चैत्र नवरात्र : तीसरे दिन पूजी जाती हैं मां चंद्रघंटा, ऐसे करें मां को प्रसन्न,मिलेगी आत्मिक शक्ति

मां का यह रूप बहुत शांतिदायक... third day of navratra maa chandraghanta

Deepesh Tiwari

27 Mar 2020, 06:56 AM IST

सनातन धर्म मानने वालों के प्रमुख पर्वों में से एक शक्ति का पर्व चैत्र नवरात्र शुरू हो चुके है। ऐसे में 27मार्च 2020, शुक्रवार को मां दुर्गाजी की तीसरी शक्ति चंद्रघंटा का दिन है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन मा चंद्रघंटा के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है। इस दिन साधक का मन 'मणिपूर' चक्र में प्रविष्ट होता है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार मां चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियां सुनाई देती हैं, ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं।

नवरात्र में तीसरे दिन इसी मां चंद्रघंटा Story of Maa Chandraghanta की पूजा का महत्व है। मान्यता के अनुसार इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाई देने लगती हैं। कहा जाता है कि इस दिन साधक का मन 'मणिपूर' चक्र में प्रविष्ट होता है।
(मणिपूर चक्र- माना जाता है कि नाभि में दस दल वाला मणिपूर चक्र है। यह प्रसुप्त पड़ा रहे तो तृष्णा, ईष्या, चुगलीए भय, घृणा, मोह आदि कषाय-कल्मष मन में जड़ जमाए पड़े रहते हैं।)

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पंडित सुनील शर्मा के अनुसार देवी चन्द्रघंटा की पूजा और भक्ति करने से आध्यात्मिक शक्ति मिलती है। नवरात्रि के तीसरे दिन जो भी माता के तीसरे रूप मां चन्द्रघण्टा की पूजा अर्चना करता है, उन सभी को माता की कृपा प्राप्त होती है। नवरात्र के तीसरे दिन माता की पूजा के लिए सबसे पहले कलश की पूजा करके सभी देवी देवताओं और माता के परिवार के देवता, गणेश, लक्ष्मी, विजया, कार्तिकेय, देवी सरस्वती, एवं जया नामक योगिनी की पूजा करें उसके बाद फिर माता देवी चन्द्रघंटा की पूजा अर्चना करें।

मां का स्वरूप : nature of maa chandraghanta

मां के माथे पर घंटे के आकार में अर्धचंद्र है। जिसके चलते इनका यह नाम पड़ा मां का यह रूप बहुत शांतिदायक है। इनके पूजन से मन को शांति की प्राप्ति होती है। ये भक्त को निर्भय कर देती हैं। देवी का स्मरण जीवन का कल्याण करता है।
मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है।

इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। मां चंद्रघंटा के दस भुजाएं हैं और दसों हाथों में खड्ग, बाण सुशोभित हैं।

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मां की पूजा विधि : Maa Chandraghanta Puja

माता की चौकी (बाजोट) पर माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसकेबाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें। चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टीके घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। इसके बाद पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारामां चंद्रघंटा सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें।

इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधितद्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

ये भोग पसंद है मां को : Holy offerings of Maa Chandraghanta

मां चंद्रघंटा मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं और और इसी का दान भी करें। ऐसा करने से मां खुश होती हैं और सभी दुखों का नाश करती हैं। इसमें भी मां चंद्रघंटा को मखाने की खीर का भोग लगाना श्रेयकर माना गया है।

मंत्र Maa Chandraghanta mantras - पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

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देवी मां का आशीर्वाद : blessings of Maa Chandraghanta

साधक के समस्त पाप और बाधाएं नष्ट कर देती हैं।

ध्यान
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम।
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम।
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम॥

स्तोत्र पाठ
आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्ति: शुभपराम।
अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम।
धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम॥
नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम।
सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम॥


चन्द्रघंटा कवच:
रहस्यं श्रुणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।
श्री चन्द्रघन्टास्य कवचं सर्वसिध्दिदायकम्॥

बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोध्दा बिना होमं।
स्नानं शौचादि नास्ति श्रध्दामात्रेण सिध्दिदाम॥

कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च न दातव्यं न दातव्यं न दातव्यं कदाचितम्॥

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दीपेश तिवारी
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