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Farrukhabad Hostage : हत्यारे के घर से भारी मात्रा में मिला बारूद, वह कई दिनों तक पुलिस से ले सकता था लोहा

फर्रूखाबाद में ऑपरेशन मासूम की पल-पल अपडेट लेते रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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Farrukhabad Hostage

पुलिस का दावा है कि इतनी बारूद से हत्यारा तीन दिन तक मोर्चा ले सकता था

फर्रुखाबाद. जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर करथिया गांव है, जहां हत्यारे सुभाष बाथम ने घर में 23 बच्चों को बंधक बना लिया था। पुलिस ने ऑपरेशन चलाकर करीब 8 घंटे बाद बंधक बनाए गए बच्चों को मुक्त कराया। इस दौरान सुभाष को मार गिराया गया। ग्रामीणों ने बाथम की पत्नी की पिटाई कर दी, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शुक्रवार को बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉयड की टीम मौके पर पहुंची। सिरफिरे के घर की तलाशी में पुलिस को रायफल के साथ ही बड़ी संख्या में कारतूस और गोला-बारूद भी मिला है। पुलिस का दावा है कि इतनी बारूद से हत्यारा तीन दिन तक मोर्चा ले सकता था। पुलिस ने पंचनामा भरकर मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।

तलाशी के दौरान पुलिस को एक बोरी में सुतली बम के अलावा बारूद से भरा छोटा गैस सिलेंडर मिला। 315 बोर की रायफल और तमंचा सहित एक दर्जन कारतूस भी पुलिस को हत्यारे के घर से मिले हैं। बम निरोधक दस्ते ने सिरफिरे के घर से मिले बारूद को खेतों में ले जाकर नष्ट किया। आईजी मोहित अग्रवाल के मुताबिक, हत्यारे के घर में भारी मात्रा में गोला-बारूद मौजूद था जिससे वह कई दिनों तक पुलिस से मुकाबला कर सकता था। गुरुवार को जब पुलिस रेस्क्यू के दौरान हत्यारे के चुंगल से बच्चों को निकालने का प्रयास कर रही थी, उसने धमकी दी कि अगर कोई उसके घर में घुसा तो वह पूरे घर को बारूद से उड़ा देगा। उसके पास 32 किलो बारूद है, इसलिए पीछे हट जाओ। धमकी के बाद पुलिस को पीछे हटना पड़ा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे ऑपरेशन मासूम नाम दिया और आधी रात तक खुद लखनऊ से पल-पल घटनाक्रम की जानकारी लेते रहे।

ग्रामीणों को सबक सिखाना चाहता था
ग्रामीणों ने बताया कि जेल से जमानत पर छूटकर आये हत्यारे सुभाष ने चोरी की कई वारदात की थीं। ग्रामीणों ने उसे पुलिस में पकड़वा दिया था। इसके बाद जब भी उसके साथ पुलिस का कोई मामला होता तो वह यही समझता था कि गांववालों ने उसकी मुखबिरी की है। इसके बदले वह लोगों सबक सिखाना चाहता था। आशंका जताई जा रही है कि बाथम कई दिन पहले से ही बच्चों को बंधक बनाने की तैयारी कर रहा था।

सिरफिरे ने सिस्टम पर उठाये सवाल
बच्चों को बंधक बनाने वाले सुभाष बाथम की जो चिट्ठी सामने आई उसने पुलिस-प्रशासन पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। एक व्यक्ति किस तरह रोजमर्रा की चीज़ों के लिए तड़प रहा था और सत्ता के सामने गुहार लगा रहा था वह इसमें सामने आई। उसने लिखा कि कई बार कलेक्ट्रेट में डीएम के यहां चक्कर लगाये। लेकिन न तो शौचालय मिला और न ही कॉलोनी। झूठे आरोपों में जेल में बंद करने के अलावा भी करंट लगाकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।

रूबी पर निकाला पति का गुस्सा
पुलिस नेजैसे ही बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला, गांववालों ने सुभाष के घर पर धावा बोल दिया। इस बीच भीड़ ने सुभाष की पत्नी रूबी बाथम पर अपना गुस्सा निकाला और उसकी पिटाई कर दी, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक सिरफिरे के घर से बचकर आये 12 वर्ष के विनीत ने बताया कि सुभाष ने सभी को तहखाने में बंद कर दिया था। वहां उसने सभी से कहा था कि अगर रोये तो बारूद से उड़ा दूंगा। बच्चे रो रहे थे, जिन्हें उसकी पत्नी समझाती थी। वह जब बच्चों पर गुस्सा करता तो उसकी पत्नी ही उसे रोकती, जिसकी वजह से वह बच्चों से मारपीट नहीं कर पाया। विनीत के मुताबिक, रूबी भी बहुत डरी हुई थी। लोगों के दिये बिस्किट भी उसने ही बच्चों को खिलाये थे।

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