
दत्तात्रेय जयंती : संपूर्ण पूजा विधि
प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि को त्रिदेवों के अंश भगवान दत्तात्रेय की जयंती मनाई जाती है। इस साल 2019 में 12 दिसंबर को हैं दत्तात्रेय जयंती का पर्व। शास्त्रों में कथा आती है कि मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि के दिन ही त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) ने भगवान दत्तात्रेय के रूप में जन्म लिया था, जिनके कुल 24 गुरु थे। भगवान दत्तात्रेय जी ईश्वर एवं गुरु दोनों रूप पूजे जाते हैं। इस दत्तात्रेय जयंती के दिन इस विधि विधान से करें उनकी पूजा आराधना।
दत्तात्रेय के दर्शन से होती है मनोकामनां पूरी
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख आता है की भगवान श्री दत्तात्रेय का जन्म मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा तिथि को प्रदोषकाल में त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अंश के रूप में हुआ था। श्रीमदभगवत के अनुसार भगवान दत्तात्रेय ने चौबीस गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की थी। ऐसी मान्यता है की मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को भगवान दत्तात्रेय का व्रत रखकर दत्तात्रेय के बालरुप का पूजन करने, उनके दर्शन मात्र से व्यक्ति की अनेक मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। भगवान दत्तात्रेय के तीन सिर, और छ: भुजाएं है।
पूजा विधि
1- इस दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा करके व्रत रखने से हर मनोकामनां पूरी है।
2- इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने पुण्यफल मिलता है।
3- भगवान दत्तात्रेय का पूजन गुरु दत्ता देव के नाम से भी किया जाता है।
4- धुप, दीप, चन्दन, हल्दी, मिठाई, फल, फूल से पूजन करने का विधान है।
5- भगवान दत्तात्रेय का पूजन करने के बाद 7 बार परिक्रमा करते हुए उनके मंत्र- ऊँ द्रां दत्तात्रेयाय नमः का जप करने से जीवन के सभी अभाव दूर हो जाते हैं।
भगवा दत्तात्रेय इन 24 को अपना गुरु मानते थे-
1- कबूतर, 2- मधुमक्खी, 3- कुररी पक्षी कुररी पक्षी (पानी के निकट रहने वाले स्लेटी रंग के पक्षी है। 4- भृंगी कीड़ा, 5- पतंगा, 6- भौंरा, 7- रेशम का कीड़ा, 8- मकड़ी, 9- हाथी, 10- हिरण, 11- मछली, 12- सांप, 13- अजगर, 14- बालक
15- पिंगला वेश्या, 16- कुमारी कन्या, 17- तीर बनाने वाला, 18- आकाश-पृथ्वी, 19- जल,
20- सूर्य, 21- वायु, 22- समुद्र, 23- आग, 24- चन्द्रमा
***********
Published on:
09 Dec 2019 11:25 am
बड़ी खबरें
View Allत्योहार
धर्म/ज्योतिष
ट्रेंडिंग
