
पूरे देश में महाशिवरात्रि का त्यौहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसके अलावे कश्मीरी पंडितों के लिए के लिए यह सबसे बड़ा त्यौहार होता है। कश्मीरी पंडित इसे हेरथ के रूप में मनाते हैं।
हेरथ शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है हररात्रि अर्थात शिवरात्रि। हेरथ को जम्मू कश्मीर के संस्कृति को संरक्षित करने का त्यौहार माना जाता है। कश्मीरी पंडित महाशिवरात्रि को हेरथ के तौर पर मनाते हैं।
बताया जाता है कि आज के दिन कश्मीरी पंडित भगवान शिव सहित उनके परिवार की स्थापना घरों में कराते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से वटुकनाथ घरों में मेहमान बनकर आते हैं।
पूजा विधि
मान्यता के अनुसार, हेरथ के दिन भगवान शिव को उनके संपूर्ण परिवार के साथ घर में स्थापित किया जाता है। कलश और गागर में अखरोट भरे जाते हैं। मान्यता है कि अखरोट चारों वेदों का प्रतीक है। वहीं सोनिपतुल जिसे भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है, इनकी पूजा की जाती है।
इसके साथ ही पंचामृत स्नान के बाद महिमनापार के साथ फूल, बेलपत्र, धतूरा का अभिषेक किया जाता है। पूजन विधि पूरे होने के पश्चात कश्मीरी पंडित एक दूसरे को हेरथ की शुभकामनाएं देकर हेरथ पर्व को पूरा करते हैं।
Published on:
21 Feb 2020 11:51 am
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