
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि पर ही सतयुग और त्रेता युग की शुरुआत हुई थी। इसके अलावा इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने परशुराम, नर-नारायण और हयग्रीव अवतार लिया था। इसलिए यह तिथि विशेष है और इस दिन किए कार्यों का ऐसा फल मिलता है, जिसका क्षय नहीं होता यानी वो फल घटता नहीं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अक्षय तृतीया बेहद शुभ तिथि होती है। इस तिथि पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा होती है, इस दिन किया हर काम सफल होता है। हर धार्मिक कार्य का अक्षय फल मिलता है। इसलिए माता लक्ष्मी से जुड़ी चीजों को घर लाने से उनका आशीर्वाद मिलता है, घर में उनका स्थायी वास होता है। साथ ही उन चीजों में वृद्धि होती है, भाग्य का साथ मिलता है और घर वालों की तरक्की होती है।
अक्षय तृतीया का पूजन मुहूर्त 10 मई को सुबह 5.33 बजे से लेकर दोपहर 12.18 बजे तक है। इस मुहूर्त में ही सोना या चांदी की खरीदारी करना शुभ है। इसके अलावा अक्षय आज धन योग, गजकेसरी योग, शुक्रादित्य योग, रवि योग, शश योग और सुकर्मा योग बन रहे हैं, इसलिए बाद में भी खरीदारी कर सकते हैं।
ऐसे लोग जो महंगा सोना चांदी या कोई रत्न नहीं खरीद सकते, उनके लिए भी धार्मिक ग्रंथों में कई उपाय बताए गए हैं। इन लोगों को कपड़ा, खाद्यान्न, दाल, घी आदि खरीदना चाहिए। वहीं श्रीयंत्र, कौड़ी, मटका, पीली सरसों आदि भी खरीद सकते हैं।
Published on:
10 May 2024 12:27 pm
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