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चंबल में डाकुओं के समर्पण की यादें जगन गुर्जर के बहाने हुईं ताजा, फूलन देवी के बाद चल पड़ा था सिलसिला

- चंबल घाटी का खुंखार दस्यु सरगना जगन गुर्जर - जगन गुर्जर ने राजस्थान के धौलपुर में किया आत्म समर्पण - सबसे बड़ा माना जाता है 1983 में फूलन देवी का आत्मसमर्पण

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Dacoit surrender in chambal unknown facts after Jagan Gurjar

चंबल में डाकुओं के समर्पण की यादें जगन गुर्जर के बहाने हुईं ताजा, फूलन देवी के बाद चल पड़ा था सिलसिला

एक्सक्लूसिव

दिनेश शाक्य

इटावा . चंबल घाटी के खुंखार दस्यु सरगना जगन गूर्जर के राजस्थान के धौलपुर में आत्म समर्पण करने के बाद 1983 में बहुचर्चित फूलन देवी के अलावा रामआसरे फक्कड़ और अरविंद रामवीर गुर्जर गैंग के समर्पण की यादें ताजा हो गई हैं। मध्य प्रदेश के भिंड में 1983 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समक्ष फूलनदेवी के समर्पण को अब तक का सबसे बहुचर्चित समर्पण माना जाता है। उसके बाद चंबल में डाकुओं के समर्पण का सिलसिला चल पड़ा। वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र शुक्ला बताते हैं कि भले ही आज जगन गुर्जर के समर्पण की चर्चा हो रही हो लेकिन असलियत में अब तक का सबसे बड़ा समर्पण 1983 में फूलन देवी का समर्पण माना जाएगा। जो तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के समक्ष हुआ है। शुक्ला बताते हैं कि समाज में भटके हुए लोगों को मुख्यधारा में लाने का काम आज से नहीं एक अर्से से होता आया है। समर्पण प्रकिया को सराहनीय पहल के तौर पर देखा जाना चाहिए।

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कुख्यात डकैत जगन गुर्जर ने किया समर्पण

राजस्थान के धौलपुर में आत्मसमर्पण करने वाले कुख्यात डकैत जगन गुर्जर के खिलाफ भी अपराधों की लंबी फेहरिस्त है। 12 जून को राजस्थान के धौलपुर जिले के बसई डांग इलाके के गांव सायपुर करनसिंह का पुरा में पहुंचकर एक परिवार को बंधक बना लिया था। इसके बाद डकैत गुर्जर और उसके साथियों ने महिलाओं और बच्चों से मारपीट की थी। इसके बाद महिलाओं को निर्वस्त्र कर हथियारों की नोक पर गांव में घुमाया था। इस घिनौने कृत्य के बाद डकैत जगन गुर्जर अपने साथियों के साथ स्कार्पियो गाड़ी में सवार होकर फरार हो गया था। डकैत जगन गुर्जर के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। उसके सिर पर पुलिस ने 40 हजार रुपये का ईनाम भी घोषित कर रखा था।

पहले भी तीन बार कर चुका आत्मसमर्पण

चौथी बार पुलिस के समक्ष समर्पण कर चुके जगन गुर्जर धौलपुर के डांग के भवुतीपुरा का रहने वाला है। 1994 में उसके जीजा की हत्या हो गई। जिसके बाद 1994 में उसने पत्नी और भाइयों के साथ मिलकर डकैत गैंग बनाया। चंबल में आतंक का पर्याय बने जगन गुर्जर पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के विभिन्न थानों में हत्या के प्रयास, लूट, फिरौती, अपहरण, नकबजनी, डकैती से जुड़े 100 से अधिक मामले दर्ज थे। उस पर 40 हजार का ईनाम भी घोषित किया गया था। उसने 9 साल पहले अपनी बेटी की शादी करते समय कसम खाई थी कि वह अब जुर्म की दुनिया छोड़ देगा । इससे पहले वह तीन बार आत्मसमर्पण भी कर चुका, लेकिन उसने हर बार वापस जुर्म की राह पकड़ ली।

इन डकैतों ने भी किया था आत्मसमर्पण

इससे पहले जगन ने साल 2001 में तत्कालीन धौलपुर एसपी बीजू जार्ज जोसफ के सामने, 30 जनवरी 2009 को कैमरी गांव के जगन्नाथ मेले में कांग्रेस नेता सचिन पायलट के सामने और 19 अगस्त 2018 को बयाना में तत्कालीन आईजी मालिनी अग्रवाल के समक्ष समर्पण किया था। जगन के समर्पण के बाद उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में सक्रिय रहे कुख्यात डाकू रहे रामआसरे उर्फ फक्कड़ गैंग के समर्पण की चर्चाएं भी शुरू हो गईं। 8 जून 2004 को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में आतंक का पर्याय रहे कुख्यात डकैत रामआसरे उर्फ फक्कड़ और उसकी सहयोगी डकैत सुंदरी कुसमा नाइन सहित पूरे गिरोह ने मध्यप्रदेश के भिंड जिले के दमोह पुलिस थाने की रावतपुरा चौकी पर समर्पण कर दिया। भिंड में समर्पण से पहले साल 2003 में रामआसरे ने ऐसी पहल इटावा में संवाददाता दिनेश शाक्य से हुई लंबी मुलाकात में की थी।

27 साल तक पुलिस की पकड़ से रहा दूर

आत्मसमर्पण से पहले 27 साल तक फक्कड़ बाबा गिरोह पुलिस की पकड़ में नहीं आया था। भिंड के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक साजिद फरीद शापू के समक्ष गिरोह के सभी सदस्यों ने बिना शर्त समर्पण किया। फक्कड़ बाबा पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक लाख और मध्य प्रदेश पुलिस ने 15 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। कुसमा नाइन पर उत्तर प्रदेश ने 20 हजार और मध्य प्रदेश ने 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था। गिरोह पर उत्तर प्रदेश में 200 से अधिक और मध्य प्रदेश में करीब 35 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

विदेशी हथियारों से लैस थे फक्कड़ बाबा

कानपुर निवासी फक्कड़ की सहयोगी कुसमा नाइन उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के सिरसाकलार की रहने वाली हैं। समर्पण करने वाले गिरोह के अन्य सदस्यों में मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का राम चंद वाजपेयी, इटावा के संतोष दुबे, कमलेश वाजपेयी, घूरे सिंह यादव और मनोज मिश्रा, कानपुर का कमलेश निषाद और जालौन का भगवान सिंह बघेल शामिल रहे। इस समर्पण के पीछे किसी ने मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाई। फक्कड़ बाबा और उसके गिरोह ने अपनी इच्छा से आत्मसमर्पण किया। फक्कड़ बाबा गिरोह ने कई विदेशी हथियार भी पुलिस को सौंपे। इनमें अमेरिका में निर्मित 306 बोर की तीन सेमी-ऑटोमेटिक स्प्रिंगफील्ड राइफलें, एक ऑटोमेटिक कारबाइन, बारह बोर की एक डबल बैरल राइफल और कुछ दूसरे हथियार शामिल हैं।

गिरोह के नौ सदस्यों के साथ समर्पण

रामआसरे कुसमा नाइन गैंग के समर्पण के बाद 17 फरवरी 2005 को मध्य प्रदेश के भिंड जिले के एक मंदिर में एके 47 से फायरिंग के बाद कुख्यात डकैत अरविन्द गुर्जर ने भी अपने गिरोह के नौ सदस्यों के साथ आत्मसमर्पण किया। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में आतंक का पर्याय बना कुख्यात डकैत अरविन्द गुर्जर ने भी अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मध्य प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रुस्तम सिंह के समक्ष आत्म समर्पण किया। समर्पण करने वाले नौ साथियों में गिरोह का सरगना अरविन्द गुर्जर, उसका भाई रामवीर उर्फ जेली गुर्जर, दीपू तोमर व सीपू तोमर (सगे भाई), लाल सिंह उर्फ पिलू जाटव, नीरज जाट, पऊआ उर्फ नीरज, अरविन्द की पत्नी शीला गुर्जर, रामवीर गुर्जर की पत्नी अनीता उर्फ बबली और दीपू तोमर की पत्नी गंगा जोशी शामिल रही।

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