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शुरु हुआ होलाष्टक, अस्त गुरु के कारण शुभ कार्यों पर लगी रोक

- होलिका दहन की तैयारियां शुरु - होलाष्टक के दौरान कुछ स्थानों पर नहीं होते शुभ कार्य, लेकिन पंडितों के अनुसार मध्यभारत में नहीं लगता इसका दोष

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Deepesh Tiwari

Mar 10, 2022

holastak 2022 start

holastak 2022 start

साल 2022 में होलाष्टक की शुरुआत आज यानि गुरुवार, 10 मार्च से हो गई। इसके साथ ही देशभर में होली की तैयारियां जोर शोर से शुरू हो जाएंगी। होलिका दहन के लिए डंडे और ध्वज लगाने की शुरुआत भी होलाष्टक के साथ होगी। मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान कई लोग शुभ कार्य नहीं करते हैं, लेकिन कुछ पंडितों का कहना है कि कुछ प्रदेशों में ही होलाष्टक का दोष माना जाता है।

मध्यभारत में इसका प्रभाव नहीं पड़ता है। हालाकि इस समय गुरु अस्त चल रहे हैं, इसलिए वैसे भी मांगलिक कार्यों पर विराम लगा हुआ है। इसके बाद 15 मार्च से खरमास की शुरुआत हो जाएगी, इसलिए शुभ कार्य अब 15 अप्रैल के बाद ही शुरू हो पाएंगे।

होलिका दहन का पर्व 17 मार्च को और धुलेंडी 18 मार्च को मनाई जाएगी। माना जाता है कि आठ दिन पहले भक्त प्रहलाद पर हिरण्यकश्यप की यातनाएं अधिक बढ़ गई थी, और आठवें दिन होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठी थी। इसलिए इन आठ दिनों को लोग यातना के रूप में याद करते हैं। इसी प्रकार धुलेंडी के दिन उत्साह के साथ रंग गुलाल लगाकर होली खेलते हैं।

मध्यभारत में नहीं लगता दोष: पंडित विष्णु राजौरिया का कहना है कि कुछ राज्यों में होलाष्टक में मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं। सतलज, रावी, व्यास, सिंधु और झेलम इन पांच नदियों के किनारे बसे पंजाब, प्रदेशों में होलाष्टक के दौरान मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।

मध्यभारत में इसका दोष नहीं लगता है। जिन प्रदेशों में होलाष्टक का दोष मान्य होता है, वहां शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। शास्त्रों में भी मध्यभारत में होलाष्टक का दोष मान्य नहीं किया गया है।

शहर में 600 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में होलिका दहन के लिए तैयारियां शुरू हो गई है। शहर में इस बार चौक, चौराहो, विभिन्न कॉलोनियों में 600 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा। पिछले साल कोरोना संक्रमण के कारण होलिका दहन और धुलेंडी पर्व का उत्साह कम था, लेकिन इस बार पाबंदियां हटने के बाद होली पर्व को लेकर उत्साह का माहौल नजर आने लगा है।

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