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भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग की पूजा-अर्चना की जाती है। शिवलिंग पर जहां कुछ चीजें अर्पित करने से शिवजी की विशेष कृपा होती है, वहीं कुछ चीजों को शिवपूजा में भूलकर भी शामिल नहीं करना चाहिए।
सावन का महीना खास होता है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। इस पूरे माह में शिव जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। शिव जी को श्रावण मास का देवता कहा जाता है। हिंदू धर्म में महादेव की पूजा करने के लिए सावन के महीने को सबसे उत्तम माना गया है। पूजा में भगवान शिव को क्या अर्पित करना है, इसका भी खास महत्त्व है।
भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। इसीलिए उन्हें आशुतोष कहा जाता है। भगवान शिव को कई चीजें प्रिय हैं। बिल्वपत्र, आंकड़ा, धतूरा, भांग, कर्पूर, दूध, चावल, चंदन, भस्म, रुद्राक्ष आदि। भगवान शिव का जल, दही, दूध, घी, इत्र, बिल्वपत्र, धतूरा, आक या चमेली का फूल, शहद, मिश्री, गंगाजल, सरसों के तेल, कुशा जल और गन्ने के रस से अभिषेक करवा सकते हैं।
शिवजी को क्यों नहीं चढ़ाते केतकी सहित ये चीजें ?
शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव पर सिंदूर चढ़ाने की मनाही है, क्योंकि सिंदूर को सौंदर्य और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसका इस्तेमाल महिलाएं अपनी मांग में करती हैं। यह भगवान शिव को केवल महाशिवरात्रि उत्सव में चढ़ाया जा सकता है।
हल्दी का संबंध सौभाग्य, सौंदर्य और भगवान विष्णु से माना गया है। जबकि शिवलिंग को वीरता और पौरुष का प्रतीक माना जाता है। इसलिए शिवलिंग पर हल्दी अर्पित करना भी अशुभ माना गया है।
शिव पुराण के अनुसार केतकी के फूल को भगवान शिव का श्राप लगा हुआ है। ब्रह्मा जी के झूठ में साथ देने के कारण भगवान सदाशिव ने केतकी पुष्प को श्राप दे दिया था। इसलिए शिव पूजा में केतकी के फूल अर्पित करना निषेध है। शास्त्रों के मुताबिक शिव पूजा में आंकड़े का फूल चढ़ाना चाहिए।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शिवलिंग पर नारियल पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। नारियल को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। भगवान शिव भगवती लक्ष्मी को बहन के रूप में मानते हैं। भगवान शिव की पूजा में तुलसी दल का भी इस्तेमाल न करें।
- पंडित निलेश शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
Updated on:
08 Jul 2023 01:49 pm
Published on:
08 Jul 2023 11:15 am
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