
इटावा. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष शिव महेश दुबे उत्तर प्रदेश में इटावा जिले के महेवा स्थित सहकारी संघ की करोड़ों रूपये की जमीन पर कथित तौर पर कब्जे को लेकर के विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए हैं।
असल में भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष शिव महेश दुबे के ऊपर इस तरीके का आरोप लग रहा है कि उन्होंने अपने पैतृक गांव महेवा में सहकारी संघ की एक ऐसी जमीन को खरीद लिया है जो 1948 में सहकारी संघ को दान की जा चुकी है।
दुबे ने दानकर्ता की तीसरी पीढ़ी के सदस्य इस जमीन को साल 2005 में अपने नाम बैनामे के तौर करा लिया लेकिन उस पर वह निर्माण नहीं कर सके क्योंकि संध ने इस पर आपत्ति उठा दी । दान करने वाले बुजुर्ग का नाम झब्बूलाल मिश्रा निवासी मुकुटपुर था लेकिन उसकी मौत के बाद दो पुत्रों रामनजर और माताप्रसाद के नाम यह जमीन सरकारी तौर पर इंद्राज कर दी गई । लेकिन रामनजर के मरने के बाद यह जमीन पत्नी मेवादेवी और पुत्र के दर्ज कर दी गई । इस जमीन को पहले राजेश सिंह पुत्र सोबरन सिंह को बेच दिया फिर इसको जुलाई 2005 मे राजीव चौधरी और मैने मिल कर खरीद ली।
इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष शिव महेश दुबे को आम जनता के साथ-साथ विपक्ष के नेताओं से भी दो-चार होना पड़ रहा है । समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष गोपाल यादव जहां भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष शिव महेश दुबे की इस करतूत को लेकर के सवाल उठाते हैं कि जब किसी ने जमीन को दान कर दिया तो फिर दान की गई जमीन को आखिरकार भाजपा के जिलाध्यक्ष ने कैसे खरीद लिया और खरीदने के बाद सत्ता के दबाव में संध की जमीन पर कब्जा करने की तैयारी में जुट गए हैं जिसके चलते उन्होंने संध की जमीन पर पड़े टीन सेट और दीवार को अपने समर्थकों की मदद से धरासाई करवा दिया है ।
उन्होंने पुलिस प्रशासन से भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष के पक्ष में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस जानबूझकर के इस मामले में दी जा रही शिकायतों को नजरअंदाज करने में जुटी हुई है । इस मामले मे संध के सचिव की ओर से दीवार को धरासाई करने के अलावा दीवार गिराये जाने के मामले मे बकेवर थाने मे अनजान लोगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का प्रार्थना पत्र 21 जून को दिया गया लेकिन थाना पुलिस ने इस मामले मे कोई कार्यवाही करना मुनासिब नही समझा ।
जमीन कब्जे के मामले के सुर्खियों में आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष शिव महेश दुबे ने आज जिला इकाई के तमाम पदाधिकारियों के साथ सिंचाई विभाग के सर्किट हाउस में पत्रकारों के समक्ष वार्ता में स्पष्ट तौर पर कहा कि उनका संध की जमीन को ले करके कोई लेना देना नहीं है । उनको बदनाम करने के लिए उनके विरोधी इस तरीके का दुष्प्रचार करने में जुटे हुए हैं । जिस जमीन को दान किए जाने की बात कही जा रही है असल में वह जमीन आधिकारिक तौर पर कहीं पर भी दान नहीं की गई थी । इसी बाबत सहकारी संघ अदालत में गया लेकिन अदालत में उसको कोई रिलीफ नहीं मिला क्योंकि अदालत ने दान किए जाने वाले मुद्दे को पूरी तरीके से खारिज कर दिया जब दान किए हुए मुद्दे को खारिज किया जा चुका है तो फिर ऐसे में दान की जाने वाली जमीन को लेकर के सवाल उठाना कहीं भी न्यायोचित नहीं लग रहा है । उन्होंने कहा कि जिस समय उन्होंने इस जमीन को खरीदा था तब साल 2005 में महेवा के ब्लाक प्रमुख थे लेकिन उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार होने के कारण उनको विभिन्न तरीके से प्रताड़ित किया गया । ब्लाक प्रमुख पद के उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार ना केवल सीज कर दिए गए बल्कि उनके खिलाफ कई अपराधिक मुकदमा भी दर्ज किए गए वह तो भला हो हाई कोर्ट का और सुप्रीम कोर्ट का जहां से उनको राहत मिली और वह अपना काम कर सकें लेकिन साल 2012 में जब अखिलेश यादव की अगुवाई में उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार फिर से काबिज हुई उस समय संध की जमीन पर सरकारी तौर पर निर्माण की प्रक्रिया अपनाई जाने की कोशिश शुरू की गई जिसकी जानकारी होने के बाद उन्होंने खुद ही इस जमीन को लेकर के अदालत से स्थगन आदेश लिया हुआ है लेकिन अब इतने दिनों बाद इस पुराने मुद्दे को उखाड़कर के उनके विरोधी आखिरकार क्या साबित करना चाहते हैं यह सवाल आज के समय में समझ से परे बना हुआ है फिर एक बात जरूर कही जा सकती है इस साल 2019 के संसदीय चुनाव में उनकी भूमिका प्रभावी ना रहे इसलिए उनके विरोधी उनको जमीन के मुद्दे पर बदनाम करने की कोशिश में लगे हुए हैं । उन्होंने पुलिस प्रशासन से दरकार कि है कि जमीन से जुड़े हुए इस मुद्दे की निष्पक्ष जांच करके कार्यवाही सुनिश्चित करें ताकि उनके ऊपर बदनामी का जो दाग लग रहा है वह घुल सके।