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Mother’s Day: चंबल में डाकू बनी महिलाओं के लिए मां बनना रहा चुनौतीपूर्ण, बच्चों के लिए छोड़ दिया बीहड़

- आज किसी का बेटा पुलिस अफसर है तो कोई बेहतर कल के लिए पढ़ाई-लिखाई में जुटा है।

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Mother's Day

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दिनेश शाक्य.

इटावा। चंबल के बीहड़ों में डाकू बनी महिलाओं के लिए मातृत्व सुख हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। पल-पल मौत के खतरे के बीच कई महिलाएं मां बनीं। इनमें से कई ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने व अपने बच्चों के लिए बेहतर जीवन चुना। आज किसी का बेटा पुलिस अफसर है तो कोई बेहतर कल के लिए पढ़ाई-लिखाई में जुटा है। लेकिन वह अपने संघर्ष भरे कल को भूल नहीं पाई हैं। बीहड़ों में आवागमन के साधनों के अभाव में पैदल ही दौड़ धूप करने से लेकर पुलिस की सख्ती के चलते बार-बार स्थान परिवर्तन इन गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ही कष्टदायक रहा है। हाथों में बदूंक थामने के लिए वैसे तो हिम्मत व साहस की जरूरत है, लेकिन जब कोई महिला बंदूक थामकर बीहड़ो में कूदती है तो उसकी चर्चा जोर शोर से होती है। चंबल के बीहड़ों में सैकड़ों की तादाद में महिला डाकुओं ने अपने आंतक का परचम लहराया है। हालांकि इनमें से कई पुलिस की गोली खाकर मौत के मुंह मे समा चुकी हैं, तो कुछ गिरफ्तार कर ली गईं। वहीं कुछ महिला डकैतों ने सरेंडर करने का रास्ता अपनाया। इनमें से ऐसी ही कुछ महिला डकैत आज भी समाज में खुद को साबित करने में लगी हुई हैं। साथ ही ये महिला डकैत अपने बच्चों को भी समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने की जद्दोजहद कर रही हैं।

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बेटे का बेहतर भविष्य जरूरी-
- चंबल के बीहडों में रहते हुए सबसे पहले महिला डकैत सीमा परिहार ने अपने बच्चे को जन्म दिया। एक समय था जब चंबल में सीमा के नाम की तूती बोलती थी। सीमा बीहड़ में आने से पहले अपने माता-पिता के साथ चैन भरी जिंदगी गुजार रही थी। दस्यु सरगना लालाराम सीमा परिहार को उठा कर बीहड़ में ले आया था। बाद में लालाराम ने गिरोह के एक सदस्य निर्भय गुर्जर से सीमा की शादी करवा दी, लेकिन दोनों जल्दी ही अलग हो गए। सीमा परिहार चंबल में गुजारे अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि निर्भय गुर्जर से अलग होने के बाद मैं लालाराम के साथ रहने लगी। लालाराम से मुझे एक बेटा है। मैंने अपने बेटे का नाम सागर रखा है। बेहतर भविष्य के लिए उसका पूरा ध्यान पढ़ाई-लिखाई में है। 18 मई, 2000 को पुलिस मुठभेड में लालाराम के मारे जाने के बाद 30 नवंबर, 2000 को सीमा परिहार ने आत्मसमर्पण कर दिया था। फिलहाल, सीमा परिहार औरैया की राजनीति में सक्रिय है। फूलनदेवी के चुनाव क्षेत्र मिर्जापुर से लोकसभा चुनाव लड़ चुकी सीमा परिहार टीवी शो बिग बाॅस में भाग भी ले चुकी हैं। सीमा परिहार कहती हैं कि आज की तारीख में मेरी जिंदगी ठीक-ठाक तरीके से चल रही है, लेकिन चंबल के बीहड़ों में मैंने अपनी जिंदगी का जो समय गुजारा है, जो दर्द और तकलीफ झेली है, उसे भुलाना बेहद मुश्किल हैं।

पिता की हत्या का बदला लेने के लिए कोमेश ने उठाई बंदूक-

- राजस्थान के कुख्यात डकैत जगत गुर्जर के गैंग की महिला डकैत कोमेश गुर्जर ने भी बीहड़ में रह कर मां बनने में गुरेज नहीं किया। बीहड़ में जहां हर पल मौत से सामना होता है, वहां पर कोमेश ने दुर्गम हालात में मां बनने का फैसला किया। राजस्थान के धौलपुर जिले के पूर्व सरपंच छीतरिया गुर्जर की बेटी कोमेश अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए बंदूक उठा कर बीहड़ों में कूद गई थी। गिरोह में साथ-साथ रहने के दौरान जगन गुर्जर और कोमेश एक दूसरे के करीब आ गए। शादीशुदा और दो बच्चों के पिता जगन से उसकी नजदीकी इस कदर बढ़ गई कि साढ़े चार फुट लंबी 28 वर्षीय कोमेश गिरोह में जगन की ढाल मानी जाने लगी। मुरैना में मध्य प्रदेश के साथ हुई एक मुठभेड में गोली लगने से कोमेश घायल हो गई थी। जगन उसे पुलिस की नजरों से बचाकर अपने साथ ले गया। लेकिन राजस्थान के धौलपुर के समरपुरा के एक नर्सिंग होम में 5 नवंबर, 2008 को इलाज करा रही कोमेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कोमेश की जुदाई जगन से बर्दाश्त नहीं हुई और उसने 31 जनवरी, 2009 को राजस्थान के करौली जिले के कैमरी गांव के जगदीश मंदिर के परिसर में दौसा से कांग्रेस सांसद सचिन पायलट के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, लेकिन इस शर्त पर कि उसे और कोमेश को एक ही जेल में रखा जाए। 11 साल पहले अपनी बेटी की शादी करते समय जगन ने कसम खाई थी कि वह अब जुर्म की दुनिया छोड देगा।

- सीमा परिहार के बाद डकैत चंदन की पत्नी रेनू यादव, डकैत सलीम गुर्जर की प्रेमिका सुरेखा उर्फ सुरेखा और जगन गुर्जर की पत्नी कोमेश गुर्जर ने भी चंबल के बीहड़ो में रहते हुए मातृत्व सुख हासिल किया। डकैत सलीम की प्रेमिका सुरेखा ने भी एक बेटे को जन्म दिया। मूलरूप से मध्यप्रदेश के भिंड की रहने वाली सुरेखा लंबे समय तक जेल में रही हैं। अदालत के निर्णय पर फिलहाल वह बाहर आ चुकी है। वर्तमान में सुरेखा गांव में रह कर अपना जीवन बसर कर रही हैं।

- चंबल घाटी के कुख्यात डकैत छविराम की पत्नी ने तमाम संघर्षों के बाद अपने बेटे को समाज में जो सम्मान दिलाया है, उसकी दूसरी मिसाल मिलना मुश्किल है। डकैत छविराम की पत्नी संघर्षों से कभी नहीं घबराई। उन्होंने अपने बेटे अजय पाल यादव को पढाया-लिखाया। आज अजयपाल यादव उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर है।

- 5 जनवरी 2005 को औरैया जिले में पुलिस मुठभेड में मारे गये कुख्यात डकैत चंदन यादव गैंग की महिला डकैत रेनू यादव ने भी एक बेटी को जन्म दिया है। रेनू की बेटी अपनी नानी के पास औरैया के मंगलीपुर गांव में रह रही है।

- डाकू रहते हुए अरविन्द गुर्जर और रामवीर गुर्जर दोनों ने साल 2005 में बबली और शीला संग बीहड़ में शादी रचाई। दोनों पर कई मुकदमे भी दर्ज रहे, रामवीर की पत्नी शीला ने नर्मदा नाम की एक बेटी को जन्म दिया। आज नर्मदा अपनी मां के साथ मध्य प्रदेश के इंदौर में पढाई करके जीवन उत्थान में जुटी हुई है।

- चंबल के इतिहास में पुतलीबाई का नाम पहली महिला डकैत के रूप में दर्ज है। बीहड़ों में पुतलीबाई का नाम एक बहादुर और आदर्शवादी महिला डकैत के रूप में सम्मानपूर्वक लिया जाता है।

- 80 के दशक में सीमा परिहार के बाद लवली पांडे, अनीता दीक्षित, नीलम गुप्ता, सरला जाटव, सुरेखा, बसंती पांडे, आरती, सलमा, सपना सोनी, रेनू यादव, शीला इंदौरी, सीमा यादव, सुनीता पांडे, गंगाश्री आदि ने भी बीहड में दस्तक दी परंतु इनमें से कोई भी सीमा परिहार जैसा नाम और शोहरत हासिल नहीं कर सकीं। सरला जाटव, नीलम गुप्ता और रेनू यादव के अतिरिक्त अन्य महिला डकैत पुलिस की गोलियों का शिकार हो गईं। हालांकि एक समय लवली पांडेय सीमा परिहार के मुकाबले ज्यादा खतरनाक साबित हुई थी।