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थम नहीं रही रोडवेज बसों में जहरखुरानी गैंग की करतूतें, यात्री को बनाया शिकार

परिचालक ने यात्री को अस्पताल में भर्ती कराया।  

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Bus traveller trapped

इटावा. उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में जहरखुरानी गैंग के सदस्यों की सक्रियता थमने का नाम नही ले रही है तभी तो आए दिन बस यात्री जहरखुरानी के शिकार होते हुए दिखाई दे रहे हैं।
गुरुवार सुबह सात बजे के आसपास इटावा के डा.भीमराव अंबेडकर संयुक्त चिकित्सालय में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की एक बस को लेकर पहुंचे बस परिचालक रामशंकर ने बताया कि वह दिल्ली से बस को लेकर के आ रहा है जहां शिकोहाबाद के पास उनको इस बात की जानकारी कुछ अन्य बस यात्रियों की तरफ से दी गई कि एक यात्री पीछे की तरफ बेसुध हालत में पड़ा हुआ है। उसको जगाने की कोशिश की गई लेकिन वह उठ नहीं सका उसके बाद पीडि़त बस यात्री को सीधे लेकर के वह अधिकारियों के निर्देश पर डा. भीमराव अंबेडकर संयुक्त चिकित्सालय के आपातकालीन विभाग में पहुंचा है।

सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है
जहां पर डाक्टर उसका उपचार करने में लगे हुए हैं। वह अपना नाम गौरव तो बता पा रहा है, लेकिन अभी इस यात्री को पूरी तरह से होश नहीं आया है। इसलिए इसके बारे में कोई शक सही और सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है लेकिन जिस ढंग की बातें बस परिचालक की तरफ से कही जा रही है उसको देख कर के यही कहा जा रहा है कि यह बस यात्री या तो दिल्ली या फिर बल्लभगढ़ से बस में सवार हुआ रहा होगा।

कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाती

वैसे पिछले दिनों इस तरह के मामले सामने आए हैं जिसमें रोडवेज विभाग की तरफ से जहरखुरानी की शिकार बस यात्रियों को अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल कराया गया। पुलिस अभी तक इस गैंग के सदस्यों तक नहीं पहुंच पाई है क्योंकि पुलिस की पकड़ से यह सदस्य इसलिए बाहर हो जाते हैं कि उनके बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाती।
इटावा के डा.भीमराव अंबेडकर राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के सीएमएस डा.एके पालीवाल बताते हैं कि जहर खुरानी करने वाले जिस नशीले पदार्थ का प्रयोग करते हैं उसकी तीव्रता बहुत ही अधिक होती है इसी कारण लोग 24 घंटे के आसपास बेसुध बने रहते हैं। इस साल अब तक जहरखुरानी के रोडवेज बस में करीब 6 के आस-पास मामले सामने आ चुके हैं। असल में जब कभी भी जहर खुरानी के शिकार हुए लोग अस्पताल आदि में भर्ती कराये जाते हैं, उसके बाद होने वाली पुलिस जांच प्रकिया से बचने के लिए पुलिस कार्यवाही के बजाय शांत होकर बैठना मुनासिब समझा जाता है।