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अपने बच्चों को नगद पुरस्कार दिलाकर फंसे पूर्व खेल निदेशक जगदीप सिंह,दो सप्ताह में जवाब नहीं दिया तो होगी एफआईआर

भीम अवार्ड और कैश अवार्ड ब्याज के साथ वापस लेने की सिफारिश...  

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jagdeep singh file photo

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(चंडीगढ़,फरीदाबाद): अपनी कार्यशैली को लेकर अक्सर विवादों में रहे हरियाणा के आइएएस अधिकारी एवं पूर्व खेल निदेशक एक बार फिर बड़े विवाद में घिर गए हैं। इस बार मामला पद के दुरूपयोग का है। खेल निदेशक पद पर रहते हुए उन्होंने अपने बच्चों को कई पुरस्कार दिलाए। आइएएस जगदीप सिंह हरियाणा के पूर्व शिक्षा मंत्री बहादुर सिंह के बेटे है। बहादुर सिंह अब जननायक जनता पार्टी में शामिल हो गए। जगदीप सिंह पहले एचसीएस अधिकारी थे। पदोन्नत होकर आइएएस बने जगदीप सिंह फिलहाल वित्त विभाग में कार्यरत हैं।


खेल निदेशक के पद से हटने के बाद जगदीप सिंह उनके अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज बेटे विश्वजीत सिंह और बेटी गौरी श्योराण की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खेल विभाग से हाल ही में हटाए गए प्रधान सचिव अशोक खेमका की एक जांच रिपोर्ट में विश्वजीत और गौरी को 60 लाख रुपए की पुरस्कार राशि के फर्जी दावे पेश करने तथा पिता जगदीप सिंह के प्रभाव के चलते अत्याधिक पुरस्कार राशि हासिल का आरोपी ठहराया गया है।


खेमका ने जांच रिपोर्ट में तत्कालीन खेल निदेशक, उनके बेटे और बेटी तीनों को धोखाधड़ी करने का आरोपी ठहराते हुए उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज करने की सिफारिश की है। गौरी और विश्वजीत को पिछले दिनों भीम अवार्ड भी प्रदान किया जा चुका है। खेमका ने अपनी रिपोर्ट में सरकार को सुझाव दिया है कि दोनों से खिलाडिय़ों के सर्वोच्च भीम पुरस्कार, प्रमाण पत्र, भीम प्रतिमा, ब्लेजर, टाई और स्कार्फ भी वापस लिया जा सकता है।


अशोक खेमका ने सरकार को सलाह दी कि गलत ढंग से हासिल की गई राशि को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से वापस लेकर सरकारी खजाने में जमा कराया जाए। खेल मंत्री अनिल विज ने इस जांच रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए मुख्यमंत्री को भेजा। मुख्यमंत्री ने तीनों से एक पखवाड़े के भीतर जवाब मांगने के निर्देश दिए हैं।


कहां है पुरस्कारों में गड़बड़ी

अशोक खेमका की जांच रिपोर्ट के मुताबिक गौरी श्योराण को 43 लाख रुपए की अतिरिक्त पुरस्कार राशि और 2013-16 के दौरान विश्वजीत सिंह को 17 लाख रुपए का भुगतान किया गया। तब जगदीप सिंह खेल निदेशक थे। रिपोर्ट में गौरी और विश्वजीत को भीम पुरस्कार भी गलत ढंग से दिए जाने की बात कही गई है। इस पुरस्कार को पाने के लिए न्यूनतम 50 अंक की आवश्यकता होती है। बताया गया कि गौरी श्योराण की स्कोरिंग शीट ने उन्हें टीम श्रेणी में 84 अंक दिलाए थे, जबकि स्वीकृत स्कोरिंग योजना के अनुसार उनका भीम अवार्ड स्कोर 37 अंक था। इसी तरह, विश्वजीत सिंह के मामले में उनकी स्कोर शीट ने उन्हें टीम श्रेणी में 60 अंक दिए, जबकि उनका स्कोर 18 अंक था। जगदीप सिंह का कहना है कि अकेले निदेशक भीम पुरस्कार देने में सक्षम नहीं होता। जब भीम पुरस्कार मेरे बच्चों को दिया गया, तो मैं उस समिति से हट गया था।

जल्द दाखिल करूंगा अपना जवाब:जगदीप सिंह

विवादों में घिरे पूर्व खेल निदेशक जगदीप सिंह ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि वह सरकार के समक्ष अपना जवाब पेश करेंगे। जगदीप सिंह ने कहा कि उनकी बेटी ने 24 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं और 33 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया है। उसके पास 85 राष्ट्रीय पदक हैं। बेटे विश्वजीत के पास 12 अंतरराष्ट्रीय और 50 राष्ट्रीय पदक हैं। कोई भी गलत तरीके से राज्य सरकार के पैसे का दावा कैसे कर सकता है।