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2019 के संसदीय चुनाव से पहले एनडीए का हिस्सा बन सकते है शिवपाल सिंह यादव !

शिवपाल सिंह यादव 2019 के संसदीय चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतात्रिंक गठबंधन एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं।

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2019 के संसदीय चुनाव से पहले एनडीए का हिस्सा बन सकते है शिवपाल सिंह यादव !

दिनेश शाक्य

इटावा. समाजवादी पार्टी से हटकर समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा का गठन करने वाले शिवपाल सिंह यादव 2019 के संसदीय चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतात्रिंक गठबंधन एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं। ऐसी खबरे सामने आ रहीं हैं जिनमें कहा जा रहा है शिवपाल सिंह यादव ने अपने और अपने समर्थकों के लिए समाजवादी पार्टी के प्रभावशाली गढ़ में एक दर्जन के आसपास सीटों की मांग भाजपाई हाईकमान से रखी है जिनमें से 8 या नौ पर अंतिम समय तक पूरी तरह से मोहर लगने की संभावानए हैं।


शिवपाल सिंह यादव के एनडीए में शामिल होने की वार्ता भाजपाई हाईकमान से लगातार चल रही है। कई चक्र में हो चुकी वार्ता के बीच इस तरह की संभावनाए जताई जा रही है कि संसदीय चुनाव से पहले शिवपाल सिंह यादव के एनडीए में शामिल हो जायेंगे। असल में शिवपाल सिंह यादव के समाजवादी पार्टी से अलग होकर समाजवादी सेक्युलर मोर्चा का गठन करने के पीछे यही रणनीति है। बसपा सपा के संभावित गठबंधन का मिजाज बिगाड़ने के लिए भारतीय जनता पार्टी की रणनीति के तहत ही शिवपाल सिंह यादव को ससंदीय चुनाव से पहले एनडीए का हिस्सा बनाने की तैयारी की जा रही है।

इस सीट से उतर सकते हैं मैदान में

भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी सेकुलर मोर्चा के सूत्रों का दावा है कि शिवपाल सिंह यादव खुद उत्तर प्रदेश की फिरोजाबाद लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे। जहां से उनको जिताने के लिए भारतीय जनता पार्टी अपना कोई अधिकृत उम्मीदवार नहीं उतारेगी। फिरोजाबाद संसदीय सीट से फिलहाल समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव सांसद है। अक्षय यादव से शिवपाल सिंह यादव का रिश्ता चचेरे भतीजे का है। फिरोजाबाद सीट को शिवपाल सिंह यादव के लिए अधिक मुफीद इसलिए और भी माना जा रहा है कि वहां के पूर्व विधायक अजीम भाई, पूर्व विधायक रामवीर सिंह यादव और विधायक हरीओम यादव से शिवपाल सिंह यादव से रिश्ते बेहतर बताये जाते हैं जब कि प्रोफेसर रामगोपाल यादव से उनके रिश्ते पहले जैसे नही रहे है।


कभी फिरोजाबाद सीट से डिपंल यादव की करारी पराजय भी हो चुकी है लेकिन अक्षय यादव के रूप मे इस सीट पर समाजवादी पार्टी कब्जा करने मे तब कामयाब हुई जब 2014 की मोदी लहर मे भारतीय जनता पार्टी पूर्व बहुमत मे काबिज हुई। समाजवादी सेकुलर मोर्च से जुड़े हुए अधिकाधिक नेता भी इस बात को पूरी तरह से जानते हैं कि शिवपाल सिंह यादव की पहले रामगोपाल यादव से अनबन थी लेकिन बाद में उनसे उनके रिश्ते बेहतर बेशक हो गये हैं फिर भी मोर्चा कार्यकर्त्ताओं का मानना है कि फिरोजाबाद सीट से बेहतर कोई दूसरी सीट शिवपाल सिंह यादव के लिए समीकरणीय तौर पर मुफीद नही है। इसलिए शिवपाल सिंह यादव फिरोजाबाद सीट से चुनाव लडने के मूड में नजर आ रहे हैं।

अखिलेश ने नहीं ठीक हैं रिश्ते

शिवपाल सिंह यादव के अपने भतीजे अखिलेश यादव के रिश्ते इतने खराब हो चुके हैं कि अब वो अपना दर्द इस तरह से बयान करने लगे है । वे कहते है कि परिवार के विवाद के ही कारण महाभारत का युद्ध हुआ था। पाडंवों ने कौरवों से सिर्फ पांच ही गांव मांगे थे लेकिन अहंकारी कौरवों ने उन्हें नहीं दिये थे अंत मे कौरवों को परास्त ही होना पड़ा था। यादव का कहना है कि बुजुर्गाें का संम्मान बहुत जरूरी है। इसलिये प्रत्येक कार्यकर्ता बुजुर्गाें का सम्मान करें। यादव कहते कि रावण बहुत ज्ञानी था लेकिन उसका अहंकार ही पतन का कारण बना था। इसी तरह कंस ने भी अपने पिता, बहन बहनोई आदि को जेल में डाल दिया था जिसके कारण ही भगवान श्रीकृष्ण ने उसका पतन करके धर्म की स्थापना की थी।

मुलायम से पूछ कर किया मोर्चे का गठन

शिवपाल कहते है कि मुलायम सिंह यादव से पूछकर समाजवादी सेकुलर मोर्चे का गठन किया है। नेताजी ही उनके लिए सबकुछ हैं। शिवपाल के इस बयान के राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं।शिवपाल का कहना है कि 2019 में सेक्युलर मोर्चा के बिना कोई सरकार नहीं बनेगी। इतना ही नहीं 2022 में उत्तर प्रदेश में सेक्युलर मोर्चा की सरकार होगी। शिवपाल ने अपना राजनीतिक सफर अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव की उंगली पकड़कर आगे बढ़े हैं। उन्होंने पहला चुनाव जिला सहकारी बैंक का लड़ा । 1993 में जिला सहकारी बैंक, इटावा के अध्यक्ष चुने गए। 1995 से लेकर 1996 तक इटावा के जिला पंचायत अध्यक्ष भी रहे । इसी बीच 1994 से 1998 के अंतराल में उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के भी अध्यक्ष का दायित्व संभाला । इसके बाद जसवन्तनगर से विधानसभा का चुनाव लड़े और ऐतिहासिक मतों से जीते । इसके बाद मुलायम सरकार से लेकर अखिलेश सरकार में मंत्री रहे । 2007 से 2012 तक विपक्ष के नेता का पद भी संभाला ।


अखिलेश और शिवपाल के बीच रिश्तों में खटास 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई । इसके बाद अखिलेश ने अपने चाचा शिवपाल को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया था । इसके बाद चाचा-भतीजे के बीच संबंध इस कदर खराब हुए कि उन्होंने सपा से अलग समाजवादी सेकुलर मोर्चा बनाने का फैसला किया । जिसकी चर्चाएं बड़े पैमाने पर इन दिनों सुनाई दे रही हैं।