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 अध्यात्म: जानिए, अयोध्या में क्यों नहीं हुई थी एक महीने तक रात!

धार्मिक नगरी अयोध्या के एक ऐसे चौकाने वाले पौराणिक इतिहास के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं जिसके बारे में शायद ही आपको पता हो भादौं मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी पर भगवान सूर्य के एक चमत्कार की कहानी से आज हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं ।

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Anoop Kumar

Sep 11, 2016

Suraj Kund

Suraj Kund

अनूप कुमार

फैज़ाबाद ( अयोध्या) धार्मिक नगरी अयोध्या के एक ऐसे चौंकाने वाले पौराणिक इतिहास के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं जिसके बारे में शायद ही आपको पता हो । भादौं मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर भगवान सूर्य की जयंती मनाई जा रही है इस अवसर पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में विविध धार्मिक आयोजन हो रहे हैं इस अवसर पर भगवान सूर्य के एक चमत्कार की कहानी से आज हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं ।

भगवान राम के प्राकट्योत्सव के मौके पर रुक गया था भगवान सूर्य का रथ

श्रीरामचरितमानस में लिखित उल्लेख के अनुसार ऐसा कहा जाता है जब भगवान राम लला का प्राकट्योत्सव हुआ था उस समय अयोध्या में 33 करोड़ देवता आए थे और इन सभी का मार्ग प्रशस्त करते हुए भगवान सूर्य सबसे आगे प्रकाश फैलाते हुए चल रहे थे और उस समय 30 दिनों तक अयोध्या में अंधेरा नहीं हुआ और प्रकाश फैला रहा । 30 दिनों तक अयोध्या में रात्रि नहीं हुई और सभी देवी देवता भगवान श्री राम के प्राकट्य उत्सव में शामिल रहे ।

जिस स्थान पर रूका भगवान सूर्य का रथ उसी स्थान पर आज स्थापित है भगवान सूर्य का पौराणिक मंदिर

अयोध्या के दर्शन नगर कस्बे में स्थित प्राचीन सूर्य कुंड मंदिर के पुजारी महान धनुषधारी महाराज बताते हैं कि त्रेता युग में 30 दिनों तक भगवान सूर्य का रथ जिस स्थान पर रुका रहा उसी स्थान पर राजा दर्शन सिंह ने प्राचीन सूर्य कुंड मंदिर का और सरोवर का निर्माण कराया था जहां प्रतिवर्ष सूर्य जयंती के अवसर पर महारविवार को विशाल मेले का आयोजन किया जाता है ।

कुंड के सरोवर में स्नान करने से ठीक हो गया था राजा दर्शन सिंह का चर्म रोग

किंवदंतियों के अनुसार अयोध्या के राजा दर्शन सिंह शिकार के लिए इस क्षेत्र में आए थे जहां उन्हें प्यास लगने पर उनके एक सेवक ने गड्ढे के रुप में मौजूद इस कुंड से थोड़ा सा जल लाकर राजा को दिया जिसे पीते ही राजा का चर्म रोग ठीक हो गया जिसके बाद राजा ने इस स्थान पर 7 दिनों तक तपस्या की । राजा की तपस्या से प्रसन्न होकर आकाशवाणी हुई और राजा ने आकाशवाणी में कही हुई बात के अनुसार इस कुंड की खुदाई कराई जिसके बाद इस कुंड के अंदर से 12 अश्वों पर सवार भगवान सूर्य की प्रतिमा,भगवान शिव का शिवलिंग और ढेर सारा खजाना प्राप्त हुआ जिसके बाद उसी खजाने से इस प्राचीन मंदिर और सरोवर का निर्माण कराया गया ।

भादो मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी पर महा रविवार को लगता है विशाल मेला

मंदिर के पुजारी महंत धनुषधारी दास ने बताया कि भादो मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर महा रविवार के दिन इस पौराणिक मंदिर पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें देश भर से श्रद्धालु दर्शन और पूजन करने आते हैं आज की तिथि के दिन भगवान सूर्य की उपासना पूजा करने और उनका दर्शन करने से तमाम बीमारियां समाप्त हो जाती है और मनुष्य को सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है इसी मनोकामना की पूर्ति के लिए बड़ी संख्या में महा रविवार को प्राचीन सूर्य मंदिर पर मेले में शामिल होने के लिए भक्त श्रद्धालु आते हैं ।


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