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#Women’sDay: दिव्यांगों के लिए मसीहा हैं अयोध्या की डॉ. रानी अवस्थी

महिला दिवस पर हम आपकी मुलाक़ात एक ऐसी महिला से कराते है, जिन्होंने अपना जीवन उन बच्चों के नाम कर दिया जो दिव्यांग है

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Ruchi Sharma

Mar 08, 2016

dr. rani

dr. rani

अयोध्या.महिला दिवस पर हम आपकी मुलाक़ात एक ऐसी महिला से कराते है, जिन्होंने अपना जीवन उन बच्चों के नाम कर दिया जो दिव्यांग है। राम की नगरी अयोध्या सप्तपुरियों में मस्तक है। यहां के रहने वाले भी आदर्श जीवन के साथ कुछ करने की सोच रखते है। ऐसी ही एक ग्रहणी जो मूलतः तो इलाहाबाद कि रहने वाली है, लेकिन अब अयोध्या में रहती है। डॉ. रानी अवस्थी जिन्होंने अयोध्या के तुलसी नगर में मूक बधिर विद्यालय की स्थापना कर उन दिव्यांग बच्चों की सेवा करना ही अपना धर्म बना लिया है। इस विध्यालय से निकले बच्चे आज सरकारी गैर सरकारी संस्थान में सर्विस कर स्वाव्लम्बी बन लोगों के लिए उदहारण बन रहे है।

दिव्यांगों के लिए बनाया है विशेष विद्यालय

धर्म नगरी अयोध्या के स्वर्ग द्धार में बना मूक बधिर स्कूल किसी पहचान का मोहताज नहीं है। इस स्कूल में दिव्यांग बच्चों को शिक्षा प्रदान कर स्वावलम्बी बनाया जाता है। इस स्कूल की संचालिका डॉ. रानी अवस्थी का जन्म इलाहबाद में हुआ था। लेकिन इन्होंने राम की नगरी अयोध्या को अपना कर्म भूमि बनाया। डॉ. रानी अवस्थी का कहना है कि 35 वर्ष पूर्व वह अयोध्या दर्शन करने आई। यहां इन्होंने उन बच्चों को मांग कर खाते देखा जो शारीरिक रूप से अक्षम थे। मन में बड़ा कष्ट हुआ और इन्होंने इन दिव्यांग बच्चों को स्वाव्लम्बी बनाने की ठानी।

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इसी उद्देश्य से इन्होंने स्वर्ग द्वार मोहल्ले में एक मूकबधिर विद्यालय की स्थापना की। इस विद्यालय में इन दिव्यांग बच्चों को इंटर तक की शिक्षा दी जाती है। साइन मेथड से इन दिव्यांग बच्चों को शिक्षा दी जाती है। इसके आलावा इन बच्चों को सांस्कृतिक कार्यक्रम, जुडो कराटे, व खेल जगत की भी शिक्षा दी जाती है। यहां से शिक्षा प्राप्त निकले बच्चे देश में अपनी भागीदारिता निभा रहे है। कई बच्चे सरकारी सेवा में भी नौकरी कर रहे है। डॉ. रानी अवस्थी का कहना है कि वह यहां शिक्षा प्राप्त कर रहे दिव्यांग बच्चों को दया का पात्र नहीं बनने देती बल्कि हुनर को निखार कर स्वावलंबी जीवन जीने की शिक्षा देती है।

डॉ. रानी अवस्थी को अभी तक मिल चुके है तीस से अधिक पुरस्कार

डॉ. रानी अवस्थी द्वारा दिव्यांगों के लिए किये जा रहे इस समाजसेवा के कार्य के लिए इन्हें अब तक इन्हें 60 से अधिक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चूका है। जीमे से तीन पुरस्कार तो राज्य स्तरीय है और दिव्यांग बच्चों की सेवा के लिए लगातार डॉ. रानी अवस्थी प्रयासरत है। उनकी इस मुहीम में महिला होना डॉ. रानी अवस्थी के रास्ते में कभी बाधा नहीं आई। डॉ. रानी अवस्थी का कहना है कि इस काम में बहुत सी बाधाएं आई लेकिन अपने संकल्प के प्रति दृढ संकल्प होना मेरे लिए लाभकर रहा और आज भी मैं दिव्यांगों की सेवा में तत्पर हूं। आगे भी ये प्रयास जारी रहेगा।

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