
फर्रूखाबाद. दिवाली का जिक्र आते ही याद आती है मिट्टी से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की। मंहगाई की मार से भले खील-बताशे और खिलौनों की मिठास के साथ उनकी बिक्री भी कम हो जाये, लेकिन लक्ष्मी-गणेश लेना कोई नहीं भूलता है। दिवाली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की परंपरा सदियों से चली आ रही है। भले ही हम कितने ही प्रकार की गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों क्यों न खरीद लें, लेकिन पूजा मिट्टी से बने गणेश-लक्ष्मी की ही होती है। इसी के चलते हर साल घर में गणेश-लक्ष्मी की नई मूर्ति खरीदी जाती है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी कायम है। गरीब से लेकर अमीर तक के घरों की शोभा दिवाली पर मिट्टी से बने गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों से ही बढ़ती है। दिवाली से जुड़ी जहां अनेक परंपराओं को लोग भूल चुके हैं, वहीं मिट्टी से बने गणेश-लक्ष्मी की पूजा करने की परम्परा उन्हें आज भी याद है। वैसे तो फर्रुखाबाद के सदर बाजार में कोलकाता डिजाइन और कई अन्य डिजाइन के अलावा चीन के गणेश-लक्ष्मी भी हैं और उन्हें पसंद भी किया जा रहा है, लेकिन मिट्टी के बने गणेश-लक्ष्मी की बिक्री पर उनका भी असर नहीं पड़ा है।
मिट्टी की मूर्तियों की बाजार में 100 रुपये से लेकर 11 हजार तक कीमत की होती है, वहीं पीओपी की मूर्तियों की बाजार में कीमत 50 रुपये से लगाकर 500 रुपये तक ही सीमित रहती है। मिट्टी की बनी मूर्तियों की डिमांड भी अधिक रहती है। गरीब से लेकर बड़े से बड़ा उधोगपति हो वह अपनी-अपनी दुकानों पर मिट्टी के ही गणेश लक्ष्मी का पूजन कर साल भर दुकानों में रखते हैं। दूसरी तरफ मिट्टी लाने वाला भी मूर्तिकारों से अच्छी रकम वसूल करता है। जब मूर्ति बनाकर तैयार की जाती है तो उस पर कलर चढ़ाने में अधिक खर्चा होता है। इसी वजह से मिट्टी की मूर्तियों की कीमत अधिक हो जाती है। पीओपी से बनी मूर्तियों पर कलर आसानी से चढ़ाया जा सकता है उनके कलर भी बहुत कम खर्चा होता है।
मिट्टी के गणेश-लक्ष्मी ही खरीदते हैं लोग
शहर में चौक पर दुकान लगाने वाले राजू बताते हैं कि लोग दिवाली पर पूजन के लिए मिट्टी से बनी गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां ही खरीदते हैं। वैसे दिवाली पर अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी खरीदी जाती हैं, लेकिन वे मिट्टी से बनी नहीं होती और उनकी पूजा साल भर होती है, जबकि मिट्टी से बने गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों की पूजा सिर्फ दिवाली पर ही होती है। दिवाली पर लोग मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा-अर्चना सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए करते हैं और पूजा मिट्टी से बने गणेश-लक्ष्मी की होती है, तो इस मामले में वे कोई रिस्क नहीं लेते।
इसलिए करें मिट्टी के गणेश-लक्ष्मी की पूजा
डॉक्टर ओमकारनाथ शास्त्री ने बताया कि भगवान गणेश वैसे भी लाल वर्ण स्वेत वर्ण के रूप में है दूसरी तरफ मिट्टी का निर्माण ब्रह्मा जी के द्वारा किया गया है। मिट्टी से बनी मूर्ति के पूजन का विधान हमारे धर्म शास्त्रों में भी मिलता है। यदि मिट्टी गंगा जी, तालाब, कुएं गौशाला से लाकर भगवान गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां बनाई जाए और फिर उनकी पूजा अर्चना की जाए तो अत्यंत लाभकारी होता है। प्लास्टर आफ पेरिस से बनी मूर्तियों का जिक्र हमारे शास्त्रों में नही मिलता है लेकिन सोने की मूर्ति का पूजन किया जा सकता है। मनुष्य का जीवन भी मिट्टी से शुरू होता है और अंत में मिट्टी में ही मिल जाता है।
Updated on:
17 Oct 2017 09:49 am
Published on:
17 Oct 2017 09:25 am
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