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स्कूल का यह चपरासी बना चंबल का 8 लाख का इनामी, होली के दिन मचा दिया था आतंक

इस वक्त पूरे उत्तर प्रदेश में होली 2020 का उत्सव मनाया जा रहा है। पर इस होली को जो भी याद करता है आज भी उसके रोम-रोम में सिरहन दौड़ जाती है। इटावा में चंबल घाटी के खूंखार दस्यु सरगना ने करीब डेढ़ दशक पहले ऐसी खूनी होली खेली, जिसे आज भी गांव वाले भूल नहीं पाए हैं।

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कभी स्कूल में चपरासी रहा वो बना चंबल का 8 लाख का इनामी, इस होली की सुनकर सिहर उठती है चंबल

कभी स्कूल में चपरासी रहा वो बना चंबल का 8 लाख का इनामी, इस होली की सुनकर सिहर उठती है चंबल

इटावा. इस वक्त पूरे उत्तर प्रदेश में होली 2020 का उत्सव मनाया जा रहा है। पर इस होली को जो भी याद करता है आज भी उसके रोम-रोम में सिरहन दौड़ जाती है। इटावा में चंबल घाटी के खूंखार दस्यु सरगना जगजीवन परिहार ने करीब डेढ़ दशक पहले ऐसी खूनी होली खेली, जिसे आज भी गांव वाले भूल नहीं पाए हैं।

इटावा में बिठौली के चैरला गांव में 16 मार्च 2006 को हुई घटना ने हर किसी को झकझोर दिया था। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और वे होली के दिन अपने गांव सैफई मे होलिका समारोह मे शामिल होने के लिए आये थे। पुलिस के बड़े अफसर मुख्यमंत्री की वजह से आये थे, जैसे उनको इस खूनी होली की खबर लगी वैसे ही अधिकारियों ने घटनास्थल की ओर पीड़ित की मदद के लिए दौड़ लगा दी। चंबल के खूंखार डाकुओं में शुमार रहे जगजीवन परिहार के गांव चैरैला के आसपास के कई गांव में खासी दहशत और आंतक था। जगजीवन के अलावा उसके गिरोह के दूसरे डाकुओं का खात्मा होने के बाद आसपास के गांव के लोगों में भय समाप्त हो गया था।

मुखबिरी के शक :- 16 मार्च 2006 को होली की रात जगजीवन गिरोह के डकैतों ने आंतक मचाते हुए चैरैला गांव में अपनी ही जाति के जनवेद सिंह को जिंदा होली में जला दिया और उसे जलाने के बाद ललुपुरा गांव में चढ़ाई कर दी थी। करन सिंह को बातचीत के नाम पर गांव में बने तालाब के पास बुलाया और मौत के घाट उतार दिया था। इतने में भी डाकुओं को सुकुन नहीं मिला तो पुरारामप्रसाद में सो रहे दलित महेश को गोली मार कर मौत की नींद मे सुला दिया था। इन सभी को मुखबिरी के शक में डाकुओं ने मौत के घाट उतार दिया था।

चैरैला गांव के रघुपत सिंह बताते हैं कि होली वाली रात जगजीवन परिहार गैंग के हथियार बंद डाकुओं ने गांव में धावा बोला तो किसी को भी इस बात की उम्मीद नही थी कि डाकुओं का दल गांव मे खूनी वारदात करने के इरादे से आये हुए है क्योंकि अमूमन जगजीवन परिहार का गैंग गांव के आसपास आता रहता था लेकिन होली वाली रात जगजीवन परिहार गैंग ने सबसे पहले उनके घर पर गोलीबारी की। डाकुओं ने उनके घर पर बेहिसाब गोलियाॅ चलाई। डाकुओं का इरादा उनकी हत्या करना था लेकिन डाकू दल घर का दरवाजा नही तोड़ पाए इस वजह से बच गया। बेशक वो बच गया लेकिन उसके और दूसरे गांव के तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया तथा दो अन्य लोगों को गोली मार कर मरणासन्न कर दिया गया था। आज भी उस खूनी होली याद से मन सिहर उठता है।

गूंज पूरे देश मे सुनाई दी :- इस लोमहर्षक घटना की गूंज पूरे देश मे सुनाई दी। इससे पहले चंबल इलाके में होली पर कभी भी ऐसा खूनी खेल नहीं खेली गयी थी। इस कांड की वजह से सरकारी स्कूलों में पुलिस और पीएसी के जवानों को कैंप कराना पड़ा था। क्षेत्र के सरकारी स्कूल अब डाकुओं के आंतक से पूरी तरह से मुक्ति पा चुके है। इलाके में अब कई प्राथमिक स्कूल खुल चुके है। इसके साथ ही कई जूनियर हाईस्कूल भी खोले जा रहे है। जिनमें गांव के मासूम बच्चे पढ़ने के लिये आते है और पूरे समय रहकर करके शिक्षको से सीख लेते है।

खेत की रखवाली से डरते लोग :- ललूपुरा गांव के बृजेश कुमार बताते है कि जगजीवन के मारे जाने के बाद पूरी तरह से सुकुन महसूस हो रहा है। उस समय गांव में कोई रिश्तेदार नही आता था। लोग अपने घरों के बजाय दूसरे घरों में रात बैठ करके काटा करते थे। उस समय डाकुओं का इतना आंतक था कि लोगों नींद में उडा गई थी। पहले किसान खेत पर जाकर रखवाली करने में भी डरते थे। आज वे अपनी फसलों की भी रखवाली आसानी से करते है।

आंतक का खासा नाम बन गया :- कभी स्कूल में चपरासी रहा जगजीवन एक वक्त चंबल मे आंतक का खासा नाम बन गया था। चंबल घाटी के कुख्यात दस्यु सरगना के रूप मे आंतक मचाए रहे जगजीवन परिहार ने अपने ही गांव चैरैला गांव के अपने पडोसी उमाशंकर दुबे की छह मई 2002 को करीब 11 लोगों के साथ मिलकर घारदार हथियार से हत्या कर दी थी। डाकू उसका सिर और दोनों हाथ काट कर अपने साथ ले गये थे।

इटावा पुलिस ने इसी कांड के बाद जगजीवन को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए पांच हजार का इनाम घोषित किया था। जगजीवन परिहार चंबल घाटी का नामी डकैत बन गया था। एक समय जगजीवन परिहार के गिरोह पर उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान पुलिस ने करीब आठ लाख का इनाम घोषित किया था।

होली में जिंदा जलाया :- चैरैला कांड के रूप मे कुख्यात यह दर्दनाक ऐसा वाक्या जिसे आसानी से भुलाया नहीं जा सकता है। एक शख्स को होली में जिंदा जला कर दो अन्य को मौत के घाट उतार दिए जाने का यह वाक्या चैरेला गांव के लोगों के जहन मे आज भी घूमता दिख जाता है। 14 मार्च 2007 को सरगना जगजीवन परिहार और उसके गिरोह के 5 डाकुओं को मध्यप्रदेश के मुरैना एवं भिंड जिला पुलिस ने संयुक्त आपरेशन में मार गिराया। गढि़या गांव में लगभग 18 घंटे चली मुठभेड़ में एक पुलिस अफसर शहीद हुआ वही पांच पुलिसकर्मी घायल हुए।

करीब 8 लाख रुपए के इनामी डकैत :- मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में आतंक का पर्याय बन चुके करीब 8 लाख रुपए के इनामी डकैत जगजीवन परिहार गिरोह का मुठभेड़ में खात्मा हुआ। साथ ही पनाह देने वाला ग्रामीण हीरा सिंह परिहार भी मारा गया। जगजीवन परिहार और उसके गैंग के डाकुओं के मारे जाने के बाद चंबल मे अब पूरी तरह से शांत का माहौल बना हुआ है।