
ये हैं मौत के 209 स्कूल, जहां बच्चों को बैठाकर पढ़ाने में कांपती है शिक्षकों की रूह
दिनेश शाक्य
इटावा. उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में वर्षों से बने प्राथमिक विद्यालयों के भवन अब जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। बच्चों को मजबूरी में खुले असमान के नीचे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। स्कूल प्रबंधन कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों से लिखित और मौखिक रूप से शिकायत भी कर चुका है, लेकिन हर बार बजट न होने के चलते स्कूल के भवनों की मरम्मत का कार्य नहीं कराया जा रहा।
सर्वे में हैरान करने वाला खुलासा
इटावा जिले में कुल 209 स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे नौनिहालों के साथ कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसका अंदेशा शिक्षा विभाग को भी है। इसी वजह से शिक्षा विभाग ने जर्जर स्कूलों का सर्वे कराया, जिसमें यह हकीकत सामने आई। सर्वे में 32 विद्यालय अल्प जर्जर की श्रेणी में भी शामिल किये गये हैं। आपको बता दें कि इटावा जिले में 1238 प्राथमिक और 537 जूनियर विद्यालय हैं। इनमें से बेहद जर्जर, अल्प जर्जर को मिलाकर इनकी संख्या 209 है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या 48 ब्लाक महेवा में है। इनमें 43 प्राथमिक व पांच जूनियर स्कूल हैं। बढ़पुरा ब्लाक में 37 में से 31 प्राथमिक एवं 6 जूनियर, बसरेहर ब्लॉक में 27 में से 25 प्राथमिक और 2 जूनियर, जसवंतनगर ब्लाक के 25 में से 21 प्राथमिक व 6 जूनियर, चकरनगर ब्लाक में 30 में से 17 प्राथमिक व 6 जूनियर, भरथना ब्लाक में 21 में से 18 प्राथमिक व 3 जूनियर, सैफई ब्लाक में 9 में से 8 प्राथमिक व एक जूनियर स्कूल है। नगर क्षेत्र में 6 में से 3 प्राथमिक एवं 3 जूनियर हाईस्कूल शामिल हैं।
ये हैं जर्जर विद्यालय
इटावा शहर के जर्जर विद्यालयों में नौरंगाबाद, पंसारीटोला और पुलिस लाइन के प्राथमिक विद्यालय भी हैं। जर्जर विद्यालयों की सूची में छिपैटी, पक्का तालाब व कटरा शमशेर खां के जूनियर हाई स्कूल भी शामिल हैं। पक्का तालाब स्थित जूनियर हाई स्कूल की प्रधानाध्यापक राहत जहां ने भी मांग की है कि उनके स्कूल का लिंटर गिरवा दिया जाए उसकी जगह टीनसेट को डलवा दिया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
स्कूल भवन इतने जर्जर हो चुके हैं कि उसके अंदर बच्चों को पढ़ाने में शिक्षकों की रूह कांप रही है। मजबूरी में अध्यापक सर्दी के मौसम में भी खुले असमान के नीचे नौनिहालों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं। प्राथमिक विधालय की प्रधानाध्यापिका रेखा भदौरिया ने बताया कि उनके स्कूल का भवन इतनी जर्जर स्थिति में पहुंच गया है कि विद्यालय के कमरों के अंदर बैठकर बच्चों को पढ़ाने में डर लगता है। मजबूरी में बच्चों को खुले असमान के नीचे बैठकर पढ़ाना पड़ता है। भवनों के मरम्मत कार्य के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित में शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। विद्यालय में पढ़ा रही अध्यापिका भावना सोलंकी ने बताया कि भवन जर्जर होने के कारण बच्चों को खुले में बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। अगर भवन के अंदर बैठकर बच्चों को पढ़ाया जाए और कोई हादसा हो जाये तो विभागीय अधिकारी हादसे के लिए उन्हें ही जिम्मेदार ठहरा देंगे, इसलिए मजबूरी में बच्चों को असमान के नीचे बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है।
नहीं मिला बजट
वहीं इस मामले में इटावा के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि कि साल 2011 से नए विद्यालयों के भवन के लिए धनराशि नहीं मिल सकी है। जर्जर भवनों के स्थानों पर नए भवन बनाए जाएंगे। शासन के आदेश अनुसार इसके लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा है। राशि आते ही निर्माण शुरू हो जाएगा। बच्चों के खेलने के लिए भी मैदान बनाए जाएंगे।
Published on:
30 Jan 2019 04:54 pm
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