चैत्र नवरात्रि 2020 : देवी मां के नौ रूपों की पूजा कब, कहां , कैसे-जानें हर बात

- जानिये किस देवी अराधना से होती है कौन से वर की प्राप्ति

By: दीपेश तिवारी

Updated: 19 Mar 2020, 04:44 PM IST

सनातनधर्म में शक्ति की पूजा का पर्व नवरात्रि कहलाता है। साल में 4 बार आने वालीं इन नवरात्रियों में दो नवरात्रि गुप्त मानी जातीं हैं, वहीं अन्य दो नवरात्रियों में एक चैत्र नवरात्रि Chaitra Navratri 2020 व दूसरी शारदीय नवरात्रि होती है।
वहीं इस साल यानि वर्ष 2020 में 25 मार्च से चैत्र नवरात्रि Chaitra Navratri 2020 की शुरुआत हो रही है। नवरात्रि सनातनधर्मियों का एक विशेष पर्व है। यह संस्कृत से लिया गया एक शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’।

नवरात्रि: मां दुर्गा की पूजा...
नवरात्रि में देवी के नौ रूपों Chaitra Navratri 2020 की पूजा की जाती है। देशभर में यह त्यौहार अलग-अलग ढंग से मनाते हैं, लेकिन एक चीज़ जो हर जगह सामान्य होती है वो है मां दुर्गा की पूजा। हर व्यक्ति नवरात्र के समय में माता को प्रसन्न करने के लिए पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना करता है और अपने सभी दुखों को दूर कर देने की प्रार्थना करता है।
माता दुर्गा : मां दुर्गा को भगवान शिव की पटरानी कहा जाता है।

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नवरात्रि : ऐसे मिलता है आशीर्वाद...
नवरात्रि पर हर कोई देवी Chaitra Navratri 2020 मां को प्रसन्न तो करना चाहता है, लेकिन कई बार इसके संबंध में जानकारी का अभाव भक्तों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। मां Chaitra Navratri 2020 को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि के दौरान लोग 9 दिनों तक व्रत भी रखते हैं, लेकिन माता में इतनी अधिक आस्था के बावजूद, अभी भी कई भक्तों के लिए नवरात्रि Chaitra Navratri 2020 और मां दुर्गा के विषय में बहुत सी बातें रहस्य बनी हुईं हैं।

जैसे, नवरात्रि के आख़िरी दिन पर ही कन्या पूजन क्यों करते हैं? माता की सवारी क्या-क्या होती है? माता को क्या भोग लगाएं! Chaitra Navratri 2020 नवरात्रि के 9 दिनों में किन रंगों का इस्तेमाल करें, कौन से मंत्र का जाप करें। इस तरह की कई महत्वपूर्ण जानकारियां नहीं होने के कारण तमाम कोशिशों के बावजूद कई भक्तों को मां का पूरा आशीर्वाद मिल पाता। आज हम आपको इन्हीं सब बातों के बारे में बता रहे हैं।

1 साल : कुल कितने नवरात्र
पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि देवी पुराण Chaitra Navratri 2020 के अनुसार एक साल में कुल चार नवरात्र होते हैं- दो प्रत्यक्ष(चैत्र और आश्विन) और दो गुप्त(आषाढ़ और माघ)। साल के पहले माह चैत्र में पहली नवरात्रि, साल के चौथे माह यानि आषाढ़ में दूसरी नवरात्रि, अश्विन माह में तीसरी नवरात्रि और ग्यारहवें महीने में चौथी नवरात्रि मनाते हैं।

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इन चारों नवरात्रों Chaitra Navratri 2020 में आश्विन माह की “शारदीय नवरात्रि” Chaitra Navratri 2020 और चैत्र माह की “चैत्र नवरात्रि” सबसे प्रमुख मानी जाती हैं।

आने वाले सालों में चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि की तारीख़

नवरात्रि - 2020 - 2021 - 2022
चैत्र नवरात्रि - बुधवार, 25 मार्च 2020 - मंगलवार, 13 अप्रैल 2021 - शनिवार, 2 अप्रैल 2022
शारदीय नवरात्रि - शनिवार, 17 अक्टूबर 2020 - गुरुवार, 7 अक्टूबर 2021 - सोमवार, 26 सितंबर 2022

चैत्र नवरात्रि : वैज्ञानिक महत्व
साल में आने वाले सभी Chaitra Navratri 2020 नवरात्रि ऋतुओं के संधि काल में होते हैं। चैत्र नवरात्रि के दौरान मौसम बदलता है और गर्मियों की शुरुआत हो जाती है। ऐसे में बीमारी आदि होने का सबसे ज़्यादा खतरा रहता है। नवरात्रि Chaitra Navratri 2020 का व्रत रखने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, मानसिक शक्ति प्राप्त होती है और शरीर एवं विचारों की भी शुद्धि होती है।

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना(घटस्थापना) का कारण...
पुराणों के अनुसार कलश को भगवान विष्णु का रुप माना गया है, इसलिए लोग मां दुर्गा की पूजा Chaitra Navratri 2020 से पहले कलश स्थापित कर उसकी पूजा करते हैं।

ऐसे करें घटस्थापना...
Chaitra Navratri 2020 नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त, सही समय और सही तरीके से ही घटस्थापना करनी चाहिए। पूजा स्‍थल पर मिट्टी की वेदी बनाकर या मिट्टी के बड़े पात्र में जौ या गेहूं बोएं। अब एक और कलश या मिट्टी का पात्र लें और उसकी गर्दन पर मौली बांधकर उसपर तिलक लगाएं और उसमें जल भर दें।

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कलश में अक्षत, सुपारी, सिक्का आदि डालें। अब एक Chaitra Navratri 2020नारियल लें और उसे लाल कपड़े या लाल चुन्नी में लपेट लें। नारियल और चुन्नी को रक्षा सूत्र में बांध लें। इन चीज़ों की तैयारी के बाद ज़मीन को साफ़ कर के पहले जौ वाला पात्र रखें, उसके बाद पानी से भरा कलश रखें, फिर कलश के ढक्कन पर नारियल रख दें।

इसके साथ ही आपकी कलश Chaitra Navratri 2020 स्थापना की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। कलश पर स्वास्तिक का चिह्न बनाकर दुर्गा Chaitra Navratri 2020 जी और शालीग्राम को विराजित कर उनकी पूजा करें। इस कलश को 9 दिनों तक मंदिर में ही रखें। आवश्यकतानुसार सुबह-शाम कलश में पानी डालते रहें।

किस दिन : किस देवी की पूजा?

दिन देवी मां
प्रतिपदा - शैलपुत्री
द्वितीया - ब्रह्मचारिणी
तृतीया - चंद्रघंटा
चतुर्थी - कूष्मांडा
पंचमी - स्कंदमाता
षष्ठी - कात्यायनी
सप्तमी - कालरात्रि
अष्टमी - महागौरी
नवमी - सिद्धिदात्री

मां दुर्गा Chaitra Navratri 2020 और उनके सोलह श्रृंगार...
कुमकुम या बिंदी,सिंदूर,काजल,मेहंदी,गजरा,लाल रंग का जोड़ा,मांग टीका,नथ,कान के झुमके,मंगल सूत्र,बाजूबंद,चूड़ियां,अंगूठी,कमरबंद,बिछुआ,पायल

9 देवियों के नाम और उनका अर्थ...

1. शैलपुत्री पहाड़ों की पुत्री
2. ब्रह्मचारिणी - ब्रह्मचारीणी
3. चंद्रघंटा - चांद की तरह चमकने वाली
4. कूष्माण्डा - पूरा जगत में फैले पैर
5. स्कंदमाता - कार्तिक स्वामी की माता
6. कात्यायनी - कात्यायन आश्रम में जन्मी
7. कालरात्रि - काल का नाश करने वाली
8. महागौरी - सफेद रंग वाली मां
9. सिद्धिदात्री - सर्व सिद्धि देने वाली

नवरात्रि में जौ बोये जाने का कारण...
Chaitra Navratri 2020 नवरात्रि में जौ बोने के पीछे मूुख्य कारण यह माना जाता है कि जौ यानि अन्न ब्रह्म स्वरूप है और हमें अन्न का सम्मान करना चाहिण्। इसके अलावा धार्मिक Chaitra Navratri 2020 मान्यता के अनुसार धरती पर सबसे पहली फसल जौ उगाई गई थी।

नवरात्रि : इसलिए करते हैं कन्या पूजन...
छोटी कन्याओं को देवी Chaitra Navratri 2020 का स्वरूप माना जाता है और वे उर्जा का प्रतीक मानी जाती है, इसलिए नवरात्रि में इनकी विशेष पूजा करते हैं।

उम्र के अनुसार कन्याओं का देवी स्वरूप
चार साल की कन्या - कल्याणी
पांच साल की कन्या - रोहिणी
छ: साल की कन्या - कालिका
सात साल की कन्या - चण्डिका
आठ साल की कन्या - शांभवी
नौ साल की कन्या - दुर्गा
दस साल की कन्या - सुभद्रा

कन्या पूजन : भैरव के रूप में रखते हैं बालक
भगवान शिव ने मां दुर्गा Chaitra Navratri 2020 की सेवा के लिए हर शक्तिपीठ के साथ एक-एक भैरव को रखा हुआ है, इसलिए देवी के साथ इनकी पूजा भी ज़रूरी होती है, तभी कन्या पूजन में भैरव के रूप में एक बालक को भी रखते हैं।

दिन के अनुसार : माता का वाहन..
Chaitra Navratri 2020नवरात्रि का पहला दिन यदि रविवार या सोमवार हो तो मां दुर्गा “हाथी” पर सवार होकर आती हैं। यदि शनिवार और मंगलवार से नवरात्रि की शुरुआत हो तो माता “घोड़े” पर सवार होकर आती हैं। वहीं गुरुवार और शुक्रवार का दिन नवरात्रि Chaitra Navratri 2020 का पहला दिन हो तो माता की सवारी “पालकी” होती है। और अगर नवरात्रि बुधवार से शुरू हो तो मां दुर्गा “नाव” में सवार होकर आती हैं।

माता के वाहन शुभ और अशुभ
हाथी - शुभ
घोड़ा - अशुभ
डोली - अशुभ
नाव - शुभ
मुर्गा - अशुभ
नंगे पाव - अशुभ
ग-धा - अशुभ
हंस - शुभ
सिंह - शुभ
बाघ - शुभ
बैल - शुभ
गरूड - अशुभ
मोर - शुभ

नवरात्रि के 9 दिन : 9 देवियों के 9 बीज मंत्र

पंडित शर्मा के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों Chaitra Navratri 2020 तक देवी दुर्गा की पूजा-आराधना का विधान है। नवदुर्गा के इन मंत्रों को प्रतिदिन की देवी के दिनों के अनुसार मंत्र जप करने से मनोरथ सिद्धि होती है। आइए जानें नौ देवियों के दैनिक पूजा के मंत्र...

दिन देवी मंत्र
पहला दिन - शैलपुत्री - ह्रीं शिवायै नम:।
दूसरा दिन - ब्रह्मचारिणी - ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
तीसरा दिन - चन्द्रघण्टा - ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
चौथा दिन - कूष्मांडा - ऐं ह्री देव्यै नम:।
पांचवा दिन - स्कंदमाता - ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
छठा दिन - कात्यायनी - क्लीं श्री त्रिनेत्राय नम:।
सातवां दिन - कालरात्रि - क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
आठवां दिन - महागौरी - श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
नौवां दिन - - सिद्धिदात्री - ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।

नवरात्रि के 9 दिन : इन 9 रंगों का करें इस्तेमाल
नवरात्रि (Navratri) के दौरान पूजी जाने वाली सभी 9 माताओं के अलग रंग होते हैं। कई भक्त पूरे Chaitra Navratri 2020 नवरात्रि इन्हीं खास रंगों के कपड़े (Navratri Colors) पहनते हैं, तो कुछ हर दिन माता को उन्हीं से जुड़े रंग के आसन बिछाकर पूजते हैं। यहां जानिए कौन-सी माता को भाता है कौन-सा रंग...

प्रतिपदा - पीला रंग।
द्वितीया - हरा रंग ।
तृतीया - भूरा रंग ।
चतुर्थी - नारंगी रंग।
पंचमी - सफेद रंग ।
षष्ठी - लाल रंग ।
सप्तमी - नीला रंग।
अष्टमी - गुलाबी रंग।
नवमी - बैगनी रंग ।

नवरात्रि के 9 भोग...
नवरात्रि पर्व पर माता की आराधना के साथ ही व्रत-उपवास और पूजन का विशेष महत्व है। जिस प्रकार नवरात्रि के नौ दिन, मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, उसी प्रकार इस नौ दिनों में माता को प्रत्येक दिन के अनुसार भोग या प्रसाद अर्पित करने से देवी मां सभी प्रकार की समस्याओं का नाश करती हैं।

नवरात्रि के 9 दिन

मां दुर्गा के भोग
प्रतिपदा - गाय का घी
द्वितीया - शक़्कर
तृतीया - दूध व दूध की मिठाई
चतुर्थी - मालपुए
पंचमी - केला
षष्ठी - शहद
सप्तमी - गुड़
अष्टमी - नारियल
नवमी - तिल

नवरात्रि Chaitra Navratri 2020 : किस देवी की अराधना से होती है कौन से वर की प्राप्ति...

1. प्रथम देवी शैलपुत्री : कालपुरूष सिद्धांत के अनुसार कुण्डली में चंद्रमा का संबंध चौथे भाव से होता है अतः देवी शैलपुत्री कि साधना का संबंध व्यक्ति के सुख, सुविधा, माता, निवास स्थान, पैतृक संपत्ति, वाहन, जायदाद तथा चल-अचल संपत्ति से है। मान्यता है कि मां शैलपुत्री की आराधना करने से जीवन में स्थिरता आती है। इसके साथ ही मनपसंद वर-वधू, धन लाभ और अच्छी नौकरी की प्राप्ति होती है।

2. द्वितीया देवी मां ब्रह्मचारिणी : मां के इस दिव्य स्वरूप का पूजन करने मात्र से ही भक्तों में आलस्य, अंहकार, लोभ, असत्य, स्वार्थपरता व ईष्र्या जैसी दुष्प्रवृत्तियां दूर होती हैं। मान्यता है कि देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला है।

3. तृतीय देवी चन्द्रघंटा : माता का यह रुप लोक परलोक के कष्टों से मुक्ति प्रदान करने वाला है। माना जाता है कि माता के इस रुप की आराधना करने से मन को असीम शांति मिलती है और भय का नाश होता है। माता का यह रुप अहंकार, लोभ से मुक्ति प्रदान करता है।

4. चतुर्थ देवी कूष्माण्डा : मान्यता है कि श्री कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं। इनकी आराधनासे मनुष्य त्रिविध ताप से मुक्त होता है। मां कुष्माण्डा सदैव अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखती है। इनकी पूजा आराधना से हृदय को शांति एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं।
मंत्र : "सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधानाहस्तपद्याभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु में॥"

5. पाचवीं माता स्कंदमाता : मां स्कंदमाता की उपासना से भक्त की समस्त इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस मृत्युलोक में ही उसे परम शांति और सुख का अनुभव होने लगता है। उसके लिए मोक्ष का द्वार स्वमेव सुलभ हो जाता है।

6. षष्ठी माता कात्यायनी : माना जाता है कि जिन कन्याओं के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो, उन्हें इस दिन मां कात्यायनी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, जिससे उन्हें मनोवान्छित वर की प्राप्ति होती है।
विवाह के लिए कात्यायनी मंत्र-
'ऊॅं कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि ! नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:।'

7. सातवीं देवी मां कालरात्रि : नवरात्र सप्तमी तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होती है। सप्तमी की रात्रि ‘सिद्धियों’ की रात भी कही जाती है। इस दिन आदिशक्ति की आंखें खुलती हैं।

8. अष्टमी माता महागौरी : मां महागौरी की अराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा देवी का भक्त जीवन में पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी बनता है। दुर्गा सप्तशती में ऐसा वर्णन आता है की एक समय में देवतागण ने शुभ निशुम्भ से पराजित होने के बाद गंगा के तट पर जाकर देवी से प्रार्थना की कि देवताओं ने देवी महागौरी का गुणगान किया।

9. नवम देवी मां सिद्धिदात्री : मां दुर्गा अपने नौवें स्वरूप में सिद्धिदात्री के नाम से जानी जाती हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। इस दिन माता सिद्धिदात्री की उपासना से उपासक की सभी सांसारिक इच्छाएं और आवश्यकताएं पूर्ण हो जाती हैं।

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