
लंदन। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को एक बार फिर झटका लगा है। जेल से बाहर आने की नीरव मोदी की कोशिशें फिर से नाकामयाब हो गई हैं । नीरव मोदी वीडियो लिंक के जरिए लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत के सामने पेश हुआ । न्यायाधीश ने कहा कि अदालत उसके मामले से संबंधित दस्तावेजों को हासिल करने के उसके अनुरोध पर काम कर रही है, लेकिन तब तक उसे जेल में रहना होगा। वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने उसे सुनवाई की अगली तारीख 25 जुलाई तक हिरासत में भेज दिया गया है।
पीएनबी फ्रॉड केस में वांछित भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी की कस्टडी की अवधि आज खत्म हो रही थी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नीरव मोदी को आज सुनवाई के लिए पेश किया गया।
ब्रिटेन के कानून के तहत, नीरव मोदी को हर चार सप्ताह में अदालत में पेश किया जाना है। उसके प्रत्यर्पण पर 29 जुलाई को होने वाली संभावित सुनवाई से पहले उसे एक और रिमांड हियरिंग का सामना करना पड़ सकता है। नीरव मोदी को 19 मार्च को मध्य लंदन में स्कॉटलैंड यार्ड अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था।
नीरव मोदी को एक और झटका
अदलात के इस फैसले से नीरव मोदी को बड़ा झटका लगा है। 13,700 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में लंदन की जेल में बंद भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की न्यायिक हिरासत आज खत्म हो रही थी । ब्रिटेन की अदालत ने इससे पहले भगोड़े भारतीय व्यापारी की चार जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं क्योंकि भारत ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी और अदालत से कहा था कि वह देश से फरार हो सकता है। पिछली सुनवाई में ब्रिटेन की अदालत ने भारत सरकार से यह पुष्टि करने के लिए कहा था कि भारत में प्रत्यर्पित किए जाने पर उसे कहाँ रखा जाएगा। आज की सुनवाई के दौरान नीरव मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होगा। उम्मीद है कि अदालत आज उसके प्रत्यर्पण के मुकदमे की तारीख भी तय कर सकती है।
चार जमानत याचिकाएं खारिज
11 जून को इस मामले में चौथी जमानत अर्जी दाखिल करने के बाद मोदी के वकील क्लेयर मोंटगोमरी ने वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट, लंदन में मुख्य मजिस्ट्रेट एम्मा अर्बुथनॉट के समक्ष गुहार लगाई कि थी कि सफेदपोश अपराधों में पलायन दर कम है, और नीरव के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। लेेकिन मजिस्ट्रेट ने इस दलील को नहीं माना और कहा कि मोदी भले ही भागने का इरादा नहीं रखता है, लेकिन कानून के शिकंजे से बचने के लिए उनके पास "साधन" मौजूद है।
यूके की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस टीम ने इस आधार पर मोदी की जमानत अर्जी का विरोध किया था कि मोदी ने अतीत में गवाहों को मौत की धमकी दी थी और मामले में सबूत नष्ट करने का भी प्रयास किया था। टीम ने अदालत को सूचित किया था कि उसने 2017 के अंत में उसने दक्षिण प्रशांत महासागर में एक दूरस्थ द्वीप - वानुअतु की नागरिकता हासिल करने के प्रयास किए थे, और वह फिर से ऐसा कर सकता है।
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Updated on:
28 Jun 2019 09:08 am
Published on:
27 Jun 2019 10:15 am
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