
Lord Vishnu
हिंदू पंचाग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। माना जाता है कि एकादशी व्रत से चन्द्रमा के हर खराब प्रभाव को रोका जा सकता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एकादशी व्रत से ग्रहों के असर को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि एकादशी व्रत का सीधा प्रभाव मन और शरीर पर पड़ता है। अगर आप भी एकादशी व्रत का लाभ लेना चाहते हैं तो इन नियमों का पालन करना होगा। आइये जानते हैं कि एकादशी व्रत करने के लिए किस नियम का पालन करना पड़ता है।
जया एकादशी का महत्व
वैसे तो माना जाता है कि एकादशी मन और शरीर को एकाग्र कर देती है लेकिन अलग अलग एकादशियां विशेष प्रभाव भी उत्पन्न करती हैं। माघ शुक्ल एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। माना जाता है कि इसका पालन करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से भूत, पिशाच आदि योनियों से मुक्ति मिल जाती है। इस बार जया एकादशी 5 फरवरी को है।
व्रत रखने के नियम
जया एकादशी व्रत दो प्रकार से रखा जाता है। पहला निर्जल व्रत और दूसरा फलाहारी। निर्जल व्रत पूर्ण रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति को ही रखना चाहिए। अन्य लोगों को फलाहारी रखना चाहिए। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस व्रत में फलों और पंचामृत का भोग लगाया जाता है.
इस दिन क्या करने से बचना चाहिए
जया एकादशी के दिन तामसिक आहार-व्यवहार तथा विचार से दूर रहना चाहिए। भगवान कृष्ण की उपासना के बिना दिन की शुरुआत नहीं करना चाहिए। मन को ज्यादा से ज्यादा भगवान कृष्ण में लगाना चाहिए। अगर स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो उपवास न रखें, केवल प्रक्रियाओं का भी पालन कर सकते हैं।
Published on:
04 Feb 2020 04:03 pm
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