देश के इटावा की गलियो मे आज से पचास साल पहले घूमने फिरने वाला एक लड़का आज देश का नामी कलाकार बन गया है। यह लड़का कोई ओर नही बल्कि सुरेंद्र पाल है, सुरेंद्र अपने डिप्टी एसपी पिता के साथ इटावा मे रह कर स्कूली शिक्षा हासिल करने के बाद यहॉ से चले गये लेकिन उनके जहन से इटावा की मिटटी का प्रेम कभी भी दूर नही हो सका है।
उत्तर प्रदेश के इटावा की गलियो मे आज से पचास साल पहले घूमने फिरने वाला एक लड़का आज देश का नामी कलाकार बन गया है। यह लड़का कोई ओर नही बल्कि सुरेंद्र पाल है, सुरेंद्र अपने डिप्टी एसपी पिता के साथ इटावा मे रह कर स्कूली शिक्षा हासिल करने के बाद यहॉ से चले गये लेकिन उनके जहन से इटावा की मिटटी का प्रेम कभी भी दूर नही हो सका है। जब कभी भी सुरेंद्र को मौका मिलता है, तो वो इटावा आना नही भूलते है।
बचपन की यादें ताजा करने आए शहर
इसलिए एक जमाने के सबसे लोकप्रिय महाभारत सीरियल में द्रोण की भूमिका अदा कर चर्चित हुए नामी कलाकार सुरेंद्र पाल अपने बचपन की यादों को ताज़ा करने के लिए रात के अंधेरे में इटावा आये । बिना किसी पूर्व सूचना के सुरेंद्र सबसे पहले इटावा मे डीएम चौराहे के पास एक पुराने आशियाने के बाहर पहुंचे जहॉ पर कभी वो किराये के मकान मे अपने पिता के साथ रहा करते थे उसके बाद उन्होने इटावा क्लब को देखा और निहारा। इसके बाद जी.आई.सी इंटर कालेज के मुख्य गेट पर पहुंचे । जहां पर सुरेंद्र ने गेट के बाहर खडे होकर कईयो फोटो खिचावाये और स्कूली दिनो की यादों को ताजा कर भावुक हुए। इसके बाद के.के.डिग्री कालेज पहुंचे। सुरेंद्र ने अपने साथ आये आगरा के लोगो को इटावा से जुडी हुई अपनी यादो को साझा करते हुए बताया कि यही वो जीआईसी स्कूल है जहां पर उन्होंने न केवल स्कूली शिक्षा पाई बल्कि चाट के ठेले पर घूल भरी चाट भी खाई है।
शिवपाल सिंह यादव से की मुलाकात
इटावा में सुरेंद्र पाल ने प्रगतिशील सपा लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव से भी मुलाकात की। मुलाकात के दरम्यान सुरेंद्र पाल और शिवपाल के बीच पुराने दिनो की कईयो महत्वपूर्ण बातो की चर्चा भी हुई। उन्होने बताया कि शिवपाल सिंह यादव उस समय वो सो गये थे लेकिन जब उनको बताया गया कि सुरेंद्र पाल आये हुए है वो उठ कर मिलने के लिए ना केवल आये बल्कि उन्होने काफी समय भी दिया। वो तो रात को चाहते थे कि मै इटावा मे ही रूक जाऊ लेकिन मेरी फलाइट थी इसलिए मैं रात को ही वापस लौट आया।
सुरेंद्र पाल इटावा में अपने उस घर के बाहर भी पहुंचे जहां वह 1970 से पहले रहा करते थे। इस बडे आशियाने का उस समय किराये मात्र 15 या 20 रूपये हुआ करता था । इस आशियाने की आज भी शक्ल ठीक वैसी ही बनी हुई है जैसी उस समय हुआ करती थी। आज इस आशियाने के एक हिस्से मे पूर्व विधायक रविंद्र सिंह चौहान और एक हिस्से मे पूर्व मंत्री सुखदा मिश्रा रहती हैं।
स्कूल के दिनों को किया याद
इटावा के राजकीय इंटर कालेज, के.के.डिग्री कालेज ओर इटावा क्लब को देख कर भावुक भी हुए। रात के अंधेरे में उनकी इस भ्रमण यात्रा का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें वह जीआईसी स्कूल के गेट के बाहर खड़े होकर के यह बताते हुए दिखाई दे रहे हैं कि यही वह स्कूल का गेट है जहां उन्होंने इंटर की पढाई की है। इसी स्कूल के गेट के बाहर एक चाट बेचने वाला भी अपना ठेला लगाया करता था जो धूल भरी चाट खिलाया करता था।
सुरेंद्र पाल के बारे में एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी यह भी है कि वर्ष 1965 से 1970 तक इटावा शहर में रहे हैं और उनकी प्रारंभिक शिक्षा यहीं पर हुई है। 47 साल बाद भी इटावा की यादें उनके जहन में आज भी हूबहू बरकरार बनी हुई हैं। सुरेंद्र पाल बताते है कि उनके पिता दशरथ सिंह पुलिस में डिप्टी एसपी थे। 1962 से लेकर 1964 तक वे इटावा में तैनात थे लेकिन उनका तबादला हो जाने के बाद भी वे प्रारंभिक शिक्षा के लिए 1970 तक यहीं रहे। पहले राजकीय इंटर कालेज फिर के.के.डिग्री कालेज में पढ़ाई की। अपनी पुरानी यादें ताजा करने के लिए वे इटावा में आए थे। रात में ही तीनों स्थानों पर कुछ देर रुके और उस जगह को निहारा जहां से उन्होंने अपने जीवन की उड़ान भरी थी ।