30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पांच नदियों का संगम है पचनद, कार्तिक पूर्णिमा पर लगा लाखों श्रद्वालुओं का जमावड़ा

पचनद पर यमुना, चंबल, क्वारी, सिंधु और पहुज नदियों का संगम है...

3 min read
Google source verification
Yamuna Chambal Kwari Sindhu Pahuj five river sangam in etawah

पांच नदियों का संगम है पचनद, कार्तिक पूर्णिमा पर लगा लाखों श्रद्वालुओं का जमावड़ा

दिनेश शाक्य

इटावा. कभी चंबल के कुख्यात डाकुओं के प्रभाव में रहे उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में पांच नदियों के संगम स्थल पंचनंदा पर कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर लगे मेले में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के श्रद्वालुओं का जमघट नजर आया। महाभारत कालीन सभ्यता से जुड़े इटावा में कार्तिक पूर्णिमा पर पचनंद समिति की अगुवाई में एक दिन के मेले का आयोजन किया गया। अर्से से पांच नदियों के संगम स्थल पर कार्तिक पूर्णिमा पर आस्था का मेला लगता आया है। चंबल इलाके में काम करने की बहुत संभावनाए हैं। यहां प्राकृतिक आंनद का एहसास होता है। देश में चंबल जैसा दूसरा कोई हिस्सा नही हैं लेकिन संसाधन की बहुत समस्याएं हैं।


पंचनंदा समिति के प्रंबधक बापू सहेल सिंह परिहार ने बताया कि चूंकि कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी मध्यप्रदेश और राजस्थान तक से कई लाख की तादात में श्रदालु यहां पर पहुंचते हैं। पांच नदियों का यह संगम उत्तर प्रदेश के इटावा जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर बिठौली गांव में है। जहां पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान राज्य के लाखों की तादात में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है। सारे विश्व में इटावा का पंचनद ही एक स्थल है, जहां पर पाचं नदियों का संगम हैं, ये नदियां हैं यमुना, चंबल, क्वारी, सिंधु और पहुज।


दुनिया में दो नदियों के संगम तो कई स्थानों पर हैं। जबकि तीन नदियों के दुर्लभ संगम प्रयागराज को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण समझा जाता है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि पांच नदियों के इस संगम स्थल को त्रिवेणी जैसा धार्मिक महत्व नहीं मिल पाया। प्रयाग का त्रिवेणी संगम पूर्णतः धार्मिक मान्यता पर आधारित है, क्योंकि धर्मग्रन्थों में वहां पर गंगा, यमुना के अलावा अदृश्य सरस्वती नदी को भी स्वीकारा गया है। यह माना जाता है कि कभी सतह पर बहने वाली सरस्वती नदी अब भूमिगत हो चली है। बहराहल तीसरी काल्पनिक नदी को मान्यता देते हुये त्रिवेणी संगम का जितना महत्व है, उतना साक्षात पांच नदियों के संगम को प्राप्त नहीं हैं।


पांच नदियों का यह स्थल महाभारत कालीन सभ्यता से भी जुड़ा हुआ माना जाता हैं क्योंकि पांडवों ने अज्ञातवास इसी इलाके में बिताया था। पांडवों के यहां पर अज्ञातवास बिताने के प्रमाण भी मिलते हैं। महाभारत में जिस बकासुर नामक राक्षस का ज्रिक किया जाता है, उसे भीम ने इस इलाके के एक ऐतिहासिक कुएं मे मारके डाला था। 800 ईसा पूर्व पंचनंदा संगम पर बने महाकालेश्वर मंदिर पर साधु-संतो का जमावड़ा लगा रहता है। मन में आस्था लिए लाखों श्रद्धालु कालेश्वर के दर्शन से पहले संगम में डुबकी अवश्य लगाते हैं। यह वह देव शनि हैं जहां भगवान विष्णु ने महेश्वरी की पूजा कर सुदर्शन चक्र हासिल किया था। इस देव शनि पर पांडु पुत्रों को कालेश्वर ने प्रकट होकर दर्शन दिए थे। इसीलिए हरिद्वार, बनारस, इलाहाबाद छोड़कर पंचनंदा पर कालेश्वर के दर्शन के लिए साधु-संतो की भीड़ जुटती है।

इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि इतने पावन स्थान को यदि उस प्रकार से लोकप्रियता हासिल नहीं हुई, जिस प्रकार से अन्य तीर्थस्थलों को ख्याति मिली। इसके लिए यहां का भौगोलिक क्षेत्र कसूरवार रहा है। पंचनंदा के एक प्राचीन मंदिर को बाबा मुकुंदवन की तपोस्थली भी माना जाता है। जनश्रुति के अनुसार संवत 1636 के आसपास भादों की अंधेरी रात में यमुना नदी के माध्यम से गोस्वामी तुलसीदास कंजौसा घाट पहुंचे थे और उन्होंने मुध्यधार से ही पानी पिलाने की आवाज लगाई थी। जिसे सुनकर बाबा मुकुंदवन ने कमंडल में पानी लेकर यमुना की तेज धार पर चलकर गोस्वामी तुलसीदास को पानी पिलाकर तृप्त किया था।

पंचनद बांध पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। साल 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने यमुना पट्टी के गांव सड़रापुर में बांध बनाने की घोषणा की थी। एक जून को इटावा दौरे के वक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चंबल के बीहडो में स्थापित दुनिया की पांच नदियों के संगम पंचनद को पर्यटन केंद्र के रूप मे स्थापित करने के ऐलान के बाद बीहडांचल मे खुशी की लहर पैदा हुई है। अर्से से उपेक्षा के शिकार पंचनद को लेकर किसी मुख्यमंत्री ने पहली बार इसको पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने का ऐलान कर इलाकाई लोगो मे खुशलाही का एहसास करा दिया है। पर्यटन विभाग पंचनद को पयर्टन केंद्र के रूप में स्थापित करने की प्रकिया में बड़ी ही तेजी से जुट गया है। हाल-फिलहाल 3 करोड़ 50 लाख रुपए से वहां पर घाट, मंदिर जीर्णाेद्धार, सैलानियों के लिए ठहरने का स्थान सहित अन्य सुविधाओं का कार्य कराया जाएगा।

Story Loader