
फर्रुखाबाद. जनपद में शासन के निर्देश पर जनपद में खोले गए आलू खरीद केंद्र बिना बोहनी के ही बंद हो गए। इस वर्ष आलू भाव बेहतर रहने के कारण लगभग 2 माह तक चले इन केंद्रों पर कोई किसान झांकने तक नहीं आया।
पांच हजार मीट्रिक टन आलू खरीद का लक्ष्य
शासन की ओर से जनपद को पांच हजार मीट्रिक टन आलू खरीद का लक्ष्य दिया गया था। इसके लिए जनपद में पीसीएफ को क्रय एजेंसी नामित किया गया था। जिला आलू विकास अधिकारी के निर्देश पर तहसील सदर में काश्तकार कोल्ड स्टोरेज, अमृतपुर में निबिया चौराहे पर पीके कोल्ड स्टोरेज को और कायमगंज तहसील में मंझना स्थित एके कोल्ड स्टोरेज को क्रय केंद्र बनाया गया था। सरकार की ओर से आलू खरीद के लिए 549 रुपए प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य घोषित किया गया था। हालांकि मंडी में आलू भाव खोदाई के समय से ही 700 रुपये के आसपास रहने के चलते किसानों ने इन क्रय केंद्रों का रुख नहीं किया। वर्तमान में तो आलू भाव 1200 से 1400 के बीच चल रहा है।
शासन अपने उद्देश्य में सफल रहा
फर्रुखाबाद संसद बताते हैं कि सरकार का उद्देश्य आलू खरीदना नहीं, बल्कि किसान को उसकी उपज का वाजिब मूल्य दिलाना था। शासन अपने उद्देश्य में सफल रहा। आलू की सरकारी खरीद की घोषणा के दवाब में बिचौलिए किसान का आलू औने-पौने नहीं खरीद सके। आलू आढ़ती संघ के अध्यक्ष सतीश कुमार वर्मा भी इस बार आलू का अच्छा भाव रहने के कारण खुश हैं। वह कहते हैं कि इस बार कोल्ड स्टोरेज मालिक आलू किसान का शोषण नहीं कर सके। इसी के चलते आलू भाव अच्छा रहा।
फर्रुखाबाद की पहचान आलू से है
हालांकि उन्हें सरकार से शिकायत भी है। वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद आलू किसान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। फर्रुखाबाद की पहचान आलू से है। आलू को जनपद के उत्पाद के तौर पर घोषित किया जाना चाहिए था। जिससे यहां आलू आधारित उद्योग स्थापित होते हैं।
Published on:
4 May 2018, 1:13 PM IST
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