
Ashadh 2025 Festival: आषाढ़ 2025 में व्रत त्योहार
June July Vrat Tyohar: बारिश और वर्षा ऋतु के कारक आषाढ़ मास की शुरुआत गुरुवार से होगी। इस मास में कई व्रत, पर्व और त्योहार आएंगे। मौसम में बदलाव के साथ विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तन देखने को मिलेगा। वर्षा ऋतु, देवी आराधना, जगन्नाथ रथयात्रा, गुरु की आराधना और चातुर्मास की शुरुआत के कारण यह मास विशेष माना जाता है। ज्योतिषविदों के अनुसार आषाढ़ मास में भगवान शिव और विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। इस दौरान भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा में चले जाते हैं।
पं. दामोदर प्रसाद शर्मा अनुसार, 18 जून को कालाष्टमी, 21 को योगिनी एकादशी, योग दिवस, 27 को जगन्नाथ रथयात्रा, 30 जून को द्वारकाधीश पाटोत्सव, कांकरोली और 3 जुलाई को दुर्गाष्टमी, अष्टाह्निका महापर्व, 4 जुलाई को भड़ल्या नवमी, 6 जुलाई को देवशयनी एकादशी, चातुर्मास प्रारंभ, 7 जुलाई को गुप्त नवरात्र समापन इत्यादि व्रत-त्योहार रहेंगे।
आषाढ़ मास में सूर्य पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। सूर्य पुराण के अनुसार इस मास के स्वामी सूर्य हैं, अत: उन्हें जल अर्पित करना चाहिए। अग्नि पुराण के अनुसार ’रवि’ नाम से सूर्य को पूजा जाता है।
चांदी की टकसाल में काले हनुमान जी मंदिर के युवाचार्य पं. योगेश शर्मा के अनुसार छाते का दान, अन्न और धन का दान, तथा मां दस महाविद्याओं की साधना से आत्मबल वृद्धि की परंपरा है। पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा व उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों के मध्य स्थित रहता है, इसी कारण इस मास का नाम आषाढ़ पड़ा है।
Published on:
12 Jun 2025 12:07 pm
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