इटावा. जहां पूरे भारत देश में स्वच्छ भारत अभियान को बढ़ावा दिया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ सफाई कर्मचारियों को सरकार न तो घर चलाने के लायक पैसे दे पा रही है और न ही उनकी समस्याओं को सही ढंग से सुना जा रहा है। प्रदेश की योगी सरकार में सफाई कर्मचारियों का इस कदर हाल बेहाल हो चुका है कि वह अब मजबूर होकर धरना देने के लिए बाध्य है।
हड़ताल को मजबूर सफाई कर्मचारी
इटावा कचहरी परिसर में देखा गया हर विभाग और हर जगह के सफाई कर्मचारी विवश हो चुके हैं हड़ताल करने के लिए। सैकड़ों की तादात में कचहरी परिसर के वट वृक्ष के नीचे इकट्ठा हुए। जिन्होंने जमकर कचहरी परिसर में अपने हक के लिए नारेबाजी का प्रदर्शन किया। उनको इस बात से खासा नाराजगी है कि सरकार उनसे 365 दिन काम तो कराती है लेकिन उनको ना तो घर चलाने लायक पैसे देती है और न ही किसी विशेष परिस्थितियों में छुट्टी देती है।
छुट्टी लेने पर काट लिए जाते हैं पैसे
सफाई कर्मचारी के जिलाध्यक्ष विजय कुमार का कहना है कि अगर एक दिन की छुट्टी भी ले ली जाती है तो उसके भी पैसे हमसे काट लिए जाते हैं। न तो हमें सरकार पैसे दे पा रही है और न ही 1 दिन की छुट्टी। वहीं सफाई कर्मचारी महिला जिला अस्पताल ज्ञानदेवी कर्मचारी से बात की गई तो उनका भी यही रोना है कि हम महिलाओं की हर गंदगी को साफ तो करते हैं लेकिन हमको सरकार 5000 से 6000 महीना देती है। इसमें न तो घर खर्च चलता है और न ही बच्चों की पढ़ाई हो पाती है।