
देशव्यापी COVID-19 लॉकडाउन के मद्देनजर, CBSE ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सभी हितधारकों के हित को ध्यान में रखते हुए "संवेदनशील और समग्र" शिक्षकों के वेतन व स्कूल फीस भुगतान के मुद्दों की जांच करने की सलाह दी। लॉकडाउन, जो 25 मार्च से 14 अप्रैल तक था को कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र द्वारा 3 मई तक बढ़ा दिया गया है।
"देशव्यापी लॉकडाउन की वर्तमान स्थिति और COVID-19 वैश्विक महामारी के कारण स्कूल शिक्षा प्रणाली में कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए यह विचार किया जाता है कि राज्य सरकारें स्कूल फीस के भुगतान के मुद्दे की जांच कर सकती हैं। सीबीएसई सचिव अनुराग त्रिपाठी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे एक पत्र में कहा, "शिक्षकों के वेतन को संवेदनशील और समग्र रूप से संबंधित सभी हितधारकों के हित को देखते हुए राज्य और संघ राज्य क्षेत्र स्कूल फीस के भुगतान की अवधि और शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को वेतन के भुगतान पर उपयुक्त निर्देश जारी करने पर विचार कर सकते हैं, जो महामारी की अवधि के दौरान लागू हो।
ठाकुर ने कहा कि ***** राज्यों की ओर से हुई कार्रवाई को लेकर बोर्ड को सूचित किया जा सकता है ताकि हम अपने हितधारकों के प्रश्नों का उत्तर दे सकें।"
सीबीएसई संबद्धता उपनियमों के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित नियमों के तहत शुल्क लिया जाना चाहिए।
संबद्धता के आधार पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के शिक्षा विभाग को यह भी अधिकार है कि वे शुल्क के तरीके को तय कर सकते हैं।
Published on:
18 Apr 2020 08:28 pm
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