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13 दिसंबर से शुरू हो रहा खरमास, महीने भर शुभ कार्यों पर लगेगा विराम

लेकिन खरमास में इन कामों को अति आवश्यक होने पर किए जा सकते हैं

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भोपाल

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Shyam Kishor

Dec 06, 2019

13 दिसंबर से शुरू हो रहा खरमास, महीने भर शुभ कार्यों पर लगेगा विराम

13 दिसंबर से शुरू हो रहा खरमास, महीने भर शुभ कार्यों पर लगेगा विराम

साल 2019 के अंतिम माह में 13 दिसंबर दिन शुक्रवार से पौष का महीना खलमाल शुरू होगा जो आगामी नये वर्ष में 14 जनवरी 2020 तक रहेगा। हिन्दू घर्म शास्त्रों के अनुसार जब भी सूर्य गुरु की राशि धनु या मीन राशि में प्रवेश करता है, उस अवधी को खरमास या खलमास कहा जाता है। जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है तो उसे धनु सक्रांति कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. विष्णु राजोरिया के अनुसार इस एक माह की अवधी में कोई भी शुभ मांगलिक कार्य करने की मनाही शास्त्रों में बताई गई है। जानें खरमास में क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए।

ज्योतिषाचार्य पं. विष्णु राजोरिया ने पत्रिका डॉट कॉम को बताया कि- इस बार खरमास का 13 दिसंबर 2019 दिन शुक्रवार को सुबह सूर्योदय के साथ ही शुरू हो जाएगा। खरमास में सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेगा और सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास या मलमास प्रारंभ हो जाएगा। यह खरमास पूरे एक माह तक 14 जनवरी 2020 तक धनु में रहेगा। इस अवधी में कोई भी शुभ मांगलिग धार्मिक आयोजन जैसे- विवाह, नये घर में गृह प्रवेश, नये वाहन की खरीदी, संपत्तियों का क्रय विक्रय करना, मुंडन संस्कार जैसे अनेक शुभ कार्यों को इस एक माह तक नहीं किया जायेगा। 14 जनवरी 2020 को जब सूर्य, मकर राशि में प्रवेश करेगा उसी के साथ खरमास समाप्त हो जाएगा।

पं. विष्णु राजोरिया के अनुसार जब सूर्य गुरु की राशि धनु एवं मीन राशि में प्रवेश करता है तो इससे गुरु का प्रभाव समाप्त हो जाता है और शुभ मांगलिक कार्यों को करने के लिए गुरु का पूर्ण बली अवस्था में होना आवश्यक है। कहा जाता है कि इस दौरान सूर्य मलिन अवस्था में रहता है, इसलिए इस एक माह की अवधी में किसी भी प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य नहीं किये जाते। खासकर इस समय विवाह संस्कार तो बिलकुल नहीं किए जाते हैं, क्योंकि विवाह के लिए सूर्य और गुरु दोनों को मजबूत होना चाहिए।

धनु खरमास में इन कामों को किया जा सकता है

- अगर प्रेम-विवाह या स्वयंवर का मामला हो तो विवाह किया जा सकता है।
- अगर कुंडली में बृहस्पति धनु राशि में हो तो भी इस अवधि में शुभ कार्य किये जा सकते हैं।
- जो कार्य नियमित रूप से हो रहे हों उनको करने में भी खरमास का कोई बंधन या दबाव नहीं है।
- सीमान्त, जातकर्म और अन्नप्राशन आदि कर्म पूर्व निश्चित होने से इस अवधि में किये जा सकते हैं।
- गया में श्राद्ध भी इस अवधि में किया जा सकता है, उसकी भी मनाही नहीं है।

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