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जब भोलेनाथ की मूर्ती पर अग्रेंजों ने चलाई थी गोलियां, जानिये फिर क्या हुआ

सावन के दूसरे सोमवार को तुषौर ऊसर बाबा मंदिर में भक्तों का तांता लगा है।
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फर्रुखाबाद

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Akansha Singh

•

Updated: 6 Aug 2018, 12:49 PM IST

farrukhabad

जब भोलेनाथ की मूर्ती पर अग्रेंजों ने चलाई थी गोलियां, जानिये फिर क्या हुआ

फर्रुखाबाद. सावन के दूसरे सोमवार को तुषौर ऊसर बाबा मंदिर में भक्तों का तांता लगा है। तुषौर गांव का शिव मंदिर भक्तों की अपार श्रद्धा का केंद्र है। मान्यता है कि इस मंदिर में आने वाले हर भक्त की मनोकामना भगवान् भोले नाथ पूरी करते हैं। यहाँ स्थापित शिव लिं-ग महाभारत कालीन है। शिव लिं-ग पर दिखने वाला गोली का निशान स्वयं में ऐतिहासिक तथ्य रेखांकित करता है। बताते हैं कि मुग़ल सेना यहां से शिव लिं-ग को उठाकर ले जाना चाहती थी लेकिन शिव लिं-ग इतना वजनीला हो गयी कि पूरी सेना से उठाये नहीं उठी। इस पर सेना के कमांडर ने शिवलिंग पर फायर कर अपनी गुस्से का इजहार किया। मुग़ल कमांडर द्वारा चलाई गयी यह गोली शिवलिंग में धंस गयी और वह छेद का निशान आज भी मौजूद है।

फर्रुखाबाद के राजेपुर विकास खंड के गांव तुसौर में ऊसर बाले बाबा के नाम से प्रसिद्द शिव मंदिर के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा है। माना जाता है कि मंदिर का मुग़ल काल से पहले का है। क्योंकि मुगल काल से पहले ही अष्ट कोण के शिव मंदिर बनाए जाते थे। पूरे जिले में सैकड़ों अष्ट कोण शिव मंदिर थे लेकिन उपेक्षा का शिकार होने के कारण खंडहर हो गए।


तुषौर के रहने बाले का मानना है कि वर्षो पहले इस मंदिर पर स्वामी ब्रह्मानन्द बाबा रहते थे। उनको सपने में भगवान शिव ने दर्शन दिए। जब स्वामी जी ने मंदिर बनाने की उनसे अनुमति मांगी तो मना कर दिया तब उन्होंने काफी समय तक भगवान शिव की आराधना की और तब मंदिर बनाने की आज्ञा मिली। उन्हीं ने संवत 2009 में खंडहर चबूतरे पर मंदिर बनवाया था। मान्यता है कि यहां आने बाला भक्त कभी निराश नही जाता है।

सूरज दिक्षित बताया कि एक बार मुग़ल सेना ने इस शिवलिंग को कई बार यहां से ले जाने की कोशिश की लेकिन सफल नही हुए तो सेना के कमांडर ने शिवलिंग पर गोलियां चला दी। जिसके निशान अभी भी शिवलिंग पर दिखाई देते है। इस मंदिर में करीब 200 बीघा जमीन है। उसी को पाने के लिए समाज के कुछ लोभियों ने स्वामी जी हत्या कर दी थी। उनकी मानें तो अब पूरे देश में अष्ट कोण के मंदिर बनाने बाले कारीगर नही नही है। जो मंदिर में उस समय जैसी चित्रकला का प्रदर्शन कर सके। मंदिर के ऊपर सोने की चिड़िया लगी हुई थी जिसे चोरो ने चुरा लिया। मंदिर के अंदर सोने व चांदी के मुकुट व छत्र भी लगे हुए थे। यह भी चोरी चले गए। वर्तमान समय में बाबा रामगिरि और बाबा मधुसूदन दास यहां पुजारी के रूप में काम करते है। सावन के सोमवारों को यहां दूर दराज से भक्तगण शिवलिंग पर जलाभिषेक करने आते हैं।