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भगवान राम पर केस, उन्हें बदनाम करने साजिश : हाशिम अंसारी

भगवान पर केस को लेकर अयोध्या के संतों में नाराजगी, कहा, सस्ती लोकप्रियता के लिए किया गया है केस।

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UP Patrika

Feb 01, 2016

अयोध्या.
भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां सब को अपनी बात कहने का और अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने का हक़ है और ऐसा होता भी है। अपने साथ हुए ज़ुल्म या नाइंसाफी के खिलाफ इन्साफ पाने की जद्दोजहद में हर रोज़ देश के हर शहर, हर जिले की कचहरी में हज़ारों लाखों लोग कोर्ट कचहरी का चक्कर काटते नज़र आते है, लेकिन ज़रा गौर कीजिए की अगर नाइंसाफी का इल्ज़ाम खुद भगवान् पर हो और आरोपी भी भगवान् हों तो ऐसे मुकदमे में इन्साफ कर पाना शायद न्यायिक प्रक्रिया के लिए भी मुश्किल होगा। क्योंकि जिसको किसी ने देखा नहीं, जिसका कोई ठिकाना नहीं उसको आखिर कोर्ट भी सज़ा देगी तो कैसे...ऐसा ही एक दिलचस्प मामला दर्ज हुआ है बिहार के सीतामढ़ी में जहां फिल्म ओ माय गॉड की तर्ज़ पर भगवान राम पर अपनी पत्नी के उत्पीडन को लेकर एक वकील ने मुकदमा दर्ज करा दिया है। वहीं इस मुकदमे को लेकर न सिर्फ अयोध्या का संत समुदाय बेहद नाराज़ है बल्कि बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकार हाशिम अंसारी ने भी इसे भगवान राम को बदनाम करने की साजिश करार दिया है।


आरोप पूरी तरह से फर्जी है


अयोध्या में विवादित स्थल पर मंदिर-मस्जिद के मुक़दमे में बाबरी मस्जिद मामले के मुख्य मुद्दई हाशिम अंसारी भी बिहार में दर्ज कराये गए इस मुक़दमे को लेकर नाराज़ दिखे और कहा कि जब से मैंने होश संभाला है तब से ये पहला मौका नहीं है जब रामलला को बदनाम करने की साजिश की गयी है। इससे पहले भी रामलला के नाम पर सियासत करने वाले लोग रामलला को बदनाम करने की साजिश कर चुके है। ये मामला भी कुछ ऐसा ही है और ये सब रामलला को बदनाम करने की साजिश है और कुछ नहीं। आरोप पूरी तरह से फर्जी है।



अगर कोर्ट बुलाएगी तो जाऊंगा


अयोध्या में रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येन्द्र दास ने राम के खिलाफ बिहार के कोर्ट में दायर परिवाद को निराधार बताया और कहा है कि मनुष्य के बनाये कानून के आधार पर भगवान को कैसे सजा दी जा सकती है। भगवान राम तो स्वयं सर्वोच्च अधिकारी हैं, सबके साथ न्याय करने वाले हैं, उन्होंने जो किया सब कुछ उनकी लीला का हिस्सा था ये दावा निरर्थक है। भारत में सभी को अपनी बात कहने का हक़ है। अगर कोर्ट कोई सम्मन या बयान सुनवाई के लिए मुझे बुलाया जायेगा तो मैं अपना पक्ष रखने ज़रूर जाऊंगा।



सस्ती लोकप्रियता के लिए किया गया है ये कृत्य


इस मामले को लेकर अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास परिवाद दायर करने वाले अधिवक्ता पर बेहद नाराज़ दिखे और कहा कि ये सब सस्ती लोकप्रियता पाने का एक माध्यम है। भगवान राम तो मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, उनकी खिलाफ अमर्यादित आचरण का आरोप कैसे कोई लगा सकता है। उन्होंने जो किया वो सब पूर्व निर्धारित था और यह सब उनकी लीला का एक हिस्सा था, भगवन राम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले लोग भगवान राम का अपमान कर रहे हैं।ऐसे लोग धर्म विरोधी हैं र्इश्वर उन्हें सदबुद्घि दे।



क्या है पूरा मामला जिस पर भड़के अयोध्यावासी


बिहार के सीतामढ़ी में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट श्याम बिहारी की अदालत में स्थानीय वकील ठाकुर चंदन सिंह ने केस दर्ज कराया है। महिला उत्पीड़न का केस दर्ज कराया है। चंदन सिंह की दलील है कि, "एक धोबी की बात सुनकर भगवान राम ने अपनी पत्नी सीता को घर से निकाल दिया। ऐसा कर उन्होंने सीता पर अत्याचार किया है। बात सीता को वनवास की है।


मिथिला की बेटी के साथ इंसाफ नहीं किया


चंदन ने कहा कि, "वह भी मिथिला में पैदा हुए और सीता भी मिथिला में ही पैदा हुई थीं। लेकिन अयोध्या नरेश ने मिथिला की बेटी के साथ इंसाफ नहीं किया। सीता मैया को न्याय दिलाने के लिए यह केस दर्ज कराया है। मेरा मकसद सिर्फ सीता को न्याय दिलाना है। किसी धर्म या किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं।चंदन सिंह का तर्क है कि, स्त्री उत्पीड़न त्रेता युग में ही शुरू हो गया था। इसलिए जब तक त्रेता युग की नारी को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक कलियुग की नारी को भी न्याय नहीं मिल सकता। उन्होंने राम के विवेक पर भी सवाल उठाया है। कहा है, इस पर बहस होनी चाहिए कि क्या राम का विवेक सही था।

file:///home/dikshant.sharma/Downloads/Acharya Satyendra Das.mpg

Hashim ne Ki ramlalaa Ki Wakaalat ANSARI


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