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पूर्णमासी की रात काटा जाता है दूल्हे का सिर, फिर शुरू होती है हिंदुओं की ये बड़ी रस्म

शहर हो या देहात हर गली-मोहल्ले में इन दिनों अनोखे प्रेम विवाह की चर्चा है...

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tesu and Jhenjhi

पूर्णमासी की रात काटा जाता है दूल्हे का सिर, फिर शुरू होती है शादी-ब्याह की रस्म

दिनेश शाक्य
इटावा. शहर हो या देहात हर गली-मोहल्ले में इन दिनों अनोखे प्रेम विवाह की चर्चा है। आज पूर्णमासी की रात पिछले एक पखवाड़े से गूंज रही सुमधुर आवाज-अड़ता रहा टेसू, नाचती रही झेंझी, 'टेसू गया टेसन से पानी पिया बेसन से...', 'नाच मेरी झिंझरिया... अब साल भर के लिए थम जाएगी। अनोखे प्रेम विवाह के लिए वर और कन्या पक्ष ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आधी रात को जब चांद पूरे सबाब पर होगा तब टेसू और झेंझी का विवाह होगा। और इसी के बाद शुरू हो जाएगी शादी-ब्याह की इस साल की रस्म। टेसू और झेंझी के विवाह के तार इटावा से बहुत गहरे जुड़े हैं।

इटावा में आज भी टेसू-झेंझी (झिंझिया) का विवाह बच्चे व युवा पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। हाथों में पुतला और तेल का दीपक लिए युवाओं की टीम घर-घर से पैसे मांगती है। चंदे के पैसे से टेसू-झेंझी काविवाह किया जाता है। टेसू-झेंझी का खेल नवमी से पूर्णमासी तक बच्चे खेलते हैं। 16 दिन तक बालिकाएं गोबर से चांद-तरैयां व सांझी माता बनाकर खेलती हैं। नवमी को सुअटा की प्रतिमा बनती है। पूर्णमासी की रात को टेसू-झेंझी का विवाह होता है। विवाह की तैयारी दशहरे से चौदस तक चलती है। पूर्णमासी को लडक़े थाली-चम्मच बजाकर टेसू की बारात निकालते हैं। वहीं लड़कियां शरमाती-सकुचाती झिंझिया रानी को भी विवाह मंडप में ले आती हैं। सात फेरे पूरे भी नहीं हो पाते और लड़के टेसू का सिर धड़ से अलग कर देते हैं। वहीं झेंझी भी अंत में पति वियोग में सती हो जाती है।

यह है कहानी
टेसू-झेंझी की कहानी महाभारत काल से जुड़ी है। इटावा के पास तहसील चकरनगर है। यह कभी चक्रनगरी कहलाती थी। यहीं पांडवों ने अपना अज्ञातवास बिताया था। यहीं भीम की शादी हिडिम्बा राक्षसी से हुई थी। और भीम को घटोत्कच पुत्र पैदा हुआ था। राजा टेसू या बब्रुवाहन घटोत्कक्ष का पुत्र था। जनश्रुति है कि महाभारत में श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से टेसू का वध किया था। जब भीम को पता चला कि टेसू मेरा नाती है, तब श्रीकृष्ण ने टेसू को जीवित कर दिया था। और वरदान दिया कि तुम्हारी शादी के बाद ही औरों की शादियॉ होंगी। तब से पूर्णमासी को टिसुआरी पूनो कहते हैं। इसी तिथि के बाद शादी-विवाह के शुभ कार्य प्रारंभ होते हैं।

मेले से खरीदते हैं टेसू और झेंझी
इटावा समेत कई इलाकों में दशहरे के मेले से बच्चे झेंझी और टेसू के नाम की मटकी खरीदते हैं। कुम्भकार झेंझी लडक़ी और टेसू लडक़ा बनाते हैं। मटकी पर झेंझी को सलोनी सी लडक़ी के रूप में और टेसू को मछधारी युवक के रूप में रंगा जाता है। रमायन गांव के एक कुम्हार ने बताया कि पिछले साल टेसू की कीमत 40 रुपए थी। इस साल यह 50 रुपए में बिक रहा है जबकि, झेजी 60 रुपए में।

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