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जिस नामी कॉलेज से अखिलेश यादव ने की थी पढ़ाई, रद्द होगी उसकी मान्यता, इस बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

- इटावा के सेंटी मेरी कॉलेज से अखिलेश यादव ने हासिल की थी प्रारंभिक शिक्षा - कॉलेज की मान्यता खत्म करने के लिए जिला प्रशासन ने सीबीएससी बोर्ड से की सिफारिश - कॉलेज पर निशुल्क एंव अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के उल्लंघन का आरोप

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Sent Merry Inter College in etawah

जिस नामी कॉलेज से अखिलेश यादव ने की थी पढ़ाई, रद्द होगी उसकी मान्यता, इस बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

इटावा. उत्तर प्रदेश के इटावा मुख्यालय पर स्थापित प्रतिष्ठित सेंट मेरी इंटर कॉलेज की मान्यता खतरे में पड़ती हुई नजर आ रही है। असल में इटावा के मुख्य विकास अधिकारी ने इस कॉलेज की मान्यता खत्म करने की संस्तुति सीबीएससी बोर्ड से की है। क्योंकि कॉलेज निशुल्क एंव अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) का उल्लंघन कर अलाभित समूह एंव दुर्बल वर्ग के चयनित बच्चों को शिक्षा से वचिंत करने का दोषी पया गया है। मुख्य विकास अधिकारी इटावा ने सेंटी मेरी इंटर कॉलेज की मान्यता प्रत्याहरण करने की कार्रवाई के लिए चैयरमैन सीबीएसई को संस्तुति की है। इस कॉलेज में प्रारंभिक शिक्षा हासिल कर शीर्ष में पहुंचने वालों मे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी शामिल हैं।


कॉलेज की मान्यता रद्द करने की सिफारिश

इटावा के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अजय कुमार सिंह की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज में इस बात की जानकारी दी गई है कि सेंट मेरी संस्था गरीब बच्चों के प्रवेश की दिशा में नियमों के विपरीत कार्य कर रहा है। इस लिहाज से जांचोपरांत कॉलेज की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई सुनिश्चित की गई है। शिकायतकर्त्ता सुनील ने बताया कि उनके बच्चे के प्रवेश के लिए चयन के बाद बीएसए के निर्देश के क्रम मे पत्र लेकर वो सेंट मेरी के फादर के पास गये थे, लेकिन इस बात को पूरी तरह से नजरअंदाज कर बच्चे को प्रवेश नहीं दिया गया।


नियमावली के उल्लंघन का आरोप

मुख्य विकास अधिकारी राजा गणपति आर ने बताया कि सेंट मेरी कॉलेज में गरीब बच्चों के प्रवेश अधिकार नियमावली का उल्लंधन किया जा रहा है। इस संदर्भ में अल्पसंख्यक अधिकारी स्तर पर गहनता से जांच के बाद ही सीबीएसई बोर्ड दिल्ली को लेटर लिखा है कि सेंट मेरी इंटर कॉलेज इटावा का प्रबंध तंत्र गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे विद्यार्थियों का एडमिशन नहीं करता है। यह आरोप सिद्ध होने के बाद सीबीएसई दिल्ली को मान्यता खत्म करने के लिए लेटर लिखा है। इसके बाद सेंट मैरी इंटर कॉलेज के प्रबंध तंत्र में हड़कंप मचा हुआ है।

प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल

जिला प्रशासन की कार्यवाही के बाद सेंट मेरी के कालेज के प्रिंसिपल फादर जॉबी जोसेफ ने गरीबों को एडमिशन देने के मामले पर अपना पक्ष रखते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। बीएसए इटावा द्वारा बीपीएल कार्ड धारी छात्र के एडमिशन न दिये जाने पर सीडीओ इटावा द्वारा सीबीएसई बोर्ड को मान्यता रद्द करने के लिये शिक्षा विभाग व प्रशासन द्वारा की गई संस्तुति के जवाब में सेंट मेरी के प्रिंसिपल फादर जॉबी जोसेफ ने बताया कि वो इस मामले में यही कहना चाहते है कि उनकी सेंट मेरी संस्था एक माइनारिटी (अल्पसंख्यक समुदाय) की संस्था है, जो कि सर्वाेच्च न्यायालय के द्वारा दिये गए एक फैसले के तहत शिक्षा एक्ट (शिक्षा के मूल अधिकार) के अंतर्गत नहीं आती है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने माइनारिटी के तहत आने वाले संस्थानों को शिक्षा एक्ट के तहत आने वाले एडमिशन में विशेष छूट दी हुई है। उनका कहना है कि उनकी संस्था ऐसा कोई भी एडमिशन देने के लिये बाध्य नहीं है। उनकी संस्था में सभी वर्गों के छात्र छात्राओं को एडमिशन दिया जा रहा है।


नजूल की जमीन पर कब्जे का भी आरोप

इटावा मुख्यालय पर सीबीएसई बोर्ड से 1967 से संचालित सेंट मेरी इंटर कॉलेज मे कम से कम 1900 के आसपास छात्र अध्ययनरत है। इस कॉलेज में प्रारंभिक शिक्षा हासिल कर शीर्ष में पहुंचने वालों मे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी शामिल हैं। इस कॉलेज के साथ इस बात का भी विवाद जुड़ा हुआ बताया जाता है कि उसके प्रबंधन ने नजूल जमीन पर कब्जा करके कॉलेज के एक बडे हिस्से का निर्माण करा रखा है। जिसको ध्वस्त कराने के आदेश भी दिये जा चुके हैं, लेकिन उस आदेश का अभी तक क्रियांवयन नहीं हो सका है।