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भारतीय संविधान के आरंभ में उद्देशिका (प्रस्तावना) का वर्णन है। यह संविधान का सार है। 42वें संशोधन होने के बाद उद्देशिका निम्नलिखित है-
भारतीय संविधान की उद्देशिका
हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ई. को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।
उद्देशिका के विषय में महत्त्वपूर्ण तथ्य
उद्देश्य
प्रस्तावना के संबंधित वाद
प्रस्तावना के विषय में विद्वानों के कथन-
"प्रस्तावना भारतीय संविधान का परिचय पत्र है"
- नानी पालकीवाला
"उद्देशिका भारत के संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य की जन्म कुंडली है"
- के. एम. मुंशी
एक्सपर्ट टिप्स
उद्देशिका भारतीय संविधान का बहुत ही महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए उसके हर पहलू का गहनता से अध्ययन करें। परीक्षा में अक्सर इससे जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
- डॉ. रविन्द्र सिंह यादव, व्याख्याता, राजनीति विज्ञान
Published on:
12 Nov 2018 01:27 pm
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