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अनोखी शादी : बिहार की दुल्हन, यूपी का दूल्हा… महज 5 मिनट में हुआ विवाह!

इटावा में एक अजीबोगरीब शादी संपन्न हुई। यहां शादी सिर्फ 5 मिनट में हो गई। लड़का इटावा का रहने वाला है। वहीं लड़की बिहार की रहने वाली है। बताय़ा जा रहा है दोनों की मुलाकात दिल्ली में एक निजी कंपनी में काम करने के दौरान हुई।

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Symbolic Image, PC- Patrika Lib.

उत्तर प्रदेश के इटावा में एक बेहद अनोखी शादी हुई, जो अब चर्चा का विषय बन गई है। महज 5 मिनट में प्रेमी युगल ने एक-दूसरे को माला पहनाकर विवाह बंधन में बंधने का निर्णय लिया। इस शादी में न तो कोई भव्य आयोजन हुआ, न ही फेरे हुए, बस सच्चे प्रेम और आपसी सहमति के आधार पर भगवान को साक्षी मानते हुए दोनों ने एक-दूसरे से जीवन भर साथ रहने का वचन लिया।

यह प्रेम कहानी दिल्ली की एक निजी कंपनी से जुड़ी हुई है, जहां एक युवक और युवती ने मिलकर अपने दिलों की बात की और प्यार में पड़ गए। युवक का नाम भोले शंकर है, जो 23 साल का है और इटावा के मढ़ैया दिलीप नगर का निवासी है। वहीं, युवती पन्ना कुमारी बिहार की रहने वाली 22 वर्षीय हैं। दोनों के बीच प्रेम कहानी लगभग 10 महीने पुरानी है।

परिवार की ओर से शादी के लिए मना किए जाने के बावजूद, पन्ना ने साहसिक कदम उठाते हुए अपना घर छोड़ दिया और दो दिन पहले इटावा आकर अपने प्रेमी के पास पहुंच गई। इसके बाद, दोनों प्रेमी-प्रेमिका इटावा की कचहरी स्थित मंदिर पहुंचे, जहां रजिस्टर्ड मैरिज की प्रक्रिया शुरू की गई। लेकिन, इस दौरान पन्ना के परिवार के लोग वहां पहुंच गए और विवाह को रोकने की कोशिश की।

हालात को देखते हुए, अधिवक्ता अमित त्रिपाठी ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत कर माहौल को शांत किया। अंततः दोनों परिवारों की मौजूदगी में मंदिर परिसर में एक सादा और सरल विवाह संपन्न हुआ। भगवान को साक्षी मानकर दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई और जीवनभर साथ रहने का संकल्प लिया।

विवाह के बाद मंदिर परिसर में भीड़ जुट गई और यह मामला मीडिया तक पहुंच गया। अधिवक्ता अमित त्रिपाठी ने बताया कि यह विवाह दोनों की आपसी सहमति से हुआ है और भविष्य में इसकी विधिक प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।

युवक भोले शंकर ने कहा, "हम दोनों एक-दूसरे से सच्चा प्रेम करते हैं और परिवार के विरोध के बावजूद हमने शादी का फैसला लिया है। आज हम बेहद खुश हैं।"

युवती के परिवार वाले थे शादी के खिलाफ

पन्ना कुमारी ने कहा, "मेरे परिवारवाले शादी के खिलाफ थे, लेकिन मैंने अपने दिल की सुनी और भोले के पास आ गई। आज हम दोनों एक हैं और यही हमारी सबसे बड़ी खुशी है। यह प्रेम कहानी समाज के लिए एक सशक्त संदेश है कि सच्चा प्रेम न रस्मों का मोहताज होता है, न रीति-रिवाजों का। जब दो दिल एक होते हैं, तो ईश्वर ही सबसे बड़ा साक्षी होता है।"