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कालाष्टमी के दिन भगवान शिव के विग्रह रूप कालभैरव की पूजा की जाती है। इस बार कालाष्टमी 15 फरवरी, शनिवार के दिन पड़ रही है। इस दिन कालाष्टमी का व्रत रखा जाएगा और विधि-विधान से पूजा पाठ की जाएगी। शास्त्रों के अनुसार इस दिन कुछ कार्यों को करने की मनाही है, जिन्हें करने से व्रत का फल नहीं मिल पाता है। काल भैरव भगवान शिव का पांचवा अवतार माना जाता है। तो आइए जानते हैं इस दिन क्या करें क्या नहीं....
कालाष्टमी के दिन जरुर करें ये काम
1. कालाष्टमी के दिन भगवान शिव की पूजा करें, इससे भगवान भैरव का आशीर्वाद मिलता है।
2. कालाष्टमी के दिन भैरव देवता के मंदिर में जाकर सिंदूर, सरसों का तेल, नारियल, चना, चिंरौंजी, पुए और जलेबी चढ़ाएं, भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होगा।
3. काल भैरव जी की कृपा पाने के लिये भैरव देवता की प्रतिमा के आगे सरसों के तेल का दीपक लगाएं और श्रीकालभैरवाष्टकम् का पाठ करें।
4. कालाष्टमी के दिन से लगातार 40 दिनों तक काल भैरव का दर्शन करें। इस उपाय को करने से भगवान भैरव प्रसन्न होंगे और आपकी मनोकामना को पूर्ण करेंगे।
5. भैरव देवता को प्रसन्न करने के लिए काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं, भगवान भैरव के साथ ही शनिदेव की कृपा भी बनेगी।
कालाष्टमी के दिन भूलकर भी ना करें ये काम
1. काल भैरव जयंती यानी कालाष्टमी के दिन झूठ बोलने से बचें, झूठ बोलने से नुकसान आपको होगा।
2. आमतौर पर बटुक भैरव की ही पूजा करनी चाहिए क्योंकि यह सौम्य पूजा है।
3. काल भैरव की पूजा कभी भी किसी के नाश के लिए न करें।
4. माता-पिता और गुरु का अपमान न करें।
5. बिना भगवान शिव और माता पार्वती के काल भैरव पूजा नहीं करना चाहिए।
6. गृहस्थ लोगों को भगवान भैरव की तामसिक पूजा नहीं करनी चाहिए।
7. कुत्ते को मारे नहीं। संभव हो तो कुत्ते को भोजन कराएं।
Published on:
14 Feb 2020, 5:41 PM IST
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