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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने शिक्षक भर्ती में पासिंग मार्क्स बढ़ाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है। इस मामले में अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है। याची की ओर से पासिंग मार्क्स को बढ़ाए जाने के आदेश को चुनौती दी गई है। उसका विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि शिक्षा में सुधार करने और गुणवत्ता बढ़ाने के लिहाज से सरकार ने यह किया है।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की पीठ ने मोहम्मद रिजवान और अन्य की ओर से दायर याचिकाओ पर एक साथ सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। इस मामले में पहले सुनवाई के समय राज्य सरकार के वकील ने सुझाव दिया था कि कुल 69 हजार पदों के सापेक्ष डेढ़ गुने पदों पर शार्टलिस्ट कर लिया जाए। इस सुझाव का याची गणो की ओर से विरोध किया गया था।
राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि बच्चो की शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने क्वालिफाइंग अंको में बढ़ोत्तरी की है, जो कि बिल्कुल सही है। सरकार की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार स्वयं ऐसे कार्य कर रही है जिससे बच्चो की शिक्षा व पढ़ाई बहुत अच्छी हो सके और स्कूलों को योग्य शिक्षक मिले।
याची गणो की ओर से दायर याचिका में सरकार द्वारा सहायक शिक्षकों की भर्ती में पैसठ और साठ प्रतिशत पासिंग अंक (क्वालीफाईंग मार्क्स) किए जाने के शासनादेश को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया कि यह शासनादेश शिक्षामित्रों के हितों के खिलाफ है। याचिका का कड़ा विरोध कर राज्य सरकार की ओर से कहा कि शिक्षा को उन्नत करने और शिक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जारी शासनादेश सही है।
उल्लेखनीय है कि गत 25 जुलाई 2017 को उच्चतम न्यायालय ने शिक्षामित्रों को दो अवसर दिए जाने के आदेश दिए थे। यह भी आरोप लगाया गया कि शिक्षामित्रों को दर किनार करने के उद्देश्य से यह शासनादेश जारी किया गया गया। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित कर लिया है।
Published on:
23 Feb 2019 01:23 pm
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