980 वोट मिले थे। सपा के राम सिंह शाक्य को 228942 वोट मिले थे। इस प्रकारसुखदा मिश्रा 31038 विजई रही। उसके बाद से लगातार सपा का ही कब्ज़ा था लेकिन अब भाजपा काबिज हो गयी है । मोदी की देश व्यापी लहर मे समाजवादी गढ इटावा की संसदीय सीट भी मुलायम के कब्जे से बाहर चली गई । पहली बार चुनाव मैदान मे उतरे अशोक दोहरे कभी माया सरकार मे उत्तर प्रदेश के भूमि विकास मंत्री हुआ करते थे लेकिन मायावती ने उनको पार्टी से बर्खास्त कर दिया था संसदीय चुनाव की घोषणा से 6 महीने पहले अशोक दोहरे ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। समाजवादी गढ़ इटावा की सीट पर भाजपा के अशोक दोहरे को जीत मिली है,उन्होने समाजवादी पार्टी के प्रेमदास कठेरिया को 1 लाख 73 हजार 441 वोटों से पराजित किया है। अशोक दोहरे को इटावा संसदीय सीट पर 439762 वोट मिले है उनके मुकाबले प्रेमदास कठेरिया को मात्र 266321 वोट ही मिल पाये।

इसके बाद भी इटावा में सपा को ज्यादा मजबूत माना जाता है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का गृह जनपद है । इस नाते सपा हमेशा ही मजबूत रही है । आजादी के बाद से अब तक सिर्फ दो बार भाजपा लोकसभा का चुनाव जीत पाई है । पहली बार 1998 मे सुखदा मिश्रा भाजपा से लोकसभा चुनाव जीती थी और वर्तमान में अशोक दोहरे सांसद हैं। अब भाजपा इटावा में लोकसभा की सीट बनाए रखने के साथ मैनपुरी तथा कन्नौज में भी जीतने की जुगत भिड़ा रही है। इसके लिए पार्टी लोकसभा चुनाव के एक साल पहले से ही जी-तोड़ मेहनत में जुट गई है।

पार्टी के बड़े नेताओं के दौरे इन जिलों में लगवाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के आगमन के एक सप्ताह बाद ही नौ जून को केंद्र सरकार के सामाजिक अधिकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर इटावा आ रहे हैं । अगले कुछ दिनों में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के भी इटावा आने की संभावना है। गुरुवार को प्रदेश के पशुधन मंत्री एसपी सिंह बघेल भी इटावा में आ चुके है । भाजपा के जनप्रतिनिधि व नेता रात्रि चौपाल भी लगा रहे हैं ताकि सीधे जनता से जुड़ सकें।


इसी कडी मे पार्टी अपने पुराने नेताओं को भी एक बार फिर से तबज्जों देने लगी है। एक जून को जब मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी इटावा आए थे। तब पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्षों के साथ ही कुछ पुराने नेताओं से भी उनकी मुलाकात कराई गई थी । सिंचाई विभाग के डाक बंगले में यह मुलाकात करीब एक घंटे चली थी। इससे पुराने दिक्कज भी खुश हैं। पार्टी की जो कोर कमेटी बनाई गइ है उसमें भी पूर्व जिलाध्यक्ष को शामिल किया गया था। पार्टी की रणनीति नए व पुरानों को सक्रिय करके संगठन को मजबूत करने व चुनाव जीतने की है। कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए बड़े नेताओं व मंत्रियों के दौरे लगवाए जा रहे हैं।